बैतूल, भाजपा शासित केन्द्र सरकार की अमृत सिटी जल परियोजना के तहत ताप्ती बैराज का निमार्ण कर बैतूल नगर में प्रतिवर्ष मार्च माह से होने वाले पेयजल के संकट से निपटने के लिए नगरीय प्रशासन द्वारा ताप्ती जल का मान कम अपमान ज्यादा किया है, जिसके चलते बैतूल तक पहुंचने वाली ताप्ती अमृत जल परियोजना का लाखो लीटर पानी बैतूल नगर की मुख्य पेयजल आपूर्ति करने वाली पाईप लाइन तक पहुंचने के पहले ताप्ती जल के वेग के कारण दर्जनो बार फूट गई और अनेको बार लीकेज मार गई। भाजपा की बैतूल नगर पालिका ने भाजपा की केन्द्र सरकार से अमृत जल पेयजल आपूर्ति योजना कार्यक्रम में स्वंय को सर्वश्रेष्ठ घोषित करवा कर केन्द्रीय मंत्री से एक रंगारंग सरकारी कार्यक्रम में दिल्ली जाकर श्रेष्ठता प्रमाण पत्र लेने के लिए जो ताप्ती की तस्वीर पेश की वह हकीगत से कोसो दूर है।
बद्नसीब ही कहे जिले के मुखिया को
कलैक्टर के बंगले पर ताप्ती जल आपूर्ति नहीं !
जिस ताप्ती के बारे में कहा जाता है कि गंगा में स्नान करने का , यमुना के जल आचमन का , नर्मदा के दर्शन का जो पुण्य मिलता है वह ताप्ती के नाम मात्र स्मरण से मिल जाता है, शायद यही कारण है कि बैतूल नगर पालिका ने पुण्य सलिला माँ सूर्यपुत्री ताप्ती के जल के स्नान, आचमन, एवं दर्शन से जिला कलैक्टर को ही नहीं बल्कि उसके पूरे परिवार एवं सेवको को भी वंचित कर रखा। कलैक्टर को बार – बार ताप्ती का नाम याद दिला कर बैतूल नगर पालिका मोक्ष प्रदान करने मे लगी हुई है। इस जिले का महज दुर्रभाग्य कहे या विडम्बना कलैक्टर ने जी तोड़ मेहनत की ताप्ती जल पारसडोह से बैतूल तक लाने में लेकिन वे बदनसीब निकलने उन्हे ताप्ती जल पीने तक को नहीं मिला। जिसका प्रमाण यह है कि जिले के प्रथम नागरिक जिला कलैक्टर के सरकारी आवास में ताप्ती जल की आपूर्ति लाइन से जोडा ही नहीं गया जिसके कलैक्टर के सरकारी बंगले एंव आफिस में पीने का पानी ताप्ती जल का न होकर वाटर कैन या फिर टयूबवेल का है। वर्तमान में जिला कलैक्टर से लेकर जिले के टाप मोस्ट अधिकारियों से लेकर बैतूल के विधायक एवं सासंद के घर तक ताप्ती जल की आपूर्ति न होना अपने आप में ही नगरीय प्रशासन की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। अब यह बात अलग है कि अधिकारी से लेकर विधायक एवं सासंद तक यह कह दे कि हमारे घर की सप्लाई स्वंय के नीजी या सरकारी बोर से हो रही है!
दो पूर्व सासंदो को नसीब नहीं है ताप्ती जल
भूतपूर्व एवं अभूतपूर्वो के घरो को नहीं जोड़ा गया
भले ही अपने कुछ चाटुकार मीडिया कर्मियों को स्वरूचि भोज करवा कर बैतूल नगर पालिका के अध्यक्ष अलकेश आर्य एवं सीएमओ श्रीमति प्रियंका सिंह पेयजल आपूर्ति के नाम पर दो करोड़ रूपये बचाने का दावा करने लेकिन इस बात में दम है कि आज भी जिले की दो बार की सासंद रही श्रीमति ज्योति बेवा प्रेम सिंह धुर्वे एवं हेमंत स्वर्गीय विजय कुमार खण्डेलवाल के घरो को ताप्ती जल की आपूर्ति नहीं हो रही है। कहने का मतलब साफ है कि ताप्ती का जल बिना फिल्टर के प्रदुषित एवं मटमैला सप्लाई किए जाने के कारण आरोपो एवं प्रत्यारोपो से घिरी बैतूल नगरीय निाकय के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि बैतूल जिला मुख्यालय के २० हजार नल कनेक्शन में जिले के वर्तमान सासंद / विधायक / नगर पालिका अध्यक्ष / उपाध्यक्ष / पार्षद / तथा एल्डर मेन के अलावा जिले के कितने भूतपूर्व सासंद / विधायक / नपा अध्यक्ष /  उपाध्यक्ष / पार्षद / के अलावा किस – किस राजनैतिक दलो के अध्यक्षो के घरो पर ताप्ती जल की आपूर्ति हो रही है। जिला कलैक्टर / पुलिस अधीक्षक सहित क्लास वन से लेकर फोर्थ क्लास के कितने अधिकारी ताप्ती जल का पेयजल के रूप में प्रयोग कर रहे है….!
पीने मे कम शौचालय में ज्यादा प्रयोग
बैतूल जिला मुख्यालय पर दो दर्जन से अधिक शुद्ध क्यूरोफाइड वाटर सप्लाई के चार दर्जन से अधिक वाहन प्रतिदिन लाखो लीटर पीने का शुद्ध पानी बेचने का कारोबार कर रहे है। वर्तमान समय में जिला संयुक्त कलैक्टर कार्यालय में आधा दर्जन वाहनो से शुद्ध पेयजल की (वाटर केन ) टंकियों से पीने के पानी की सप्लाई जिले के प्रमुख कार्यालयो में की जा रही है। संयुक्त जिला कलैक्टर कर्यालय तक को अमृत सिटी पेयजल योजना से जोड़ा तक नहीं गया है। ऐसे मे नगर पालिका बैतूल का स्वंय अपनी पीठ को थप- थपाना किसी बड़ी कमजोर नय को बचाने का कार्य है। बैतूल जिला मुख्यालय पर इन पंक्तियों के लिखे जाने तक ताप्ती जल के तथाकथित मटमैले एवं प्रदुषित होने के कारण उसका उपयोग पीने के पानी के रूप में कम शौचालयो एवं कपड़े धोन / बर्तन धोने में गाडिय़ो को धोने में ज्यादा हो रहा है।
52 किमी दूर से पारसडोह से ताप्ती जल की आपूर्ति
बैराज तक आते – आते रास्ते में ही गायब हो गया पानी !
सरकारी प्रेस विज्ञिप्त में दांवा किया गया कि बैतूल जिला प्रशासन एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी की दृढ़ इच्छाशक्ति ने इस साल अच्छे परिणाम दिए। इस वर्ष भीषण गर्मी के दौरान नगरपालिका ने लगातार पेयजल व्यवस्था बनाने का काम किया। शहर से 52 किमी दूर पारसडोह बांध से नगर को ताप्ती जल उपलब्ध कराने में जिला प्रशासन को अच्छी कामयाबी मिली, जिसके चलते भीषण गर्मी में भी नगर में पेयजल संकट की स्थिति निर्मित नहीं हुई। साथ ही पेयजल परिवहन पर खर्च की जाने वाली लगभग दो करोड़ की राशि की बचत भी हो सकी। जिला प्रशासन की दृढ़ इच्छा शक्ति के चलते बैतूल से लगभग 52 किमी दूर पारसडोह बांध से ताप्ती बैराज तक पानी लाना निश्चित ही एक कठिन काम थाए लेकिन लगभग 25 सालों से प्रत्येक वर्ष दम तोड़ती ताप्ती की जलधारा को पारसडोह जैसे विशालकाय जलाशय के माध्यम से पानी प्रवाहित कर न केवल ताप्ती नदी को जीवंत कियाए बल्कि शहर में 20 हजार नल कनेक्शनों के माध्यम से लगभग डेढ़ लाख की आबादी तक नल जल योजना के माध्यम से भीषण गर्मी के दौरान ही पर्याप्त पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। पिछले लगभग 25 सालों का इतिहास देखा जाए तो दिसंबर के बाद ताप्ती नदी में नहाना तो दूर, प्यास बुझाने के लिए भी पानी शेष नहीं रहता था, लेकिन वर्ष 2019 इतिहास को रेखांकित करेगा। यह इसलिए क्योंकि जिला प्रशासन एवं नगरपालिका के प्रयासों से इतने वर्षों में पहली बार पारसडोह जलाशय से 52 किमी दूर ताप्ती बैराज तक सूर्यपुत्री पुण्य सलिला मां ताप्ती नदी की धारा कल-कल होते हुए बह रही है।  सरकारी विज्ञिप्त की हकीकत यह रही कि पारस डोह से छोड़ा गया पानी ताप्ती बैराज तक पहुंचते – पहुंचते रास्ते में आधी मात्रा में गायब हो गया। पारसडोह से छोड़ा गया जल सबसे पहले नदी की प्यास एवं पोखरो एवं डोह की प्यास बुझाते – बुझाते जब पहुंचा तो छोड़े गए पानी की मात्रा बैराज तक पहुंचने पर आधी रह गई। नदी वर्तमान में भी कल – कल बहना तो दूर पारसडोह से छोड़े गए पानी से लबालब भरे ताप्ती बैराज के वर्तमान में खाली होने की स्थिति में आ गई है। ताप्ती बैराज वर्तमान में मिटट्ी और पत्थरो के अलावा पेड़ो की डालियों एवं पत्तियों का दल- दल बन गया है। बैराज में किनारे लगे पेड़ो की सुखी पत्तियों का बड़ी मात्रा में गिराना एवं उनका पानी में सडऩा – गलना पानी को प्रदुषित कर गया है। जिस ताप्ती के जल को पीने के लिए शुद्ध बताया जा रहा है वर्तमान में वही पानी ताप्ती का बैराज क्षेत्र से लगे शिवधाम बारहलिंग में आजमन के लायक भी नहीं है। पूरी तरह से गंध मार रहे ताप्ती जल में आज भी बारहलिंग में लोगो के द्वारा बड़ी मात्रा में अंतिम संस्कार एवं अस्थियों के विर्सजन का काम किया जा रहा है। बारहलिंग में नदी में इंसान अपने शरीर की कम वाहनो की धुलाई करते ज्यादा देखे जा रहे है। जिसके चलते ठहरे हुए पानी में आइल , सर्फ साबून – शैम्पू के प्रयोग से नदी की मछलियां अकाल मौत मर रही है। इस समय ताप्ती जल का उपयोग खेता की सिंचाई में ज्यादा हो रहा है।
दो करोड़ से ज्यादा की शुद्ध पेयजल आपूर्ति कारोबार
संयुक्त कलैक्टर कार्यालय को पानी पिला रहे कौन !!
सरकारी विज्ञिप्त में कहा गया कि ताप्ती जल से इंसान ही नहीं,बल्कि पशु-पक्षियों के प्यासे कंठ भी तर हो रहे हैं। न केवल बैतूल बल्कि भीषण गर्मी में गोटेगांव, कोलगांव, आठनेर ब्रिज के आसपास के लोग भी ताप्ती के पानी में गोते लगाते हुए नजर आते हैं। इसके अलावा चार दर्जन से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस जलधारा से आबादी एवं जीव-जंतुओं की प्यास बुझ रही है। सरकारी वाह वाही का एक सच यह भह है कि वर्तमान में पारसडोह , ताप्ती बैराज और शिवधाम बारहलिंग को छोड़ कर कहीं पर भी इतना अधिक मात्रा में पानी का सग्रंह नहीं है जहां पर लोग गोते लगा रहे हो!  इधर मीडिया को स्वरूचि भोज करवा कर उन्हे सरकारी प्रेस नोट देकर अपनी वाहवाही लूटने में एक्सपर्ट बैतूल नगर पालिका की मुख्य नगरपालिका अधिकारी श्रीमती प्रियंका सिंह बताती हैं कि बैतूल नगर को ग्रीष्मकाल के दौरान विगत वर्षों जैसी पेयजल संकट की स्थिति से निजात दिलाने के लिए नगर पालिका द्वारा पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए सतत् काम किया गया। अमृत परियोजना के तहत न सिर्फ  खेड़ीसांवलीगढ़ में निर्मित ताप्ती नदी पर बैराज कार्य को शीघ्रता से पूर्ण कराया गया, बल्कि खेड़ी से बैतूल तक पाइप लाइन बिछाने के कार्य को भी तत्परता से पूर्ण कराया गया। नगर पालिका अधिकारी यह बताने को तैयार नहीं है कि बैतूल से मात्र 16 किमी दूर स्थित ताप्ती बैराज से बैतूल तक पाईप लाइन बिछाने के बाद कितनी बार टेस्टींग के चलते पाईप लाइन लीकेज एवं फूट गई !
सीएमओ मैडम जी बताईए ना
अलस्या पारधी किसको पानी पिला रहा !
वर्ष 2019 में नगरपालिका द्वारा पेयजल परिवहन के नाम पर टेण्डर जारी होने के बाद टैंकर माफिया के नाम से मचे हो हल्ला के बाद नगर पालिका ने पेयजल परिवहन आपूर्ति का ठेका निरस्त करना पड़ा। बताया तो यह जाता है कि जिले के पूर्व विधायक एवं पूर्व सासंद के बाल सखा की साझेदारी के कथित आरोपो के चलते कांग्रेस के वर्तमान विधायक के दबाव में ठेका निरस्त किया गया। सीएमओ बैतूल श्रीमति प्रियंका सिंह का यह कहना कि पारसडोह से दो एमसीएम पानी छोड़े जाने के बाद ताप्ती बैराज में और बैतूल नगरीय क्षेत्र में कितना एम सीएम पानी की आपूर्ति की गई। यदि बैतूल नगर को नगर पालिका ने पानी पिलाया तो अलस्या पारधी का पानी का टैंकर किन लोगो को नि:शुल्क जल सेवा दे रहा है। अब यह जांच का विषय बन गया है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि अलस्या पारधी जैसे जल दान दाताओ के द्वारा उन लोगो को शुद्ध पीने का पानी पिलाया जा रहा है जिनके घरो एवं बंगलो के आसपास तक ताप्ती बैराज की लाइन तक नहीं पहुंच सकी है।