बेंगलुरु, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) नई पीढ़ी के अपने छोटे रॉकेट को पहली कक्षीय प्रायोगिक उड़ान पर भेजने की तैयारी कर रहा है।

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बेंगलुरु, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) नई पीढ़ी के अपने छोटे रॉकेट को पहली कक्षीय प्रायोगिक उड़ान पर भेजने की तैयारी कर रहा है। संगठन ने छोटे उपग्रहों के उभरते वैश्विक प्रक्षेपण बाजार के मद्देनजर छोटे लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान(एसएसएलवी) का विकास शुरू किया था। इसरो के कई सूत्रों ने बृहस्पतिवार को कहा कि एसएसएलवी-डी1 को मार्च के अंत में या अप्रैल के शुरू में प्रक्षेपित किए जाने की संभावना है। अंतरिक्ष विभाग के सचिव एवं इसरो अध्यक्ष के सिवन ने कहा कि एसएसएलवी छोटे उपग्रहों की किफायती मांग के मद्देनजर विकसित किया गया है। सिवन ने पूर्व में कहा था कि एसएसएलवी के कलपुर्जों को महज 72 घंटे में जोड़ा जा सकता है। इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष जी नारायण ने कहा कि विश्व में छोटे प्रक्षेपण यानों की मांग में वृद्धि हुई है और इसीलिए इसपर ध्यान केंद्रित किया गया है।