भभुंआ संवाददाता-वर्षा नहीं होने से कैमूर में रोपनी का कार्य प्रभावित

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धान के कटोरा के नाम से चर्चित कैमूर जिले में खरीफ फसल की खेती शुरुआती दौर में किसान सिंचाई संकट से जूझ रही है। जिन किसानों ने रोहिणी नक्षत्र में धान का बिचड़ा डाला था अब उनकी नर्सरी तैयार हो गयी है। लेकिन, वर्षा नहीं होने के कारण रोपनी कार्य प्रभावित है। अभी नहरों से भी पानी नहीं मिल रहा है। यह अलग बात है कि कुछ किसान डीजल पंप व मोटर से पानी निकाल रोपनी कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर बारिश कम हुई एवं समय पर नहरों से पानी नहीं मिला तो सूखे की मार झेलनी पड़ेगी और धान का कटोरा भी खाली रह जाएगा।

लोहदी गांव के किसान भुनेश्वर दुबे ने बताया कि रोहिणी नक्षत्र के शुरु मेंं ही धान का बिचड़ा डाल दिए थे। अब नर्सरी भी तैयार हो गई है। नहर में पानी नहीं आने के कारण चलते रोपनी का कार्य प्रभावित है। उन्होंने बताया कि डीजल पंप चलाकर बिचड़ा तो तैयार कर लिया पर रोपनी करने में काफी पैसे खर्च करने पड़ेंगे। इस कारण बारिश होने व नहर में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं।

जिले में अबतक मात्र डेढ़ प्रतिशत हुई रोपनी

बारिश कम होने व नहरों से पानी नहीं मिलने के कारण कैमूर में अबतक मात्र डेढ़ प्रतिशत ही रोपनी हो सकी है। कुशल किसानों की माने तो आद्रा नक्षत्र में अबतक 15 से 20 प्रतिशत रोपनी हो जानी चाहिए थी। लेकिन, मौसम की बेरुखी के कारण रोपनी का कार्य पिछड़ रहा है। रामपुर के किसान बालेश्वर तिवारी एवं उमापुर के किसान धीरेन्द्र सिंह ने बताया कि पिछले सप्ताह से आसमान में बादल उमड़-घुमड़ रहा है। लेकिन, अच्छी बारिश नहीं हो रही है। किसानों ने कहा कि पिछले साल भी समय पर बारिश नहीं होने के कारण रोपनी कार्य पिछड़ गया था। किसान भुनेश्वर पांडेय व सुदामा सिंह ने बताया कि रोपनी का कार्य पिछड़ जाने से उपज भी प्रभावित होगी।

खेती के लिए समय से पानी देने का दावा फेल

जिला प्रशासन के निर्देश पर सिंचाई विभाग के अफसरों द्वारा खरीफ फसल की खेती के लिए समय से पानी देने का दावा फेल दिख रहा है। वैज्ञानिक तरीके से खेती कराकर उपज व आय बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन, कृषि एवं सिंचाई विभाग के अधिकारी जिला कृषि टॉस्क फोर्स की बैठकों में प्रत्येक वर्ष कार्य योजना तैयार करते हैं। लेकिन, खेती के समय जब मौसम दगा देता है तो अफसर भी असिंचित क्षेत्र में बहुत कुछ नहीं कर पाते हैं। जिले में स्थित दुर्गावती जलाशय परियोजना से पानी नहीं मिल रहा है और गांवों में लगाए गए कुछ सरकारी नलकूप भी बंद पड़े हैं।

बारिश कम होने व नहरों से पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलने के कारण रोपनी का कार्य धीमी गति से चल रहा है। कैमूर में अभी तक मात्र डेढ़ से दो प्रतिशत रोपनी हुई है। बारिश नहीं होने से बिचड़ा डालने का काम भी प्रभावित है