रेल भाड़ा विवाद :-

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रेल भाड़ा विवाद: केवल महाराष्ट्र को छोड़कर सभी राज्य सरकारें देंगी प्रवासी मजदूरों की टिकट का 15% किराया
  देशभर में लागू लॉकडाउन के कारण अलग-अलग जगहों पर फंसे प्रवासी श्रमिकों के लिए सरकार की तरफ से कई ट्रेनें चलाई जा रही हैं। हालांकि, इस दौरान टिकट के किराए को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया। दरअसल विपक्ष की तरफ से आरोप लगाया गया कि रेलवे मजदूरों से टिकट की राशि ले रहा है। इस आरोप को सत्ताधारी पार्टी और केंद्र सरकार की तरफ से गलत ठहराया गया है।इस बीच सूत्रों ने सोमवार को कहा कि अब तक चलाई गई 34 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के लिए महाराष्ट्र को छोड़कर कई राज्य सरकारों ने भुगतान किया है।दरअसल कई विपक्षी दलों की तरफ से मांग की गई है कि प्रवासी श्रमिकों से ट्रेन टिकट के पैसे नहीं लिए जाएं। इस बीच कांग्रेस ने ऐसे प्रवासियों के टिकट की राशि का भुगतान करने की पेशकश की। जबकि, भाजपा ने कहा कि रेलवे पहले ही यात्रा की लागत का 85 फीसदी हिस्सा बतौर सब्सिडी टिकट पर मुहैया करा रहा है।इस मामले में  रेलवे ने अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है। हालांकि, अनौपचारिक रूप से कहा गया कि यह एक राजनीतिक लड़ाई है। अधिकारियों का कहना है कि रेलवे राज्य सरकारों से इन विशेष ट्रेनों के लिए केवल मानक किराया वसूल रहा है, जो कुल लागत का सिर्फ 15 फीसदी हिस्सा है।                            कौन कितना किराया दे रहा है?  सीधी भाषा में समझें तो अधिकारियों का कहना है कि टिकट का 85% भाड़ा बतौर सब्सिडी रेलवे खुद वहन कर रहा है। जबकि, 15 फीसदी भाड़ा राज्य सरकारों को वहन करना होगा।रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘रेलवे सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) बनाए रखने के लिए हर कोच में बर्थ खाली रखते हुए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चला रहा है। ट्रेनें गंतव्य से खाली लौट रही हैं। रेलवे की तरफ से प्रवासियों को मुफ्त भोजन और बोतलबंद पानी दिया जा रहा है। हम अब तक 34 ऐसी ट्रेनें चला चुके हैं और आगे भी चलाते रहेंगे। हमारे एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) में कहीं भी, हमने नहीं कहा है कि यात्रा करने वाले प्रवासियों से किराया लिया जाएगा। ’’                    किन राज्यों ने किया भुगतान?  सूत्रों के मुताबिक राजस्थान, तेलंगाना और झारखंड जैसे राज्यों ने श्रमिकों की यात्रा के लिए भुगतान किया है। बता दें कि राजस्थान, तेलंगाना जैसे राज्यों से विशेष ट्रेनों को चलाया गया है जो झारखंड तक पहुंची हैं। केवल महाराष्ट्र सरकार नहीं कर रही टिकट का भुगतान। सूत्रों ने बताया कि केवल महाराष्ट्र सरकार ही इन यात्राओं के लिए प्रवासी श्रमिकों से पैसे ले रही है। इस बीच महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितिन राउत ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि राज्य से बाहर जाने वाले प्रवासियों की यात्रा का खर्च राज्य सरकार वहन करे। राउत ने सीएम उद्धव ठाकरे के अलावा रविवार को रेल मंत्री पीयूष गोयल को भी पत्र लिखा। इसमें उन्होंने अनुरोध किया कि रेलवे राज्य से प्रवासियों के परिवहन का खर्च वहन करे।                        गुजरात में एनजीओ को जिम्मेदारी। सूत्रों ने कहा कि गुजरात सरकार ने यात्रा पर आने वाले खर्च का एक हिस्सा देने के लिए एक एनजीओ को संबद्ध किया है।।                       सुशासन बाबू का साथ। इस बीच, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को एक वीडियो बयान में कहा कि प्रवासियों के परिवहन के लिए राज्य सरकार रेलवे को पैसे दे रही है। सीएम नीतीश ने कहा कि किसी भी प्रवासी को अपनी यात्रा के लिए पैसे देने की जरूरत नहीं है।केंद्र सरकार ने सोमवार को साफ कहा कि उसने कभी भी प्रवासी मजदूरों से कुछ भी वसूलने की बात नहीं की है, क्योंकि यात्रा की लागत का 85 फीसदी हिस्सा रेलवे और 15 फीसदी हिस्सा राज्य सरकारें वहन करेंगे।सरकार ने यह भी कहा कि फंसे हुए प्रवासी मजदूरों के परिवहन की प्रक्रिया को एक या दो राज्यों को छोड़कर सभी राज्यों की तरफ से समन्वित किया जा रहा है।यह पूछे जाने पर कि क्या प्रवासी मजदूरों को घर वापस भेजे जाने के लिए शुल्क लिया जा रहा है, स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि जहां तक प्रवासी मजदूरों का संबंध है, दिशानिर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संक्रामक रोग प्रबंधन के तहत एक व्यक्ति को वहीं रहना चाहिए जहां वह है।।   छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को मिला राज्य सरकार का साथ। छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों का रेल किराया देने का फैसला किया गया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लॉकडाउन के कारण दूसरे राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को घर वापस लाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को विशेष ट्रेन से छत्तीसगढ़ लाने पर उनके यात्रा किराया राज्य सरकार वहन करेगी।