मुजफ्फर नगर की किसान पंचायत इतिहास बनाने की ओर

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दिल्ली; 26-27 अगस्त को दिल्ली के सिंघू बार्डर पर हुए दो दिवसीय सम्मेलन में 5 अगस्त के मुजफ्फर नगर के किसान महापंचायत के आह्वान का व्यापक असर दिख रहा है। किसान नेता आशीष मित्तल से बात करते हुए पता लगा है कि कार्यक्रम के एक दिन पूर्व ही करीब एक से डेढ लाख किसान पहुँच चुके हैं। इस पंचायत ने एक राष्ट्रीय कार्यक्रम का शक्ल अख़्तियार कर लिया है जिसमें खुद उत्तर प्रदेश के अलावा निकटवर्ती राज्यों से भारी तादाद में आंदोलनकारी किसान पहुँच रहे हैं। आज शाम को ही सात-आठ किलोमीटर लंबी लाइनें वाहनों की लग चुकी हैं।
एक अनुमान के मुताबिक 6 से 7 लाख से ज्यादा लोगों की पहुँचने की उम्मीद है। पंजाब के किसान नेता जगमोहन सिंह ने तसवीरें साझा करते हुए कहा कि पंजाब के हर जिले से हजारों की तादाद में किसानों के जत्थे निकल चुके हैं।
पिछले एक साल की लंबी लड़ाई के बाद केंद्र सरकार के अड़ियल रवैये और किसान आंदोलनकारियों के प्रति उदासीन रवैये ने किसानों के बीच आक्रोश को भड़का दिया है और साथ ही हाल ही में पंजाब और हरियाणा में किसानों पर बर्बर पुलिस लाठी चार्ज और किसान नेता सुशील काजल की मौत ने एक नया मोड़ ले लिया है। किसान नेता राकेश टिकैत के करीबी राज सिंह ने बताया कि मुजफ्फर नगर को महापंचायत के लिए इसलिए भी चुना गया क्योंकि यहीं से सांप्रदायिक उन्माद पैदा कर भाजपा सत्ता में आई थी और यहीं समप्रदयिक सौहर्द्र का माहौल बना कर आने वाले विधान सभा चुनाओं में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने का बिगुल यहीं से फूंका जाएगा।
इधर सरकार और प्रशासन के हाथ पाँव फुले हुए हैं। जगह जगह आंदोलनकारी किसानों को रोकने की भी कोशिश जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि व्यापक पुलिस बल और अर्धसैनिक बालों की भारी संख्या में तैनाती की गई है जिससे किसी अनहोनी घटना को टाला जा सके।
कल के पंचायत से किसान आंदोलन को क्या दशा दिशा मिलती है, और किसानों की व्यापक एकता पर निर्भर करता है। लेकिन एक बात तो तय है कि कल 5 सितंबर को होने वाली यह किसान पंचायत ऐतिहासिक होने वाली है। अब सवाल ये है कि क्या केंद्र सरकार को बात करने के लिए मजबूर कर सकता है यह किसान आंदोलन? अभी तक का अनुभव तो नकारात्मक ही रहा है।