मुंडका में भीषण आग में कई दर्जन मजदूरों की मौत पर दिल्ली के श्रम मंत्री से इस्तीफे की मांग की श्रमिक संगठनों ने

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नई दिल्ली
14 मई 22
दिल्ली ब्यूरो

दिल्ली के मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास एक फ़ैक्टरी में लगी आग से 27 मजदूरों की झुलसने से मौत और 20 से जायदा मजदूरों के गंभीर रूप से घायल होने तथा अभी भी कुछ मजदूरों के लापता होने को लेकर दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप श्रमिक संगठनों और विपक्षी पार्टियों ने लगाए हैं।
आईएफ़टीयू के मजदूर नेता अनिमेष दास ने दिल्ली के श्रम मंत्री के इस्तीफे की मांग की है और कहा कि “दिल्ली सरकार की घोर लापरवाही है ,दिल्ली की सबसे बड़ी व दुखद घटना है,महिला कामगार भी मरे हैं । दिल्ली के श्रम मंत्री को जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए । mcd व दिल्ली पुलिस जो केंद्र सरकार के अधीन है इस हादसे के लिये भी जिम्मेदार हैं।
हालांकि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घटना स्थल का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने मारे गए प्रत्येक मजदूर के परिवार को 10 लाख रुपये और घायलों को 50 हज़ार रुपये मुआवजे की घोषणा की है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हज़ार रुपये मुआवजे की घोषणा की है।
फ़ैक्टरि मालिकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन अस्पताल में मौजूद परिजनों ने बताया कि उनके अपने कहां हैं ये पता ही नही लग रहा कोई बता ही नही रहा कि किस अस्पताल में हैं।इस इमारत में फैक्ट्री थी जिसमे प्रोडक्शन और पैकिंग होती थी सीसीटीवी कैमरा,बैटरी,चार्जर आदि की।फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में गत्ते,पॉलीथीन आदि पैकिंग का सामान था जिसके कारण आग फैली।फैक्ट्री में काम करने वालो में महिला मजदूर भी काफी संख्या में थी यह भी परिजनों से बात करने पर पता लगा ।अस्पताल पहुंचे बहुत से परिजन गमगीन और बात करने की हालत में नहीं है ।लगभग 50 परिजन अपने अपनो की तलाश में इस अस्पताल के बाहर है और जैसे जैसे पता लग रहा है और परिजन आ रहे है।
पूरा प्रकरण दिल्ली के मजदूरों,मेहनत करने वालों की भयावह कार्य परिस्थिति और प्रशासन, श्रम विभाग, सरकारों की मजदूरों के जीवन की काम की जगहों पर भी सुरक्षा प्रति घोर असेवदानशीलता और लापरवाही का एक बार फिर से पर्दाफाश करता है।
मजदूर नेताओं ने कहा कि लापरवाही का यह आलम है कि अधिकांश फ़ैक्टरियों में न्यूनतम सुरक्षा मानकों का कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है जो मजदूरों के जानमाल के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इसमें श्रम मंत्रालय सबसे पहले जिम्मेदार है।