नगर परिषद में कर्मियों की मनमानी के कारण अधिकतर कार्य बेपटरी है। फर्जी बिल बनाकर कर्मियों द्वारा राशि की निकासी यहां सामान्य बात रही है। पूरा शहर पानी की किल्लत से जूझ रहा है और यहां कर्मी फर्जी बिल बनाकर राशि की निकासी करने में जुटे हुए हैं।

हैरत की बात यह है कि शहर में जितने चापाकल हैं उससे अधिक की संख्या में कर्मी ने मरम्मत कर दी। किस चापाकल की मरम्म्ति कब और कितनी राशि से की गयी है, यह आंकड़ा विभाग के पास नहीं है। इस साल के आंकड़ों को ही देखें तो बड़े पैमाने पर राशि की निकासी की गयी है। जब पानी के लिए हाहाकार मचा तो डीएम ने बंद पड़े चापाकल की मरम्मत का आदेश दिया। इसके बाद फिर से उसी चापाकल की मरम्मत का खेल शुरू हो गया और मोटी राशि की निकासी की योजना बना ली गयी है।

मिली जानकारी के अनुसार राशि आते ही इसकी निकासी भी कर ली जायेगी। सवाल यह है कि जब पहले ही बड़ी संख्या में चापाकल की मरम्मत कर ली गयी तो फिर ये सभी चापाकल खराब कैसे थे। फिर उसी चापाकल की मरम्मत के नाम पर लाखों की निकासी का खेल किया जाने लगा। सच्चाई यही है कि विशेष टीम ने जब शहर के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया तो उसे कर्मी की मनमानी और हो रही लूटखसोट के कारण लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। चर्चा है कि मोहल्ले के लोगों ने कर्मियों को घेर लिया और उसकी लूटखसोट से अधिकारियों को अवगत कराने लगा। इस टीम में पीएचइडी कार्यपाल अभियंता मुकेश कुमार, जिला पंचायती राज पदाधिकारी और अन्य पदाधिकारी शामिल थे। टीम ने अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। चापाकल की मरम्मत के नाम पर यहां हो रही लूटखसोट के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर मिथिला मूवमेंट अगेंस्ट करप्सन ने डीएम को ज्ञापन भी दिया है। शीघ्र जांच नही ंहोने और कार्रवाई नहीं होने की हालत में आंदोलन की चेतावनी दी है।प्रावधान की हो रही है अनदेखी:दफ्तर में कर्मियों द्वारा प्रावधान की उपेक्षा की जा रही है। स्थापना कर्मी की मनमानी का आलम यह है कि अधिकारी द्वारा लगातार दिये गये स्मार के बाद भी उनके द्वारा रिपोर्ट नहीं सौंपी जा रही है। इपीएफओ से आच्छादित कर्मियों की सूची विभाग को 31 मई तक भेजना था। लेकिन स्थापना कर्मी की मनमानी के कारण समय पर उसे नहीं भेजा जा सका।