मुंबई शिवसेना के सांसद संजय राउत ने आज दिल्ली में आंदोलन कर रहे किसानों से गाजीपुर बॉर्डर पर जाकर मुलाकात की।

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मुंबई
शिवसेना के सांसद संजय राउत ने आज दिल्ली में आंदोलन कर रहे किसानों से गाजीपुर बॉर्डर पर जाकर मुलाकात की। उन्होंने कहा कि राकेश टिकैत की आंखों के आंसू मुझे यहां तक खींच लाए हैं। राउत ने कहा कि जल्द ही उद्धव ठाकरे भी राकेश टिकैत से किसान आंदोलन पर बातचीत करेंगे। राउत ने कहा कि आंदोलन को लेकर राकेश टिकैत (Kisan Leader Rakesh Tikait) की जो रणनीति होगी हम भी उसी रणनीति के तहत काम करेंगे। राउत ने इस मुलाकात का पहले ही ऐलान कर दिया था। उन्होंने कहा था कि उद्धव ठाकरे के आदेश पर वे किसानों का हाल-चाल लेने के लिए गाजीपुर बॉर्डर (Gazipur Border) जाएंगे।

राउत ने कहा कि 2 महीने से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है। किसान दिल्ली की सरहद (Delhi Farmers Protest) पर कड़कड़ाती ठंड में आंदोलन कर रहे हैं लेकिन सरकार सिर्फ बातों की टेबल सजाने में जुटी हुई है। राउत की किसानों के साथ हुई इस मुलाकात पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि आखिर 2 महीने बाद उन्हें किसानों की याद क्यों आई? तब उन्होंने कहा कि अब आंदोलन को ताकत देने की जरूरत है। इस विषय पर किसी को राजनीति नहीं करनी चाहिए।
किसानों पर शिवसेना की संदिग्ध भूमिका
संजय राउत भले ही आज दिल्ली बॉर्डर पर किसानों के बीच राकेश टिकैत से मिलने गए हों। लेकिन शिवसेना की किसान आंदोलन पर भूमिका संदेहास्पद ही रही है। जिस तरह से पिछले दिनों मुंबई के आजाद मैदान में हुए किसान आंदोलन शिवसेना का कोई भी बड़ा नेता शामिल नहीं हुआ। उससे शिवसेना की मंशा पर सवाल उठने लाजिमी हैं। शिवसेना ने लोकसभा में भी किसान बिल का समर्थन करते हुए राज्यसभा में वाकआउट किया था। आजाद मैदान में भी उद्धव ठाकरे समेत आदित्य ठाकरे के आने की बात कही गई थी। लेकिन ऐन वक्त पर दोनों नेता आंदोलन में शामिल नहीं हुए थे। बीजेपी से नाराज शिवसेना

इस मुलाकात के कई सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। जो सीधा महाराष्ट्र (Maharashtra) से जुड़े हुए हैं। एक तरफ जहां बीजेपी (BJP) के नेता उद्धव ठाकरे (Maharashtra CM ) और उनके परिवार पर खुलेआम निशाना साध रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ मेट्रो कार शेड (Metro Carshed) के मुद्दे को लेकर शिवसेना और बीजेपी आमने सामने हैं। इसके अलावा शिवसेना और महाविकास अघाड़ी की तरफ से कई लोगों के नाम एमएलसी पद के लिए भी राज्यपाल के अनुमोदन के लिए भेजे गए हैं। जिन पर अभी तक महामहिम ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर शिवसेना और बीजेपी के बीच में ठनी हुई है। हालांकि शिवसेना बीजेपी के खिलाफ कभी नरम तो कभी गर्म हो अख्तियार करती रहती है।