मुंबई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना को हकीकत में बदलने के लिए आठ कंपनियों ने बोली लगाई है। यह योजना है मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड ट्रेन की, जिसे बुलेट ट्रेन भी कहा जा रहा है। इस ट्रेन के लिए मुंबई से अहमदाबाद के बीच हाई स्पीड कॉरिडोर बन रहा है।

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मुंबई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना को हकीकत में बदलने के लिए आठ कंपनियों ने बोली लगाई है। यह योजना है मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड ट्रेन की, जिसे बुलेट ट्रेन भी कहा जा रहा है। इस ट्रेन के लिए मुंबई से अहमदाबाद के बीच हाई स्पीड कॉरिडोर बन रहा है।

डिजाइन के लिए जारी किया था टेंडर
केंद्र सरकार ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत 237 किलोमीटर लंबी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के डिजाइन और निर्माण के लिए टेंडर जारी किया है। यह टेंडर प्रोजेक्ट के 47% हिस्से को कवर करता है। इन प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड और एल ऐंड टी जैसी अन्य कंपनियों ने भी दिलचस्पी दिखाई है। नैशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 508 किलोमीटर लंबे रेल कॉरिडोर का निर्माण होना है।
मौजूदा टेंडर गुजरात के वापी से लेकर वडोदरा के बीच रेल ट्रैक के निर्माण के लिए जारी किया गया है। इसमें चार शहरों वापी, बिलिमोरा, सूरत और भरूच में रेलवे स्टेशन का भी निर्माण होगा। इसके रास्ते में 24 नदियां और 30 रोड क्रॉसिंग आएंगे। जिस दूरी के लिए टेंडर जारी किया गया है, उसका पूरा हिस्सा गुजरात में पड़ता है, जिसके लिए 83% जमीन का अधिग्रहण हो चुका है।
बोली में कई नामी कंपनियां शामिल
मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए कुल तीन कंपनियों ने टेंडर भरा है। हालांकि इन कंपनियों ने कुल आठ इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलप करने वाली कंपनियों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से इस रेल कॉरिडोर के लिए टेंडर भरा है। इसके लिए एफकॉन्स इंफ्रास्टक्टर लिमिटेड ने इरकॉन इंटरनैशनल लिमिटेड और जेएमसी प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड के साथ मिलकर टेंडर भरा है। वहीं, टेंडर भरने वाली दूसरी कंपनी लार्सन ऐंड टूब्रो है। वहीं, एनएचआरसीएल लिमिटेड ने टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड, जे कुमार इंफ्रा प्रोडेक्ट्स और एचएसआर कंसोर्टियम के साथ मिलकर टेंडर भरा है।

करीब एक लाख रोजगार का दावा
नैशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने दावा किया कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में 90,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलगा। एनएचआरसीएल के पीआरओ सुषमा गौर ने कहा कि परियोजना के निर्माण में विभिन्न निर्माण संबंधी गतिविधियों के लिए 51,000 से अधिक टेक्नीशनों, कुशल और अकुशल कार्यबल की आवश्यकता होगी। इसके अलावा 34,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे।
उन्होंने कहा कि 508 किमी लंबी लाइन में 26 किमी लंबी सुरंगों को बनाने के लिए 75 लाख मीट्रिक टन सीमेंट और 21 लाख मीट्रिक टन स्टील की खपत होने की उम्मीद है। इससे 7 किमी लंबी समुद्र में सुरंग, 27 स्टील पुल, 12 स्टेशन और कई सहायक सुपर स्ट्रक्चर शामिल हैं। ये उद्योग विभिन्न श्रेणियों, लिंक की गई आपूर्ति श्रृंखला और संबद्ध सेवाओं में रोजगार के अवसर प्रदान करेंगे।