मुंबई लहरों से टकराए बिना नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। यह पंक्तियां पश्चिम रेलवे की इन तीन महिला लोको पायलट पर बिल्कुल सटीक बैठती है।

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मुंबई
लहरों से टकराए बिना नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। यह पंक्तियां पश्चिम रेलवे की इन तीन महिला लोको पायलट पर बिल्कुल सटीक बैठती है। जिन्होंने पुरुषों के लिए मुफीद पाए जाने वाले इस पेशे हमें अपनी मेहनत और लगन से खुद के लिए एक अलग जगह बनाई है। आकांक्षा राय, कुमकुम सूरज डोंगरे और उदिता वर्मा नाम की ये तीनों लोको पायलट अन्य महिलाओं के लिए एक मिसाल बन कर उभरी हैं। वसई स्टेशन पर बना इतिहास
पश्चिम रेलवे के वसई रोड रेलवे स्टेशन पर तब एक नया इतिहास लिखा गया। जब आकांक्षा राय बतौर लोको पायलट एक गुड्स ट्रेन को लेकर स्टेशन पहुंची। आपको बता दें कि इस ट्रेन में पूरा स्टाफ महिलाओं का ही है। आकांक्षा ने इंदौर से एमबीए की पढ़ाई करने के बाद यह पेशा चुना है। जिसे आमतौर पर महिलाओं के लिए सही नहीं माना जाता है। आकांक्षा राय के साथ ट्रेन में मौजूद गुड्स गार्ड कुमकुम नागेंद्र भी इसके पहले असिस्टेंट लोको पायलट रह चुकी हैं। जबकि उदिता वर्मा ने असिस्टेंट लोको पायलट का कार्यभार संभाला है। गुड्स गार्ड से करियर की शुरुआत
पश्चिम रेलवे के मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन (Mumbai central railway station ) पर बतौर गुड्स गार्ड आकांक्षा राय ने साल 2019 में पदभार ग्रहण किया था। कई सालों तक रेलवे में गुड्स गार्ड की नौकरी कर चुके नेपोलियन फर्नांडीस बताते हैं कि महिलाओं के लिए गुड्स गार्ड की नौकरी को सही नहीं माना जाता है। क्योंकि कई बार लंबे समय तक उन्हें यात्रा पर रहना पड़ता है और एक ही केबिन में वक्त गुजारना पड़ता है। जहां मूलभूत सुविधाओं की भी काफी दिक्कत होती है। हालांकि अब हालात में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है। गुड्स गार्ड पुरुषों की नौकरी
गुड्स गार्ड को पूरी यात्रा के दौरान पैनी नजर बनाकर रखनी पड़ती है जो काफी चैलेंजिंग और मुश्किलों भरा होता है। इसी वजह से पहले इस नौकरी को पुरुषों के लिए रिजर्व रखा जाता था और महिलाओं को तैनाती नहीं दी जाती थी। हालांकि आकांक्षा राय ने इस मिथक को तोड़ा है और एक नई मिसाल कायम की है। उन तमाम लोगों के लिए जो इस नौकरी को सिर्फ और सिर्फ पुरुषों के लिए ही सही मानते थे। राय बताती हैं कि इस नौकरी में उन्हें काफी गर्व महसूस होता है। इसके अलावा उन्हें घूमना, शॉपिंग और लिखना भी अच्छा लगता है।

मेहनत ने दिलाया सम्मान
रेलवे में बतौर असिस्टेंट लोको पायलट नियुक्त हुई उदिता वर्मा की मेहनत और लगन ने उन्हें सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट तक का प्रमोशन दिलवाया है। साल 2016 में पश्चिम रेलवे में सहायक लोको पायलट के पद पर भर्ती हुई उदिता वर्मा ने महज 3 साल में ही सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट के पद पर छलांग लगाई है। रेल मंत्रालय भी लगातार महिलाओं को भी हैवी ड्यूटी नौकरी देकर उनकी सहभागिता को बढ़ाने के प्रयास में जुटा हुआ है।