महाराष्‍ट्र में बीजेपी और श‍िवसेना आमने-सामने

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मुंबई, महाराष्‍ट्र में शनिवार को उद्धव ठाकरे सरकार का एक साल पूरा होने वाला है। इस मौके पर शिवसेना जहां सरकार की उपलब्धियां गिनाने के लिए व्याकुल है, वहीं विरोधी दल बीजेपी सरकार की खामियां निकालने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पार्टी मुखपत्र के माध्यम से विरोधी दल बीजेपी को अपना दम दिखाने लगे हैं। बीजेपी भी उसी अंदाज में जवाब दे रही है।
महाराष्‍ट्र में बीजेपी और श‍िवसेना आमने-सामने
वैसे, बीजेपी शनिवार को ठाकरे सरकार की पोल खोलने की बात कह रही है। बताया जा रहा है कि इसकी कमान खुद पिछली बीजेपी-शिवसेना सरकार के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संभाल रखी है। मुख्यमंत्री ठाकरे ने अपने पार्टी मुखपत्र के माध्यम से बीजेपी पर निशाना साधा है। इशारों ही इशारों में मुख्यमंत्री ठाकरे ने कहा कि ज्यादा मेरे पीछे नहीं पड़ें, वर्ना मैं हाथ धोकर उनके पीछे पड़ जाऊंगा।
‘मुख्यमंत्री को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती’
मुख्यमंत्री ठाकरे कहते हैं कि आप (बीजेपी) चावल के धुले हुए नहीं हो। कैसे आप खिचड़ी बनाते हैं, उसका हमें पता है। उन्होंने कहा कि जो कोई आड़े आने की कोशिश करेगा। उसको टेढ़ा करके महाराष्ट्र आगे जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि प्रतिशोध की भावना के साथ व्यवहार करना है तो आप एक मामला निकालिए। हम दस मामले निकालेंगे।
बीजेपी ने भी मुख्यमंत्री ठाकरे का जवाब दिया। सामने आए ठाकरे के कट्टर विरोधी नारायण राणे परिवार से भाजपा नेता व पूर्व सांसद नीलेश राणे। उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और पार्टी प्रवक्ता संजय राउत की जोड़ी को ‘चंगू-मंगू की फालतू चर्चा’ करार दिया। राणे ने ट्विट किया कि जिस इंटरव्यू और जिस व्यक्ति से महाराष्ट्र को कुछ मिलने वाला नहीं है, ऐसे मुफ्त के लोगों को देखने में हमें कोई रुचि नहीं है।
‘ठाकरे सरकार में कोई तालमेल नहीं’
विधान परिषद में विरोधी पक्ष नेता प्रवीण दरेकर ने कहा कि तीन अलग-अलग विचारों की बनी ठाकरे सरकार में कोई तालमेल नहीं है, इसलिए तीनों दलों को सरकार गिरने का डर है, लेकिन हमें सरकार गिराने की जल्दबाजी नहीं है। यह सरकार अपने अंतर्विरोधों से गिर जाएगी। महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने कहा कि मुख्यमंत्री को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती है। उन्हें जो करना है, वह करके दिखाएं, वे बोल क्यों रहे हैं।
पाटील ने कहा कि मुख्यमंत्री ने दशहरा रैली में भी गोबर, गौमूत्र, आड़ा-टेढ़ा करने की बात कही थी। सामान्य लोगों को भी समझ में आता है कि यह भाषा ठीक नहीं है। कुल मिलाकर आने वाले चार-पांच दिन राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।(UNA)