लद्दाख में जारी सीमा विवाद के बीच 44 सेट सेमी हाई स्पीड ट्रेन (वंदे भारत एक्सप्रेस) के निर्माण का टेंडर रद्द करने पर रेलवे ने सफाई दी

0
195

लद्दाख में जारी सीमा विवाद के बीच 44 सेट सेमी हाई स्पीड ट्रेन (वंदे भारत एक्सप्रेस) के निर्माण का टेंडर रद्द करने पर रेलवे ने सफाई दी है। रेल बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने कहा कि इसके तीन बोलीदाताओं ने नियमों का उल्लंघन किया था, इसलिए इस टेंडर को रद्द कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इस टेंडर को रद्द करने के पीछे चीन का कोई कनेक्शन नहीं है। पहले ऐसी रिपोर्ट आई थी कि रेलवे ने इस टेंडर में चीनी कंपनी की भागीदारी के कारण ही इसे रद्द कर दिया था।
टेंडर नियमों का उल्लंघन करने पर हुई कार्रवाई- वीके यादव ने कहा कि टेक्निकल बिड्स के मूल्यांकन के दौरान कमेटी ने देखा कि वित्तीय प्रस्तावों के कुछ विवरण सार्वजनिक किए गए थे। जिसके कारण टेंडर में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निविदा समिति ने इसे रद्द करने की सिफारिश की। उन्होंने यह भी कहा कि नए टेंडर को एक हफ्ते के भीतर फिर जारी किया जाएगा।
समय पर ट्रेनों के निर्माण पर जोर- रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने यह भी जानकारी दी कि कीमतों का खुलासा करने वाली कंपनियों को भविष्य में बोली लगाने से रोक दिया जाएगा। ताजा टेंडर संशोधित सार्वजनिक खरीद आदेश के अनुसार होगा। इसमें मेक इन इंडिया को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि हमने इस कारण से तीन महीने खो दिए हैं लेकिन हम इन ट्रेनों को निर्धारित समयसीमा के अंदर प्राप्त कर लेंगे।
पहले चीन के कारण टेंडर रद्द करने की थी खबर- बताया गया था कि 44 प्रोपल्सन सिस्टम के लिए भारतीय रेलवे ने ग्लोबल टेंडर आमंत्रित किए थे। इस टेंडर में चीन की सरकारी कंपनी CRRC पॉयनियर इलेक्ट्रिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल थी। CRRC पॉयनियर इलेक्ट्रिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का गुरुग्राम की एक कंपनी के साथ संयुक्त वेंचर है। ये दोनों कंपनियां भारत में मिलकर काम करती हैं।
पिछले साल आया था ग्लोबल टेंडर- रेलवे ने 44 सेमी हाई स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के निर्माण के लिए पिछले साल के अंत में ग्लोबल टेंडर निकाला था। पिछले महीने जब टेंडर खोला गया तो चीनी जॉइंट वेंचर फर्म इसमें एकमात्र विदेशी कंपनी थी। 16 कोच की 44 ट्रेनों के लिए इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट और दूसरे आइटम की आपूर्ति के लिए कुल छह कंपनियों ने बोली लगाई थी। इस निविदा के लिए अन्य कंपनियों में दिल्ली की भेल, संगरुर की भारत इंडस्ट्रीज, नवी मुंबई की पावरनेटिक्स इंक्विपमेंट प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद की मेधा ग्रुप और परवानू की इलेक्ट्रोवेव्स इलेक्ट्रानिक प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल थीं।
देश में बढ़ा चीन का विरोध- चीन के साथ सीमा पर तनाव को देखते हुए देश में चीनी कंपनियों और सामान के बहिष्कार की मांग उठी है। इसके मद्देनजर सरकार ने चीन की कई कंपनियों के ठेके रद्द किए हैं। इससे पहले रेलवे ने कानपुर और दीनदयाल उपाध्याय सेक्शन के बीच सिग्नलिंग और टेलिकम्युनिकेशन का 471 करोड़ का एक चीनी कंपनी का ठेका रद्द कर दिया था।(UNA)