मो.सदरे आलम के साथ आठ की मौत

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दिल्ली,9 दिसम्बर।दिल्ली के फिल्मीस्तान में हुई भीषण अगलगी में सिंघिया के युवाओं के जिंदा जलने की सूचना मिलते ही कई गांवों में कोहराम मच गया। थाना के हरिपुर गांव में दोपहर बाद से ही चीख-पुकार मची है। एक ही मोहल्ला के 8 युवाओं की मौत की खबर से गांव में  चीख-पुकार मच गई है। घर की महिलाओं एवं पुरुषों का रो रो कर बुरा हाल है। एक साथ दो बेटों की मौत की खबर मिलते ही खतीजा खातून बेहोश होकर गिर पड़ीं। पड़ोसियों द्वारा काफी मशक्कत से उसे होश में लाया गया और होश में आते ही बेटों का नाम ले चीत्कार मारना शुरू कर दी।

 जानकारी के अनुसार मो. उल्फत के दोनों पुत्र मो. बजीर एवं मो. मजीद एक साथ रहकर फैक्ट्री में काम करते थे। इन दोनों के भरोसे ही परिवार की गाड़ी चल रही थी। फफक फफक कर रो रहे पिता मोहम्मद गुलफाम को भी लोगों द्वारा ढाढस बंधाया जा रहा था। देर शाम तक घर के सामने लोगों की भीड़ जुटी थी। दूसरी ओर गांव के मोहम्मद मोती एवं मोहम्मद रज्जाक के घर के सामने भी ग्रामीणों की भीड़ लगी थी। मोदी की पत्नी मुन्नी खातून झुलस कर मरे अपने पुत्र मोहम्मद छेदी के लिए व्याकुल थी।

 लोग उसे पूरी सूचना नहीं दे रहे थे, बावजूद मां का दिल मान गया था और वह बेटा हो बेटा का रट लगा रो रही थी। जबकि मोहम्मद रज्जाक और उनकी बेगम रोशन खातून भी चीख  रही थी। उनके 19 वर्षीय बेटा मो अकबर को आग की लपटों ने अपने  आगोश में ले लिया था। इसके साथ ही किसी एक घर और दरवाजे नहीं बल्कि गांव के पूरे मुस्लिम टोला में ही कोहराम के बीच सभी अपने अपने कमासुत बेटों का हाल पूछते हुए अल्लाह ताला से सलामती की भी दुआ मांग रहे थे।

 गांव में जारी चर्चाओं की मानें तो अन्य मृतकों में सदरे आलम, मोहम्मद मन्नान, मोहम्मद साजिद, मोहम्मद नौशाद आदि के नाम भी शामिल हैं। मौके पर पहुंचे मुखिया रामप्रवेश शाह द्वारा लोगों को धैर्य रखने की सलाह भी दी जा रही थी। उन्होंने बताया कि गांव के दर्जनों युवा दिल्ली के फिल्मीस्तान क्षेत्र के विभिन्न कंपनियों  तथा सब्जी मंडी में काम करते हैं। अब तक पूरी सूचना प्राप्त नहीं हो सकी है।

 लगातार मोबाइल से संपर्क साधना जारी है । वहीं दूसरी ओर फुलहारा पंचायत के ब्रह्मपुरा गांव में भी मोहम्मद इदरीश के घर से चीत्कार स्पष्ट सुनाई दे रही है। महज 18 वर्षीय पुत्र मोहम्मद महबूब की झूलसकर हुई मौत की खबर सुनते ही परिवार के लोगों में कोहराम मच गया ।

 देखते ही देखते घर के सामने लोगों की भीड़ भी लग गई थी। वहीं उसी गांव के मोहम्मद अईनुल के पुत्र मोहम्मद सहमत का लापता होना बताया जा रहा है। इधर बेलाही गांव  के भी दर्जनों युवाओं  को इन कंपनियों में  मजदूरी करने की बात सामने आई है। इस गांव में भी कई घरों से सिसकियां निकल रही हैं। हालांकि अभी तक किसी के मरने की पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन अपने-अपने लाल से संपर्क नहीं होने के कारण विभिन्न प्रकार की आशंकाओं से घिरे माता पिता बिलखते हुए ऊपर वाले से दुआ मांग रहे हैं।

समस्तीपुर जिले के आठ लोगों की हुई है मौत

मो. साजिद, 22 वर्ष,  पिता- मो. मोहसिन हरिपुर,
मो. सदरे आलम, 30 वर्ष,  पिता- मो. मंसूर हरिपुर,
मो. साजिद, 25 वर्ष, पिता- उल्फत, हरिपुर,
मो. वाजिद, 18 वर्ष, पिता- उल्फत, हरिपुर,
मो. मन्नान, 25 वर्ष, हरिपुर,
मो. अकबर, 20 वर्ष, पिता- मो. रज्जाक हरिपुर,
मो. महबूब, 15 वर्ष, पिता- मो. इदरिस, ब्रह्मपुरा,
मो. अताबुस, 18 वर्ष, पिता- मो. हसन, हरिपुर

समस्तीपुर के सिंघिया से थे 25 मजदूर

दिल्ली की इस फैक्ट्री में समस्तीपुर जिले के सिंघिया प्रखण्ड के हरिपुर और ब्रह्मपुरा गांव से 25 मजदूर काम करने गये थे।कुछ तो 8 वर्षों से वहां काम कर रहे थे तो कुछ लोग एक वर्ष पूर्व या तीन महीने पहले ही रोजी रोटी के लिए काम करने गये थे।

फुलहारा के पंचायत समिति सदस्य मोहम्मद मुजीबुल का कहना है कि दिल्ली फैक्ट्री में आग लगने की जानकारी सुबह 5 बजे मिली। हम लोग मोबाइल खोल कर देखे तो व्हाट्सएप से पता चला कि किस फैक्ट्री में आग लगी है। उसमें हमारे गांव के लोग मजदूरी का काम कर रहे थे।रात मे वे लोग जब से गए तब आग लग गई जिसमें फसने के कारण वे लोग मर गए।

आगे उन्होंने बताया कि रविवार को दिन में तीन बजे में मालूम चला कि कौन-कौन मर गए। 25 लोग मजदूरी करने गये थे जिसमें 11 लोगों की मरने की खबर है। जो लोग नहीं मिल रहे है उनके भी मरने की ही खबर मानेंगे। 8 लोगों को पुलिस वालों ने मृत होने की खबर दी है।

मृतकों के परिजनों शव को समस्तीपुर भेजने की मांग

दिल्ली के अनाज मंडी फिल्मीस्तान में समस्तीपुर के 8 लोगों के मरने की खबर मिलने के बाद परजिनों ने केंद्र और दिल्ली सरकार से शव को समस्तीपुर के सिंघिया भेजने की मांग की है ताकि मरने वालों के लाश को उनके पैतृक गांव के कब्रिस्तान में दफन किया जा सके।

बताया जाता है कि सदरे आलम को तीन बच्चे हैं वहीं पत्नी गर्भवती है। स्थानीय लोगों एवं परिजनों ने बताया कि साजिद 8 से 9 वर्षों से उसी फैक्ट्री में काम कर रहा था वहीं मोहम्मद सहमत एक साल पहले ही काम करने गया था।जबकि मोहम्मद महबूब 3 महीने से उस फैक्ट्री में काम कर रहा था।