रांची. किसी अप्रिय घटना से सबक लेकर ही उस तरह की घटना-दुर्घटना से बचा जा सकता है, पर झारखंड (Jharkhand) के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स (RIIMS) प्रशासन ने शायद गुजरात (Gujrat) के अस्पताल में आग (Fire) लगने की घटना से कोई सबक नहीं लिया

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रांची. किसी अप्रिय घटना से सबक लेकर ही उस तरह की घटना-दुर्घटना से बचा जा सकता है, पर झारखंड (Jharkhand) के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स (RIIMS) प्रशासन ने शायद गुजरात (Gujrat) के अस्पताल में आग (Fire) लगने की घटना से कोई सबक नहीं लिया है. इंडोर वार्ड में 1500 से ज्यादा बेड वाले अस्पताल में आग बुझाने की सभी व्यवस्था फेल है. पुरानी बिल्डिंग, नए सुपर स्पेशलिस्ट भवनों, डेंटल इंस्टिट्यूट हर जगह आपात स्थिति में आग लगने पर उसे बुझाने की कलज व्यवस्था नहीं है. रिम्स की इस तरह की लापरवाही के चलते मरीज, उनके परिजन और यहां तक कि डॉक्टर सभी एक तरह के भय में रहते हैं. बता दें कि इसी अस्पताल में बिहार के पूर्व सीएम व आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी भर्ती हैं.

हजारीबाग से रिम्स में अपने पिता का इलाज कराने आए शाने अहमद न्यूज 18 से कहते हैं कि उनके पिता दिल की बीमारी का इलाज कराने के लिए सुपर स्पेशियलिटी भवन के तीसरे तल पर भर्ती हैं, पर उनको हमेशा इस बात का डर बना रहता है कि अगर शार्ट सर्किट जैसा कुछ हुआ तो फिर क्या होगा? रिम्स के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत भी मानते हैं कि अस्पताल में फायर फाइटिंग की मुकम्मल व्यवस्था होनी चाहिए.