मुंबई, टीआरपी फ्रॉड के आरोपों ने रिपब्लिक टीवी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, मुंबई पुल‍िस ने शुक्रवार को रिपब्लिक टीवी के CFO को समन भेजा है

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मुंबई, टीआरपी फ्रॉड के आरोपों ने रिपब्लिक टीवी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुंबई पुल‍िस ने शुक्रवार को रिपब्लिक टीवी के CFO को समन भेजा है। साथ ही शन‍िवार को मुंबई क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने के लिए कहा है। इससे पहले गुरुवार को मुंबई के पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने दावा किया था कि रिपब्लिक टीवी (republic tv fake trp) चैनल ने पैसे देकर रेटिंग बढ़ाई है। टीआरपी रैकेट के जरिए पैसा देकर TRP को मैन्युपुलेट (हेरफेर) किया जा रहा था। दूसरी तरफ, रिपब्लिक टीवी ने खुद पर लगे आरोपों को न सिर्फ सिरे से खारिज किया है बल्कि परमबीर सिंह के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज करने की बात कही है।
जानकारी के मुताब‍िक, मुंबई पुलिस को दो अन्य चैनलों का पता चला है, जिनके नाम फख्त मराठी और बॉक्स सिनेमा हैं। ये चैनल पैसा देकर लोगों के घरों में चैनल चलवाते थे। इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है और 8 लाख रुपये जब्त किए गए हैं। मुंबई पुलिस की ओर से इस रैकेट की जानकारी सूचना प्रसारण मंत्रालय और भारत सरकार को दी जाएगी।
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मुंबई पुल‍िस ने किया ‘फॉल्स टीआरपी रैकेट’ का खुलासा
मुंबई पुलिस ने गुरुवार को ‘फॉल्स टीआरपी रैकेट’ का खुलासा किया था। मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने रिपब्लिक टीवी (republic tv fake trp) को आरोपी मानते हुए कहा था क‍ि कि चैनल ने पैसे देकर रेटिंग बढ़ाई। टीआरपी रैकेट के जरिए पैसा देकर TRP के मैन्युपुलेट किया जाता था। मामले के आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड सहिंता यानी आईपीसी की धारा 409 और 420 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
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फेक टीआरपी का षडयंत्र रचने वाले पर धारा 420 का केस
फेक टीआरपी का षडयंत्र रचने वाले आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 420 लगाई गई है। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा करने का आरोपी बनाया गया है। बता दें कि अगर कोई भी किसी शख्स को धोखा दे, बेईमानी से किसी भी व्यक्ति को कोई भी संपत्ति दे या ले या किसी बहुमूल्य वस्तु या उसके एक हिस्से को धोखे से खरीदे-बेचे या उपयोग करे या किसी भी हस्ताक्षरित या मुहरबंद दस्तावेज में परिवर्तन करे, या उसे बनाए या उसे नष्ट करे या ऐसा करने के लिए किसी को प्रेरित करे तो वह भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के अनुसार दोषी माना जाता है।(UNA)