भभुंआ

0
373

भभुंआ ग्रामीण क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की हालत अच्छी नहीं

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की हालत बहुत अच्छी नहीं है। चुनावी भाषण में नेता 20 से 22 घंटों तक बिजली आपूर्ति किए जाने का दावा कर रहे हैं। लेकिन, यहां हालत यह है कि आठ से 10 घंटा बिजली बमुश्किल मिल रही है। वह भी अनियमित। ऐसे में किसानों की खेतीबारी व आमजनों की दिनचर्या प्रभावित होने लगी है। पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं होने से उपभोक्ता गर्मी से ब्याकुल हो रहे हैं तो किसानों की सब्जी की फसल सूख रही है। बच्चों व परिवार की सुविधा के लिए घरों में लगे पंखा, कूलर, फ्रीज, टीवी आदि विद्युत संचालित उपकरण शोभा की वस्तु बनकर रह गए हैं।

बेलांव के उपभोक्ताओं राजू अंसारी, सुनील दुबे, अशोक गुप्ता ने बताया कि करीब एक माह से दिन में बिजली न के बराबर मिल रही है। ऐसे में घरों में लगे कूलर, पंखा, समसेबुल, फ्रीज आदि विद्युत उपकरण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस भीषण गर्मी में घर व बाहर रहना मुश्किल हो गया है। सबसे अधिक परेशानी छोटे-छोटे बच्चों व महिलाओं को हो रही है। अगर एक दो दिनों में इस समस्या का निदान नहीं किया गया तो विद्युत बोर्ड के खजुरा कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। सबार फीडर से जुडे उपभोगता सतेन्द्र पांडेय, रन्नू दुबे, रचना कुंवर ने बताया कि बार्ड द्वारा क्षत्र में करीब 10-12 घंटा बिजली दी जा रही है। वह भी अनियमित। लो वोल्टेज की अलग समस्या है।

यह है विद्युत आपूर्ति का प्रबंध

विदित हो कि रामपुर प्रखंड में करमचट, सबार, जद्दुपुर, खजूरा व सोनहन फीडर से बिजली आपूर्ति होती है। करमचट फीडर से भितरीबांध व अमांव पंचायत के करीब 20 गांव, सबार फीडर से सबार, बेलांव, जलालपुर, कुड़ारी व बड़कगांव पंचायत के कुछ गांवों को मिलाकर करीब 45 गांव, जद्दुपुर फीडर से पसाई व बड़कागांव पंचायत के कुछ गांवों को मिलाकर दर्जनभर बस्तियों, खजुरा फीडर से खरेंदा, पसाई, बेलांव पंचायत के कुछ गांव को मिलाकर करीब 30 गांवों तथा सोनहन फीडर से बड़कागांव पंचायत के एक मात्र गम्हरियां गांव में में बिजली आपूर्ति होती है।

कोर्ट

रामपुर प्रखंड में पुराने व जर्जर तार-पोल बदलने का काम चल रहा है। इस प्रकार की समस्या अभी 15-20 दिनों तक और रहेगी। बिजली तार-पोल बदले जाने का काम पूरा होते ही नियमित बिजली आपूर्ति शुरू करा दी जाएगी।

सासाराम मुंडेश्वरी-आरा रेल लाइन परियोजना अधर में लटकी

मुंडेश्वरी आरा रेल लाइन निर्माण परियोजना वर्षो बाद भी शुरू नहीं हो सकी। घोषणा के अलावा शिलान्यास हुए दस वर्ष होने को है। लेकिन,

परियोजना का सर्वेक्षण के अलावा और कोई कार्य नहीं हुआ। हाबाद के विकास के लिए जरूरी इस परियोजना का काम शुरू नहीं होने से लोग मायूस हैं। घोषणा के बाद सरकार बदलने के साथ ही यह परियोजना फाइलों में दबकर रह गई। इस रेल लाइन से सासाराम, बक्सर व आरा लोकसभा क्षेत्र का सीधा जुड़ाव हो सकेगा। परियोजना का सर्वेक्षण कार्य भी पूरा कर लिया गया है। लेकिन सर्वेक्षण के बाद आजतक इस परियोजना को पूरा करने के लिए राशि आवंटित नहीं की गई। इसीलिए कार्य शुरू नहीं हो सका है। इस रेल लाइन परियोजना से शाहाबाद के चारों जिलों कैमूर, बक्सर, रोहतास व भोजपुर में लाइन बिछायी जानी है। कुल लंबाई 137 किमी होगी। इस योजना पर 537 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान था। प्रस्तावित स्टेशन के रूप में मुंडेश्वरी धाम, मोहनियां, परसथुआ, कोचस, दिनारा, भलुनीधाम, मलियाबाग, सोनवर्षा, जगदीशुपर, आरा को चिन्हित किया गया था। शाहाबाद के चारों जिले को जोड़ने वाली यह एकमात्र रेल परियोजना है। कुछ लोगों का कहना है कि यूपीए सरकार में शुरू हुए इस योजना पर बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया। सरकार बदलने से आजतक इस परियोजना की अनदेखी कर दी गई।

तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद द्वारा सात साल पहले बजट में शामिल मुंडेश्वरी आरा रेल लाईन को शामिल किया गया था। रेल बजट से परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद रेलवे के वरीय पदाधिकारियों ने उसी समय परियोजना का शुभारंभ भी कर दिया। सर्वेक्षण कार्य के लिए राशि आवंटित होने के बाद सर्वेक्षण कार्य किया गया। लेकिन, उसके बाद यह महत्वाकांक्षी रेल परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। लालू प्रसाद भी रेल मंत्री नहीं रहे।

संसद में कई बार मामला गूंजा

2014 में सरकार बदलने पर संसद में कई बार शाहाबाद क्षेत्र के निर्वाचित सांसद ने इस परियोजना के लिए धन आवंटित करने की मांग की, लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। केन्द्र सरकार में मंत्री अश्विनी कुमार चौबे व आरके सिंह भी इस परियोजना को लेकर रेल मंत्री सुरेश प्रभु से परियोजना का काम शुरू कराने की मांग की थी, लेकिन उसे अनसुनी कर दिया गया। कहते हैं लोग प्रखंड मुखिया संघ के अध्यक्ष रंजय सिह, शिक्षक भोला ठाकुर, मुरलीधर दुबे, अशोक कुमार, सुनील राय, रामू चौधरी व व्यवसायी रमेश गुप्ता ने कहा कि इस परियोजना को