भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने वाले पंडित जसराज को 80 साल के संगीत के सफर में उन्हें कई अवॉर्ड्स मिले

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भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने वाले पंडित जसराज को 80 साल के संगीत के सफर में उन्हें कई अवॉर्ड्स मिले। यहां तक कि पिछले साल एक ग्रह का नाम भी उनके नाम पर रखा गया था। उनका कोलकाता से घनिष्ठ संबंध था, जहां उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय बिताया। उनके निधन की सूचना मिलते ही कोलकाता में शास्त्रीय संगीत से जुड़े लोगों में शोक छा गया। उन्होंने पंडित जसराज और उनसे जुड़े बातों को याद किया।
अंकल हमेशा हम लोगों को सरप्राइज देते थे और इस बार भी…
उस्ताद राशिद खान ने कहा, ‘मैं अंकल जी को बचपन से जानता था। एक बार उन्होंने दुर्गा बेहेन के आयोजन में आकर हमें सरप्राइज दिया था। वह मेरे गले लग जाते थे। जब मेरी बेटी चार साल की थी तो यूएस में एक दोस्त के घर में उसने अंकल को सुना। उसने उनसे पूछा कि दादा जी दादाजी यह हमसाधवानी है क्या? फिर उन्होंने मेरी बेटी को बठाया और उससे गाने को कहा। दो साल पहले जयपुर के एक कार्यक्रम में मेरी उनसे आखिरी बार मुलाकात हुई थी।’ ‘आज मुझे मेरे किसी बड़े के जाने का दुख हो रहा है’, ‘मेरी पंडित जसराज से पहचान 1981 में एक संगीत सम्मेलन में हुई थी। उसके बाद से हमारी संगीत और दूसरे मुद्दों पर बातचीत का दौर शुरू हो गया। वह तबला भी बहुत अच्छा बजाते थे। उनके गुरु पंडित मनिराम गाते थे और वह तबला बजाते थे। उनकी आवाज भी बहुत अच्छी थी। उन्होंने हम लोगों के साथ आगरा में एक बार तबला बजाया था। वह मुझसे बंगाली में बात करते थे। वह संगीत रिसर्च अकैडमी के कार्यक्रमों में भी शामिल होते थे। भीमसेन जोशी के बाद वह ही एकलौते भारत के सबसे वरिष्ठ शास्त्रीय संगीत के गायक थे। आज मुझे लग रहा है कि मेरे सिर से किसी अपने का साया उठ गया।'(UNA)