बेंगलुरु, नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज करते हुए, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि वह दो साल से अधिक की शेष अवधि तक पद पर बने रहेंगे, अपना कार्यकाल पूरा करेंगे और सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर इसको लेकर कोई भ्रम नहीं है।

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बेंगलुरु, नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज करते हुए, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि वह दो साल से अधिक की शेष अवधि तक पद पर बने रहेंगे, अपना कार्यकाल पूरा करेंगे और सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर इसको लेकर कोई भ्रम नहीं है। येदियुरप्पा ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और कोविड-19 महामारी के साथ पिछला एक वर्ष उनकी सरकार के लिए एक ‘‘अग्नि परीक्षा’’ जैसा था। यहां पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की इच्छा देश के विकास मानचित्र पर कर्नाटक को पहले स्थान पर ले जाने की है। उन्होंने राज्य के सामने आई वित्तीय बाधाओं का भी उल्लेख किया। नेतृत्व परिवर्तन और सरकार पर इसके प्रभाव के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में येदियुरप्पा ने कहा, “मेरी सरकार के पिछले डेढ़ साल में एक दिन के लिए भी मैंने इसकी चिंता नहीं की। मेरा ध्यान अपने काम और विकास पर केंद्रित है। इन बातों का कोई असर नहीं हुआ।” इससे पहले भाजपा महासचिव व राज्य के प्रभारी अरुण सिंह ने स्पष्ट किया कि अगले ढाई साल तक कोई समस्या नहीं है और येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बने रहेंगे। उन्होंने कहा, “हमारे मंत्रियों या विधायकों और लोगों के बीच कोई भ्रम नहीं है। यदि भ्रम है, तो यह मीडिया के दोस्तों के बीच है। अगर आप सहयोग करेंगे तो सब ठीक हो जाएगा।” येदियुरप्पा की आयु (77 वर्ष) को देखते हुए ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा आलाकमान आने वाले दिनों में कर्नाटक में नेतृत्व में बदलाव कर सकता है। हालांकि प्रदेश भाजपा ने इस तरह की अटकलों को खारिज किया है, लेकिन पार्टी के भीतर कुछ विधायकों ने अपने बयानों से इस बात को हवा दी है। भाजपा विधायकों के खुले तौर पर बयान देने और उनके द्वारा असहमति व्यक्त करने वाले पत्र लिखे जाने के बारे में पूछे जाने पर, येदियुरप्पा ने कहा कि इतने सारे विधायकों में से एक या दो ने कुछ बयान दिए होंगे। उन्होंने कहा, “उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए, मैं अपने सभी विधायकों के साथ बैठक करूंगा।” राज्य और इसकी अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के प्रभाव का उल्लेख करते हुए, मुख्यमंत्री, जो वित्त विभाग भी संभालते हैं, ने कहा, “हमें 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ सकता है और अगले बजट में भी हमें इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।”