भवानीपुर में वोटिंग जारी, प्रियंका टिबरेवाल ने टीएमसी पर लगाया बूथ कैप्चरिंग की कोशिश का आरोप

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कोलकाता; पश्चिम बंगाल की हाई प्रोफाइल सीट भवानीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में वोटिंग जारी है। इस सीट पर टीएमसी की ओर से सीएम ममता बनर्जी उम्मीदवार हैं, जबकि बीजेपी की प्रियंका टिबरेवाल उनका मुकाबला कर रही हैं। ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव बेहद अहम हैं क्योंकि उन्हें मुख्यमंत्री बने रहने के लिए विधानसभा की सदस्यता चाहिए। वह नंदीग्राम से चुनाव हार गई थीं।
भवानीपुर में देर से वोटिंग शुरू हुई जिस वजह से यहां शाम साढ़े 6 बजे तक मतदान खत्म होगा। बीजेपी उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा पर बूथ कैप्चरिंग की कोशिश का आरोप लगाया। प्रियंका ने कहा, ‘मदन मित्रा ने जानबूझकर वोटिंग मशीन बंद कराई क्योंकि वह बूथ कैप्चर करना चाहते थे।’
97 मतदान केंद्रों के 287 मतदेय स्थलों में से प्रत्येक पर केंद्रीय बल के जवान तैनात किए गए हैं। बूथ के बाहर सुरक्षा कोलकाता पुलिस देख रही है। कोलकाता पुलिस ने कहा, ‘किसी भी मतदान केंद्र के 200 मीटर के दायरे में पांच या इससे अधिक लोगों को एकत्र होने की इजाजत नहीं होगी। पत्थर, हथियार, पटाखे या अन्य विस्फोटक सामग्री लाने पर बैन लगाया गया है।’
38 स्थानों पर पुलिस चौकियां बनाई गई हैं। बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे। शहर में रुक-रुक कर बारिश होने के कारण सभी पुलिसकर्मियों से रेनकोट पहनने और छाते साथ रखने को कहा गया है। सभी मतदान केंद्रों को बाढ़ का पानी निकालने के लिए पंप तैयार रखने को कहा गया है।
ममता के लिए चुनाव क्यों अहम?
ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव हार गई थीं। हार के बाद अब उन्हें मुख्यमंत्री बने रहने के लिए विधानसभा की सदस्यता चाहिए। इसलिए वह अब भवानीपुर सीट से इस संग्राम में उतरी हैं। अगर उन्हें सीएम बने रहना है तो चुनाव जीतना ही होगा। भवानीपुर के 40% फीसदी वोटर गैर बंगाली हैं। इनमें गुजराती, मारवाड़ी, सिख और बिहारी तबके की तादाद सबसे ज्यादा हैं। ये वोटर बीजेपी समर्थक माने जाते हैं। इसके अलावा 20% आबादी मुसलमानों की है जबकि बाकी 40% बंगाली हैं। यहां 2021 में बीजेपी का वोट 16.3% फीसदी बढ़ा।
क्या ममता का डर बढ़ा?
भवानीपुर में ममता बनर्जी की जीत लगभग पक्की होने के बावजूद पार्टी या खुद ममता ने चुनाव अभियान में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। वहीं, बीजेपी नेताओं का दावा है कि ममता बनर्जी को अब इस बात का अहसास हो गया है कि भवानीपुर सीट पर जीत की राह आसान नहीं है। यही वजह है कि उनको पहले दिन से ही पसीना बहाना पड़ रहा है। टीएमसी नेता सौगत रॉय ने कहा, ‘जहां तक ममता के प्रचार की बात है वह हर चुनाव को युद्ध के तौर पर लेती हैं।’
ममता को क्यों पसंद भवानीपुर?
भवानीपुर ममता की पारंपरिक सीट रही है। वह वर्ष 2011 और 2016 के विधानसभा चुनाव में यहां से जीती थीं। हालांकि, 2011 के मुकाबले 2016 में उनकी जीत में काफी अंतर आया। 2016 में उन्हें 65,520 वोट मिले। जबकि 2011 में उन्होंने 77.46% वोटों के साथ सीपीएम उम्मीदवार को करीब 95 हजार वोटों से शिकस्त दी थी।