रांची : छोटी-बड़ी तमाम योजनाओं के लिए राज्य में निकाले जा रहे टेंडर नियमों में किए गए परिवर्तन के पेच में उलझकर रह गए हैं।

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रांची : छोटी-बड़ी तमाम योजनाओं के लिए राज्य में निकाले जा रहे टेंडर नियमों में किए गए परिवर्तन के पेच में उलझकर रह गए हैं। यह परिवर्तन न सिर्फ ठेकेदारों के लिए बल्कि सरकार के लिए भी सिरदर्द साबित हो रहा है। पूर्व के नियम में टेंडर राशि से 10 फीसद से अधिक नीचे जाने की अनुमति नहीं थी। इससे इतर अब नियमों में बदलाव कर ठेका लेने को इच्छुक एजेंसियों को दस फीसद से भी नीचे की दर कोट करने की अनुमति दे दी गई है। ऐसे में काम की गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। यहां तक कि ठेकेदार भी इसका विरोध कर रहे हैं और यही कारण है कि हाल में ही भवन निर्माण विभाग के समस्त टेंडर का लातेहार में सामूहिक तौर पर बहिष्कार किया गया। स्पष्ट है कि अगर समय रहते मौजूदा नियम नहीं बदले गए तो परेशानी तय है।

पूर्व के स्थापित नियमों के तहत दूसरा बड़ा बदलाव पांच लाख रुपये से अधिक के सभी टेंडर को ऑनलाइन किया जाना है। पूर्व में इसकी सीमा 50 लाख रुपये थी। बहरहाल आनलाइन टेंडर होने से बड़े काम पूरी तरह से रुके हुए हैं। सूत्रों की मानें तो पिछले वर्षो की तुलना में आधी से भी कम योजनाओं के टेंडर निकल रहे हैं। जिन कार्यों के लिए टेंडर निकल भी रहे हैं, उनके लिए ठेकेदार सामने नहीं आ रहे। यह बात भी जाहिर है कि अगर कोई व्यक्ति निर्धारित राशि से दस फीसद से नीचे की दर पर ठेका उठाता है तो गुणवत्ता का क्या हाल होगा।

12 से 13 फीसद होता है कमीशन
राज्य में ठेके पर काम आवंटित करने के लिए जो प्राक्कलन तैयार होता है, उसमें ठेकेदार का कमीशन 12-13 फीसद ही होता है। कई बार ठेकेदार 10 फीसद कम के आसपास राशि कोट कर काम उठाते हैं और उन्हें दो से तीन फीसद का ही मुनाफा होता है। बड़े ठेकों में इतना कम मुनाफा से भी काम यह चल जाता है, लेकिन छोटे ठेकों में इससे काम चलनेवाला नहीं है। दस लाख के ठेके में दो फीसद यानी कि 20 हजार रुपये का लाभ लेकर कोई ठेकेदार कितना काम करेगा और कितना मुनाफा कमाएगर, यह समझने की बात है।