मोक्ष के साधन है बाबा विश्वनाथ वोट के नहीं: राजेंद्र तिवारी

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UNA NEWS
Varanasi Bureau,
4 Feb.22

मंदिर तोड़े गए देव विग्रहों को खंडित किया गया विश्वनाथ कारिडोर के नाम पर। अपने झूठे अहम और राजनीतिक एजेंडे के तहत इन काले करतूतों को ढकने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुप्रयोग कर नये-नये नेरीटिव गढ़े गए कहा गया “दिव्य काशी भव्य काशी,चलो काशी” इनके दिव्य और भव्य काशी में 286 शिव लिंगों को बुल्डोजर चला कर तोड़ा गया क्रशर मशीन में जाने कितने शिव लिंगों की गिट्टियां बना कारिडोर की नींव में डाला गया काशी की परम्परा को खंडित कर साधना स्थल को पर्यटन स्थल में बदला गया है ये आरोप है काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत राजेंद्र तिवारी के । उनका कहना है कि कारिडोर के नाम पर मुनाफा कमाने की योजना है। कहा गए वो पांच गणेश? जिनकी परिक्रमा कर काशी यात्रा शुरू होती थी? कारिडोर के मुद्दे पर उन्होंने हमसे बातचीत की और गंभीर आरोप लगाए उन्होंने कहा कि विश्वनाथ मोक्ष के साधन है वोट के नहीं।
महंत राजेंद्र तिवारी का कहना है कि हमारा विरोध मंदिर के विस्तारीकरण से नहीं था पर कारिडोर के नाम पर जिस तरह सबकुछ तहस-नहस कर दिया गया मंदिर के मूल वास्तु से छेड़छाड़ किया गया साधना स्थल को व्यावसायिक स्थल में बदला गया।
उन्होंने कहा मुझे वो दिन नहीं भूलता जब कारिडोर का शिलान्यास करने आए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि वो बाबा को मुक्त कराने आए है ये उनका अहंकार था उन्होंने कहा काशी में बाबा अविमुक्त स्वरूप में विराजते है उन्हें कौन मुक्त करेगा।
साथ ही वो कहते है कि इस सरकार का एजेंडा ही बेचना है और इस एजेंडे का फार्मूला है हम दो हमारे दो इन्हीं के हाथों राष्ट्रवादी सरकार सबकुछ बेच रही है कारिडोर भी इसी का हिस्सा है।
महंत राजेंद्र तिवारी कहते है काशी को जीकर ही काशी को रचा जा सकता है काशी का व्यावसायीकरण और इससे मुनाफा कमा कर नहीं।

Bhashkar

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