भभुंआ

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भभुंआ मायावती ने भाजपा-कांग्रेस के ताबूत में ठोंका अंतिम कील

बसपा प्रमुख मायावती ने शनिवार को भभुआ की चुनावी सभा में भाजपा-कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील ठोंका और कहा कि बीजेपी कहती है कि वह किसानों को छह हजार रुपए देगी। लेकिन, मैंने इसकी जगह सरकारी व निजी सेक्टर में रोजगार देने का फैसला किया है। किसानों को छह हजार देने का भाजपा का यह वादा भी झूठ का पुलिंदा उसी तरह साबित होगा, जिस तरह पिछले चुनाव में किए अपने किसी वादे को पूरा नहीं किया। कांग्रेस ने मंडल आयोग की सिफारिश को रोका तो मेरे दबाव में आकर वीपी सिंह की सरकार ने इसे लागू किया। क्योंकि मैंने इसी शर्त पर संयुक्त मोर्चा की सरकार को समर्थन दिया कि वह बाबा साहब को भारत रत्न से सम्मानित और मंडल आयोग की सिफारिश को लागू करे। उन्होंने ऐसा ही किया। लेकिन, एक बार फिर आरक्षण के लाभ से वंचित करने की साजिश देश में चल रही है।

सभा में भीड़ को देख उन्होंने कहा कि आप नमो-नमो की छुट्टी करने आए हैं। आपकी यह इच्छा भी एकजुटता से पूरी होगी। बाबा साहब चाहते थे अजा-अजजा की तरह अतिपिछड़ों को लाभ मिले। लेकिन, कांग्रेस ने ऐसा होने नहीं दिया। काफी प्रयास के बाद भी जब आरक्षण का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिला तो उन्होंने कानून मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और देशवासियों से कहा कि सत्ता की चाबी अपने पास रखो, सारा काम होगा। मायावती ने कहा मैं अब सत्ता पर काबिज होने की आपसे बात कर रही हूं। कांग्रेस ने कभी गरीबी व बेरोजगारी दूर नहीं कर सकी है। वह किस मुंह से दलितों, अतिपिछड़ो व अकलियतों से वोट मांग रही है।

उन्होंने कहा कि बीजेपी की अब चौकीदारी की नाटकबाजी व जुमलेबाजी नहीं चलेगी। अब उसकी सत्ता जाएगी। इसने गरीबों से किए वादे को पूरा नहीं किया। पूंजीपतियों के लिए काम किया। सम्प्रदायवाद व जातिवाद को बढ़ावा दिया। आरएसएस व बीजेपी दलितों, मुस्लिमों का विकास रोक रही है। नोटबंदी व जीएसटी से व्यापारी त्रस्त हैं। भ्रष्टाचार बढ़ा है। रक्षा सौदा में गड़बड़ी हुई है। देश सुरक्षित नहीं है। आतंकी हमले हो रहे हैं। इसलिए कांग्रेस व भाजपा दोनों को सत्ता में आने से रोकना होगा। उन्होंने सासाराम संसदीय क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी मनोज कुमार को जीत दिलाने की अपील आमजनों से की।

किसी नेता का नाम नहीं लिया

अपने पूरे भाषण के दौरान बसपा प्रमुख मायावती ने किसी विपक्षी दल के नेताओं के नाम नहीं लिया। अलबत्ता वह भाजपा व कांग्रेस पर बरसती रहीं। एनडीए व महागठबंधन के गठन पर भी अपनी किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी।