रांची, चुनाव प्रचार में यूं तो आरोप-प्रत्यारोप का लंबा चलन है लेकिन झारखंड में हो रहे दो चुनावों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के पास इसके अलावा कुछ है भी नहीं

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रांची, चुनाव प्रचार में यूं तो आरोप-प्रत्यारोप का लंबा चलन है लेकिन झारखंड में हो रहे दो चुनावों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के पास इसके अलावा कुछ है भी नहीं। एक दूसरे पर आरोप लगाकर लोगों किसानों को दी बटोर कर जीत दर्ज करने में दोनों गठबंधन लगे हुए हैं। झामुमो कांग्रेस का गठबंधन जहां बिजली बिल की सीधी कटौती पर केंद्र के बहाने भाजपा को घेर रहा है वहीं भाजपा भी अपराध और खासकर दुष्कर्म के मामलों के बहाने सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है।
झामुमो शासन के एक साल की बात करें तो चुनावी प्रचार के दौरान सबसे अहम बात सामने आ रही है मजदूरों की वापसी के लिए हवाई जहाज मुहैया कराना। हालांकि हवाई जहाज से वापसी में किसकी कितनी भूमिका है यह बात लोगों तक पहुंच चुकी है। इस दौरान किसी विकास कार्य अथवा नीतिगत निर्णय का झामुमो की सभाओं में और कांग्रेस के कार्यक्रमों में चर्चा नहीं हो रहा है।
दोनों पार्टियां केंद्र में लाए गए कृषि बिल और बिजली बकाया के एवज में सीधी कटौती के बहाने जनता की सहानुभूति लेना चाहते हैं। दूसरी ओर, लगातार 5 वर्ष तक शासन कर चुकी भाजपा आरोपों के बहाने ही अपनी नैया पार लगाना चाह रही है। बढ़ते अपराध और खासकर दुष्कर्म के मामलों पर सरकार को घेरने की लगातार कोशिशें की गई हैं। इसके अलावा भाजपा के पास एक सदाबहार मुद्दा है अलग राज्य बनाने का विरोध कर रही कांग्रेस का साथ दो दशक पूर्व शिबू सोरेन ने दिया था।
एक दिन पहले ही भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने इस मुद्दे को उठाया है। देखना यह है कि दो दशक से इस मुद्दे को देख और समझ रही झारखंड की जनता किसके प्रति सहानुभूति दिखाती है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे वैसे सरगर्मी बढ़ती जा रही है।(UNA)