लखीमपुर खीरी के शहीद किसानों को कैंडल मार्च निकालकर दी श्रद्धांजलि

0
10

हरियाणा; सिरसा। गांव भारुखेड़ा खेड़ा के अंबेडकर पार्क में लखीमपुर में शहीद हुए किसानों के सम्मान में देर शाम श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। किसान सभा के नेता का. राकेश फगोडिय़ा, सीआईटीयू नेता का. नत्थूराम भारुखेड़ा, जनवादी महिला समिति की नेत्री कलावती देवी व नौजवान सभा युवा नेता का. नरेश ने बताया कि समूचे राष्ट्र का किसान पिछले 1 साल से तीनों काले कृषि कानूनों को रद्द करने व एमएसपी के गारंटी कानून की मांग को लेकर दिल्ली की बॉर्डरों पर संघर्षरत है। भाजपा आरएसएस द्वारा किसान आंदोलन को कुचलने के तमाम षड्यंत्रो के बावजूद किसान डटकर लोकतांत्रिक ढंग से खट्टर-मोदी की जनविरोधी हुकूमत का मुकाबला कर रहा है। मोदी सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए किसानों को क्षेत्र, धर्म विशेष में बांटने का पुरजोर प्रयास किया, लेकिन आंदोलन को कुचल नहीं पाए। अब तक करीब हमारे 650 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं, लेकिन खट्टर-मोदी की सरकार शहीद किसानों के प्रति सहानुभूति रखने की बजाय अब सीधे तौर पर किसानों को मौत के घाट उतारने का काम कर रही है। हाल ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अशोभनीय निंदनीय ब्यान देते हुए अपने कार्यकर्ताओं को कहा कि ल_ उठाओ और किसानों का मुकाबला करो। जेल भी नहीं जाने देंगे। लखीमपुर खीरी में गृह राज्य मंत्री टेनी सभा को संबोधित करते हुए सरेआम कहता है कि दो मिनट में आंदोलनकारी किसानों को खत्म कर देंगे और यही हुआ। लखीमपुर में किसान शांतिपूर्वक विरोध करने के लिए इक_े हुए थे, दोपहर बाद प्रदर्शन करते हुए जा रहे थे अचानक मंत्री का बेटा पीछे से आया और किसानों को अपनी गाड़ी के नीचे कुचलकर निकल गया। सभी तथ्य सामने आने के बावजूद भी मोदी सरकार मंत्री व बेटे को बचाने का पुरजोर प्रयास कर रही है। लाखों किसानों के आंदोलन के बावजूद मंत्री को बर्खास्त नहीं किया गया। जिस हत्यारे बेटे का बाप केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हो वह निश्चित रूप से जांच को प्रभावित करेगा, इसलिए संयुक्त किसान मोर्चा ने स्पष्ट कर दिया की जब तक मंत्री को बर्खास्त नहीं किया जाएगा, दोषियों को सजा नहीं मिलेगी, तब तक किसी भी प्रकार का कोई भी समझौता नहीं होगा। बीते दिवस लखीमपुर में अंतिम अरदास रखी गई, जिसमें देश के लाखों किसानों ने शहीद किसानों व पत्रकार साथी को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर सोहनलाल भारुखेड़ा, राजाराम राठी, रामकुमार रोलण, सुरेश रोलण, श्रवण सुथार, राजपाल भाटी, हरलाल लीलड़, रिछपाल छापोला, कलावती देवी सहित सैकड़ों किसान, नौजवान उपस्थित रहे।