राष्ट्रीय लोक अदालत में 635 विचाराधीन व 453 प्री-लिटिगेटिव केसों किया गया निपटान

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हरियाणा; सिरसा, 12 सितंबर।
हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजन गुप्ता के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया। राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हरियाणा के 22 जिलों और 33 उप-मंडलों में किया गया तथा सिविल, आपराधिक, वैवाहिक, बैंक वसूली आदि से संबंधित मामलों तथा सभी एडीआर केंद्रों पर कार्यरत स्थाई लोक अदालतों के मामलों सहित निपटारा किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित करने का उद्देश्य वादियों को अपने विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए एक मंच प्रदान करना है।
जिला सिरसा में न्यायालय परिसर सिरसा, उपमंडल न्यायालय परिसर डबवाली व ऐलनाबाद में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के चेयरपर्सन व जिला एवं सत्र न्यायधीश राजेश मल्होत्रा ने बताया कि इस लोक अदालत में सभी तरह के न्यायालयों में विचाराधीन व प्री-लिटिगेटिव केस निपटारे के लिए रखे गये हैं, जिनमें मुख्यत: चैक बाउंस, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन दुर्घटना, घरेलू विवाद, बिजली व पानी से संबंधित विवाद, दिवानी व फौजदारी विवाद शामिल है। इस लोक अदालत में न्यायालयों में विचाराधीन कुल 635 केसों का निपटारा किया गया, जिनमें छह करोड़ 94 लाख 95 हजार 468 रुपये की राशि समायोजित की गई व प्री-लिटिगेटिव केस निपटारे के लिए रखे गए हैं, जिनमें न्यायालयों में विचाराधीन 453 केस प्री-लिटिगेटिव का निपटारा हुआ जिनसे एक करोड़ 86 लाख 82 हजार 475 रुपये की राशि समायोजित की गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अनुराधा ने बताया कि कुल पांच बैंचों का गठन किया गया जिसमें जिला न्यायलय सिरसा में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश प्रवीण कुमार, प्रिंसिपल जज फैमिली कोर्ट जसबीर सिंह कुंडू, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विनय शर्मा, न्यायिक दंडाधिकारी विशाल, ऐलनाबाद में सब डिविजनल न्यायिक दंडाधिकारी अशोक कुमार, डबवाली में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (जे.डी) कम न्यायिक दंडाधिकारी अमनदिप सिंह शामिल थे। इसके अलावा एक बैंच पैरमानैट लोक अदालत में गठित किया जिसमें चेयरमैन पीएलए (पीयूएस) अशोक कुमार गर्ग व मैम्बर कुलवीर सिंह निरानियां उपस्थित थे।
राष्ट्रीय लोक अदालत के दिन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष एवं भारतीय उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित तथा हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजन गुप्ता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लोक अदालतों की निगरानी की।
न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने सफल राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए शुभकामनाएं दी। सभी अदालतों को आज की राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए अधिक से अधिक मामलों को उठाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने के लिए बधाई दी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि लोक अदालत बिना किसी अतिरिक्त लागत या शुल्क के मामलों के त्वरित और अंतिम सहमति के निपटान को सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी वैकल्पिक विवाद समाधान विधि है।
न्यायमूर्ति ने अधिक से अधिक मामलों को निपटाने का आह्वान किया क्योंकि लोक अदालत वैकल्पिक विवाद समाधान की एक प्रणाली है जो भारत में उत्पन्न हुई और बदलते समय के साथ एक प्रणाली के रूप में स्थापित हुई है। लोक अदालतें न केवल लंबित विवाद या पार्टियों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों को सुलझाती है बल्कि यह सामाजिक सद्भाव को भी सुनिश्चित करती है क्योंकि विवाद करने वाले पक्ष अपने मामलों को अपनी पूर्ण संतुष्टि के साथ सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाते हैं। यह अदालतों में भीड़-भाड़ को भी कम करता है क्योंकि आगे की मुकदमेंबाजी को समाप्त करने के लिए पक्षों की सहमति से मामलों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाया जाता है। न्यायालयों के पास उपलब्ध सीमित संसाधनों को राहत दी जाती है और शीघ्रता और प्रभावी तरीके से न्याय दिलाने के लिए उपलब्ध कराया जाता है। विवाद के निपटारे के अलावा, पक्षकारों को केसों को शुरू करने के समय उनके द्वारा भुगतान की गई अदालती फीस की वापसी से लाभ होता है।
हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार राज्य भर में भौतिक या वस्तुत: लोक अदालतें आयोजित करने का निर्देश दिया। कोविड-19 से बचाव के लिए मास्क पहनना, हाथों को सेनेटाइज करना, सामाजिक दूरी आदि जैसे स्वास्थ्य प्रोटोकाल का सख्ती से पालन करने के लिए आवश्यक निर्देश भी जारी किये गये। वर्तमान में हरियाणा के सभी 22 जिलों में दैनिक लोक अदालतें आयोजित की जा रही है। वर्ष 2020-2021 में 53 हजार 407 दैनिक लोक अदालतें आयोजित हुई और 65 हजार 550 मामलों को निर्णित किया गया तथा कुल 72,21,29,971 रुपये का निपटान किया गया।