रांची, पर्यटकों को लुभाने के लिए रांची जिले के खलारी प्रखंड स्थित खलारी तालाब पर यूं तो करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन सरकारी खजाने का पैसा समझिए पानी में डूब गया

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रांची, पर्यटकों को लुभाने के लिए रांची जिले के खलारी प्रखंड स्थित खलारी तालाब पर यूं तो करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन सरकारी खजाने का पैसा समझिए पानी में डूब गया। इंडियन टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड का प्रयास विफल साबित हो रहा है। वर्ष 2012 की बात है। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री सुबोधकात सहाय की पहल पर केंद्रीय पर्यटन विभाग ने राची मेगा टूरिस्ट सíकट के तहत राची, सरायकेला-खरसावा के बीच 34 पर्यटन स्थलों के विकास और सुंदरीकरण के लिए करीब 50 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। इन्हीं में एक योजना थी- खलारी तालाब का विकास। तालाब के अलावा प्रखंड के हेसालौंग तालाब तथा दुल्ली सर्वधर्म स्थल के सुंदरीकरण का भी काम हुआ था। पूरे प्रोजेक्ट के लिए प्राक्कलित राशि लगभग तीन करोड़ थी। वर्ष 2012 में इसके लिए टेंडर हुआ। तीन वर्ष में काम पूरा हुआ। करीब छह एकड़ में बने खलारी तालाब के चारों ओर घूमने के लिए पीसीसी सड़क बनाई गई। तालाब के किनारे पाच स्थानों पर लंबी-चौड़ी सीढि़यां बनाई गई। खास तरह के पत्थर लगाए गए, ताकि लोग बैठ कर आनंद की अनुभूति कर सकें। इतना ही नहीं व्यू प्वाइंट भी बनाया गया। शौचालय का निर्माण भी कराया गया। लेकिन खलारी तालाब की सूरत अब बदरंग दिख रही है। चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं। जलकुंभी से तालाब भरा पड़ा है। दरअसल, तालाब सुंदरीकरण के बाद यह तय नहीं किया गया कि इसकी रख-रखाव कौन करेगा। इसलिए धीरे-धीरे इसकी सूरत बिगड़ती चली गई। यहां प्रकाश की कोई व्यवस्था अबतक नहीं की गई है। एक तरह से देखा जाए तो यह कवायद विफल रही। सरकारी खजाने की राशि पानी में डूब गई। इसलिए राज्य सरकार ने नहीं दिया ध्यान
खलारी तालाब के रखरखाव के प्रति सभी उदासीन हैं। पर्यटन विभाग ने तो मौन साध रखा है। केंद्र व राज्य सरकार में उस वक्त तालमेल नहीं होने का खामियाजा प्रोजेक्ट पर पड़ा। केंद्रीय पर्यटन विभाग ने प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए राज्य पर्यटन सचिव को नोडल अधिकारी नियुक्त किया, लेकिन पैसा केंद्र का था इसलिए राज्य सरकार की एजेंसियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
जिला प्रशासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव: लेखराज खलारी प्रखंड के बीडीओ लेखराज नाग ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि इस तालाब की सुंदरता लौटाने के लिए प्रशासन की ओर से पहल की जाएगी। यह प्रोजेक्ट बड़े बजट का था। पिछले पाच साल से इस तलाब की सफाई नहीं हुई है। दोबारा सुंदर बनाने के लिए बड़े खर्च की दरकार है। इस संबंध में एक प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा जाएगा। बजट की स्वीकृति मिली तो इस दिशा में पहल की जाएगी।(UNA)