मुंबई, राज्य सरकार ने गुरुवार को स्कूलों में शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर महत्वपूर्ण जीआर (शासनादेश) जारी किया

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मुंबई, राज्य सरकार ने गुरुवार को स्कूलों में शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर महत्वपूर्ण जीआर (शासनादेश) जारी किया है। इसके तहत 50 फीसदी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को अब स्कूलों में जाकर हाजिरी लगानी होगी। जहां सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था नहीं है और शिक्षकों को सफर करने की अनुमति नहीं दी गई है, वहां शिक्षकों को निजी साधन की व्यवस्था करके जाना होगा। सरकार के इस नए जीआर का विरोध शिक्षक संगठन ने किया है।
सरकार के फैसले का शिक्षक संगठनों ने विरोध करते हुए जीआर को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि जीआर अस्पष्ट है। मुख्याध्यापकों और शिक्षकों में उपस्थिति को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। जीआर के मुताबिक, राज्य के स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान 31 अक्टूबर तक विद्यार्थियों के लिए और नियमित कक्षा के लिए बंद रहेंगे। सिर्फ, ऑनलाइन, ऑफलाइन शिक्षा और दूरस्थ शिक्षा शुरू रहेगी। टेली काउंसलिंग और उससे संबंधित कामकाज के लिए राज्य के सरकारी, निजी अनुदानित, गैर अनुदानित सहित अन्य स्कूलों में 50 फीसदी शिक्षक और कर्मचारियों को तुरंत काम पर आने के लिए कहा गया है।
अभिभावकों से लें लिखित अनुमति
केंद्र सरकार के दिशानिर्देश के अनुसार, स्कूल और कक्षाएं शुरू होने पर अभिभावकों से लिखित अनुमति मिलने के बाद ही प्रवेश देने की बात कही गई है। स्कूलों में मास्क पहनना अनिवार्य होगा। सभी शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का स्कूलों के गेट पर थर्मल गन से शरीर का तापमान जांचने का निर्देश भी दिया गया है।
जीआर को लेकर शिक्षकों में असमंजस
मुंबई मुख्याध्यापक संगठन के सचिव प्रशांत रेडिज ने कहा कि इस जीआर के चलते मुख्याध्यापक असमंजस में हैं। शिक्षकों को कब और किस तरह बुलाना है, इसका जिक्र नहीं है। शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर भी मुख्याध्यापक क्या निर्णय लेंगे, उन्हें समझ में नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाने वाले शिक्षकों को स्कूल बुलाने का क्या मतलब है? जीआर में दिवाली की छुट्टी के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। कन्टेनमेंट जोन के स्कूलों के शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर भी कोई टिप्पणी नहीं है। कोरोना वायरस से बचाव व उपकरणों और संसाधनों पर होने वाले खर्च को लेकर भी जीआर में कोई जिक्र नहीं है। सरकार को इस जीआर पर पुनर्विचार करना चाहिए और तब तक पुरानी व्यवस्था बरकरार रखनी चाहिए।(UNA)