मौसम ने रूख बदला तो नर्सरी में डाला गया धान का बिचड़ा लहलहाने लगा। वर्षा के पानी को देख किसान खेत में उतर गए। वह आर-कोन करने के कसरत करने में जुटे हैं। गर्जन के साथ बरस रहे मेघ को देख किसानों चिंतित मन प्रफ्फूलित होने लगा। पिछले सप्ताह 45 डिग्री से भी अधिक तापमान झेल रहे किसानों व झुलस रहे नर्सरी के पौधों को बारिश के पानी से संजीवनी मिल गई है। इससे आमजनों के अलावा पशु-पक्षियों ने भी राहत महसूस कर रहे हैं। मौसम को देख खेतीबारी को लेकर किसानों की उम्मीद बढ़ी है।

किसान सत्यनारायण पांडेय व अजय सिंह ने बताया कि दो दिन पहले तक आसमान से बरस रहे आग के गोले के बीच धान का बिचड़ा झुलस रहा था। प्रतिदिन शाम में डीजल पंप से सिंचाई कर रहे थे। इसके बाद भी बिचड़ा का विकास नहीं हो रहा था। लेकिन, शुक्रवार को रिमझिम व शनिवार को झमाझम हुई बारिश ने धान के पौधों को जान मिल गई। पीली हो रहीं उनकी पत्तियों ने रंग बदलना शुरू कर दिया है। किसान रामएकबाल दुबे व रामनरायण सिंह ने बताया कि भीषण गर्मी के बीच तीखी धूप के कारण जरूरत के अनुसार वे लोग बिचड़ा नहीं डाल सके थे।

इधर, दो दिनों से मौसम में बदलाव आने पर बिचड़ा डालने के लिए खेतों के मेढ़ को बांधकर उसमें पानी स्टोर कर रहे हैं। उक्त किसानों ने बताया कि आसमान में उमड़-घुमड़ रहे बादल को देख उन्हें आस जगी थी कि बारिश होगी। जब बारिश हुई तो खेतों में पड़ी दरारें भी भर गईं। मिट्टी नम हो गई। जिन किसानों का बिचड़ा तैयार है वह रोपनी करने की तैयारी में जुट गए और जिन्हें बिचड़ा डालना है वह पानी स्टोर कर रहे हैं।