मुंबई के अस्पतालों अनट्रेंड डाक्टरों की कोरोना में लगी ड्यूटी जो अभी तक कोई जानकारी नहीं

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मुंबई
कोविड केयर सेंटर पर नौसिखिये डॉक्टर कोरोना पीड़ितों की कैसे जान बचाएंगे जब उन्हें वेंटिलेटर चालू करना और बंद करना ही नहीं आता है। जी हां, मुंबई के आसपास ऐसे डॉक्टर कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे हैं जिन्हें अभी आईसीयू या वेंटिलेटर्स में काम अनुभव नहीं है। नाम न छापने की शर्त पर एक डॉक्टर ने कहा कि एक कोरोना संक्रमित का ऑक्सिजन का स्तर 70 के आसपास तक गिर गया था लेकिन हम उसे ऑक्सिजन देने में सक्षम नहीं थे क्योंकि मुझे आईसीयू में काम करने का अनुभव नहीं मिला है। इस कोविड केयर सेंटर में 25 वेंटिलेटर्स हैं जिन्हें भारत सरकार ने दिया है और इतनी ही संख्या में नाक के जरिये ऑक्सिजन देने वाली मशीनें मिली हैं। लेकिन कई महीनों से ये वेंटिलेटर्स और मशीनें धूल खा रही हैं क्योंकि इन्हें चलाने वाला कोई प्रशिक्षित डॉक्टर या स्टॉफ सेंटर में नहीं हैं।
इस डॉक्टर ने बताया कि उसे क्रिटिकल केयर में कुछ दिन की बेसिक ट्रेनिंग मिली है। हमारे कुछ सीनियर साथी अल्टरनेटिव थैरेपी की ट्रेनिंग पा चुके हैं। जैसे ही मेरी 8 घंटे की शिफ्ट खत्म होगी ये सीनियर डॉक्टर कोरोना पीड़ितों का पूर इलाज करेंगे। सही मायने में इन मशीनों से दूर रहना ही सही फैसला है। जानेमाने सरकारी अस्पतालों में वेंटीलेटर की मॉनिटियरिंग का काम काफी अनुभवी डॉक्टरों को दिया जाता है।
लेकिन जबसे से देशभर में कोरोना ने अपना कहर बरपाया है इन सेंटर्स पर नौसिखिये डॉक्टरों को भर्ती कर लिया गया। कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं जिन्होंने महज 5 दिन ही आईसीयू में काम करने की ट्रेनिंग ली है। इनमें से कई डॉक्टर ऐसे भी हैं जिन्हें सिर्फ वेंटिलेटर्स को चालू करना सिखाया गया है। डॉक्टर ने बताया कि आईसीयू में काम करने के लिए 2-3 साल की ट्रेनिंग की जरूरी है।