मजदूर वर्ग का भाजपा को चेतावनी , कहा बदल देंगे सरकार , अर्धनग्न हो किया विरोध प्रदर्शन

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उत्तरप्रदेश :  नोटबंदी, जीएसटी और एफडीआई के आने के बाद कानपुर की कई फैक्ट्रियों में तालेबंदी हो गई है । पांच आर्डिंनेंस फैक्ट्रियों ओईएफ, पैराशूट, एसएएफ फील्ड गन और ओएफसी में तीन-चार साल का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके करीब दस हजार से ज्यादा पूर्व ट्रेड अपरेंटिस को नौकरी दिए जाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस इंटक प्रतिरक्षा कर्मचारी नेता आशीष पांडेय के नेतृत्व में डीएम कार्यालय पर अर्धनग्न प्रदर्शन किया गया। मजदूर कांग्रेस इंटक के प्रतिरक्षा कर्मचारी नेता आशीष पांडेय के नेतृत्व में सैकड़ों कर्मचारी व मजदूर अर्धनग्न होकर डीएम कार्यालय पहुंचे और रोजगार दिए जाने की गुहार लगाई। प्रदर्शनकारियों ने एडीएम सिटी को ज्ञापन सौंपकर मांगों को सरकार तक पहुंचाने को कहा।
इस मौके पर आशीष पांडेय ने कहा कि वर्तमान सरकार युवाओं का जीवन बर्बाद कर रही है। तीन और चार साल तक आर्डनेंस फैक्ट्रियों में अपरेंटिस करने के कारण रेग्युलर शिक्षा से वंचित पूर्व ट्रेड अपरेंटिस नौकरी न मिलने के कारण सड़क पर आ गए हैं, उनकी उम्र भी निकल रही है। अपरेंटिस एक्ट का भी पालन नहीं किया जा रहा है। सरकार ने आपेन वैकेंसी आर्डनेंस के पूर्व अपरेंटिस को मात्र पांच नंबर वेटेज के देने का फैसला किया है। सरकार की इस नीति का विरोध किया जाएगा।उन्होंने प्रतिरक्षा महासंघों को चेतावनी दी है कि आर्डनेंस फैक्ट्रियों में प्रस्तावित 23 जनवरी 2019 से दो दिवसीय हड़ताल में पूर्व ट्रेड अपरेंटिस को नौकरी दिलाने, कर्मचारी मृतक आश्रितों का वन टाइम रिलेक्शन देने आदि दस मांगें रखी जाएंगी। इस मांग को अगर सरकार ने मानने से इंकार कर दिया तो आर-पार की लड़ाई की जाएगी।
मजूदर नेता राजेश पासवान ने बताया कि कुंभ के चलते तीन माह तक टेनरियां बंद रहेंगी, जिसके चलते कानपुर के अलावा अन्य जिलों के करीब आठ लाख मजदूर बेरोगजार हो जाएंगे। नोटबंदी के बाद शहर की छोटी-बडभ् मिलाकर सात सौ फक्ट्रियां पहले से ही बंद पड़ी हैं और वहां काम करने वाले मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे प्रदेशों में गए हैं। जो मजदूर यहीं पर काम कर रहे हैं उन्हें फैक्ट्री मालिक 12 घंटे की ड्यूटी के बदले दो सौ रूपए प्रतिदिन के हिसाब से दे रहे हैं। हमारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग है कि जल्द से जल्द मजदूरों के लिए रोजगार की व्यवस्था करें। यदि हालात ऐसे ही रहे तो मजदूर सरकार बदल देंगे।

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