मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के मामले में अपराधियों को बच निकलने का रास्ता साफ कर दिया सीबीआई ने:सरोज चौबे

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शेल्टर होम मामले में सीबीआई मुख्य आरोपी को बचा रही है

पटना 10 जनवरी.मुजफ्फरपुर शेल्टर होम को लेकर सीबीआई ने जो अपनी रिपोर्ट सौंपी है वह काफी निराशाजनक और संदेहास्पद है. लगता है कि सीबीआई इस जघन्य हत्याकांड के मुख्य अभियुक्तों को बचाने में लगी है. सीबीआई ने बिहार के उन तमाम मासूम लड़कियों के न्याय की उम्मीदों का गला घोट दिया है जिस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और जिस उम्मीद में यह मामला सीबीआई को सौंपा गया था. आज उससे गहरी निराशा हुई है. देश की सर्वोच्च जांच की संस्था भी अगर मासूम बच्चियों को न्याय दिलाने में सक्षम नहीं है तो आखिर इतनी बड़ी जांच एजेंसी का जरूरत क्या है?

बिहार की सभी महिला संगठनों ने सीबीआई के इस जांच के नतीजे पर गहरा रोष व्यक्त किया है और कहा कि इसे हम नहीं मानते. सीबीआई इस घटना की लीपापोती कर रही है और मुख्य अपराधियों को बचा रही है. महिला संगठनों ने कहा कि हमें उम्मीद थी कि शेल्टर होम में हुए यौन शोषण और हिंसा के जघन्य मामलों की जांच कर सीबीआई दोषियों को कटघरे में खड़ा करेगी पर अब खुद सीबीआई कटघरे में खड़ी है. सुप्रीम कोर्ट में खुद 11 लड़कियों के गायब होने की बात कही थी, अब कह रही है कि 35 बच्चियां सकुशल बरामद कर ली गई है आखिर वे 24 बच्चियां कहां से आई? सीबीआई ने खुद बयान में खुदाई में मिले कंकाल बच्चियों के होने की बात कही थी. आज उसे वयस्कों का बता रही है.  सीबीआई ने यह नहीं बताया लेकिन कंकाल किसके हैं और इसका शेल्टर होम से क्या रिश्ता है?

यह बात भी सामने आई थी कि सत्ताधारी दल के कई नेताओं का आना जाना वहां था. उस समय के समाज कल्याण विभाग की मंत्री रही मंजू वर्मा और उनके पति का भी नाम आया था. मंजू वर्मा के पति चंदेश्वर वर्मा पर मुजफ्फरपुर मामले में गिरफ्तार बाल संरक्षण अधिकारी रवि रोशन की पत्नी ने अक्सर बालिका गृह में जाने का आरोप लगाया था. यह भी कहा गया था कि बच्चियों ने अपने बयान में जिस तोंद वाले और मूंछ वाले अंकल का जिक्र किया था वह वर्मा ही थे. सीबीआई अपनी जांच में इस पर से पर्दा उठाने में नाकामयाब रहा.

सवाल यह है कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम की लड़कियों ने जिस तोंद वाले और मूछ वाले अंकल का जिक्र किया उनका क्या हुआ, उनकी क्या भूमिका थी ? लड़कियों ने अपने जिन साथियों को मारकर गाड़ देने की बात कही वह कहां दफन है? मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर के ड्राइवर विजय तिवारी और सफाई कर्मचारी कृष्णा राम ने भी हत्या कर शव गाडे जाने की पुष्टि की थ. सीबीआई ने चालाकी से काम किया है, कुल 71 अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है. विभागीय कार्रवाई के नाम पर ज्यादा से ज्यादा सस्पेंड हो सकते हैं. आपराधिक मामला तय नहीं कर जांच जांच एजेंसी ने सबके बच निकलने का रास्ता छोड़ दिया है .

हम महिला संगठन इस मामले की फिर से न्यायिक जांच की मांग करते हैं.इसे आपराधिक मामले की तरह देखा जाए और उसी आलोक में जांच हो.जब तक शेल्टर होम की बच्चियों को न्याय नहीं मिलेगा.बिहार के सभी महिला संगठन की तरफ से जारी है. जारी करने वालों में निवेदिता बिहार महिला समाज,मीना तिवारी  ऐपवा,रामपरी एडवा,अलका वर्मा वरीय अधिवक्ता,सुधा अम्बष्ठ वरीय अधिवक्ता, तबस्सुम अली,आसमा खान, कामायनी ,अख्तरी हैं.