मुजफ्फरपुर संवाददाता-स्वास्थ्य सेवा विशेष एजेंडे में हो शामिल: कन्हैया

मुजफ्फरपुर पटना-एईएस से आठ और बच्चों की मौत सूबे में अब तक 172 की गई जान

उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर समेत आसपास के जिलों में एईएस (चमकी-बुखार) से सात बच्चों की मौत हो गई। एसकेएमसीएच में शनिवार को दो बच्चे और शुक्रवार की देर रात दो बच्चों की जान चली गई। मीनापुर अस्पताल में भी एक बच्चे ने दम तोड़ दिया। वहीं, दो अन्य बच्चों की मौत पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर व मधुबन प्रखंड में हुई। वहीं बेगूसराय में भी एक बच्ची की मौत हो गयी। इस तरह एईएस से अबतक 172 बच्चों की जानें जा चुकी हैं।शनिवार को एसकेएमसीएच, केजरीवाल व मीनापुर अस्पताल में एईएस के 16 बच्चे भर्ती हुए। इनमें 12 को एसकेएमसीएच, दो को केजरीवाल अस्पताल व दो को मीनापुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस तरह अब तक एईएस के 519 मामले सामने आ चुके हैं।

मुजफ्फरपुर संवाददाता-बारिश से बंधी उम्मीदों की डोर, घटेगा एईएस का प्रकोप

पिछले एक पखवाड़े से जानलेवा बनी गर्मी के बीच शनिवार को हुई मानसून की पहली बारिश से उम्मीदों की डोर बंध चुकी है। एईएस का प्रकोप झेल रहे बच्चों के न सिर्फ अभिभावक बल्कि डॉक्टर भी उम्मीद कर रहे हैं कि इस जानलेवा बीमारी से अब राहत मिलेगी। बारिश से तापमान में गिरावट के बाद एईएस मरीजों की संख्या में भी कमी आ सकती है। शनिवार को एसकेएमसीएच और केजरीवाल अस्पताल में सिर्फ 14 नए मरीज भर्ती हुए। अब डॉक्टर भी मानने लगे हैं कि इसी तरह बारिश यदि अगले तीन-चार दिन तक जारी रही तो बीमारी का प्रकोप कम हो जायेगा। बारिश के साथ ही तापमान 3.5 कम हो गया है। 38.5 से घटकर 35 डिग्री हो गया है।

एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार शाही ने कहा कि अब इंद्रदेवता की कृपा शुरू हो गई है। तीन-चार दिनों में बच्चों की मौत का सिलसिला स्वत: थम जायेगा। यह पहली बार नहीं होगा। वह यह बात वर्षों के अनुभव से कह रहे हैं। बीते दिनों एसकेएमसीएच पहुंची केंद्रीय टीम के सामने भी राज्य वैक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल अधिकारी डॉ. एमपी शर्मा, एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गोपालशंकर सहनी आदि ने दावा किया था कि अच्छी बारिश होगी तो मौसम का मिजाज बदलेगा। इसके बाद बीमारों की संख्या घटने लगेगी।

विशेषज्ञों की मानें तो मुजफ्फरपुर व इसके आसपास के जिलों के कई प्रखंडों में गर्मी की प्रकृति अलग है। तेज धूप के साथ उमस भरी गर्मी का 24 घंटे तक समान असर दिखता है। रात में भी तापमान में खास गिरावट नहीं होती। इस कारण खाली पेट सोने वाले बच्चों के लिए गर्मी जानलेवा साबित होती है। डॉ. गोपालशंकर सहनी भी इससे इत्तेफाक रखते हैं