शाहीन बाग करे पुकार, न्याय करे केंद्र सरकार

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दिल्ली के शाहीन बाग के आंदोलन को आज पूरे दो महीने हो गए है । दिल्ली की शरद ऋतु महिलाओ ने बाहर सड़को पर बैठ कर गुजारी जिसमें कई बार तो ऐसा जाड़े का कहर रहा कि ठंड एक डिग्री तक पहुँच गई, तब भी महिलाओं ने आंदोलन को जारी रखा जो आज भी जारी है । कई बार महिलाओं  ने प्रधानमंत्री से गुहार लगाई की हमारे देश के प्रधानमंत्री मोदी हमसे मिलने आये और हमारी व्यथा को सुने और न्याय करे हम कोई बाहरी नहीं  हैं । हमारी कई पुश्तें इस मिट्टी में दफन हैं । किस आधार पर हमें सताया जा रहा है? क्या हम भारतीय नही क्या इस मुल्क को आज़ाद कराने में हमारे बुजुर्गों ने शहादत नही दी आज भी आप इतिहास उठा कर देख ले सब से ज्यादा इस मुल्क को आज़ाद कराने में अल्पसंख्यंको ने अपने प्राणों की आहुति दी।
भारत का मुस्लिम समाज पढ़ा लिखा समाज हो गया है। वो अपना बुरा भला सब समझता है जब देश आजाद हुआ था तब मुस्लिम समाज इतना साक्षर नही था परन्तु इन 72 सालो में मुस्लिम समाज ने शिक्षा पर बहुत जोर दिया है इसका साक्ष्य आंदोलन में बैठी वो महिलाएं है। जिन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय तथा देश की अन्य यूनिवर्सिटी से लॉ प्रोफेसर की डिग्रियां लेकर सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट तथा कई अन्य फील्ड में काम कर रही है।और आंदोलन में फर्राटेदार इंग्लिश बोलते हुए अपनी बात को रखना एक सबूत है।केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यंक समाज की ओर से अपनी आंखें मूंद ली है।ये NRC CAA और NRP सिर्फ मुस्लिमो के लिए ही नही देश के हर तबके के लिए खतरनाक है।
इसका उदाहरण हम असम में देख चुके है। वहाँ करोड़ो रूपये खर्च कर साढ़े उन्नीस लाख लोगों की NRC हुई उसका नतीजा ये निकला कि साढ़े चौदह लाख हिन्दू NRC में अपने कागजात नही दिखा पाए जिस कारण वो अपने ही देश मे विदेशी हो गए कई मामले तो ऐसे थे जिन लोगो ने 65 और 71 की लड़ाई में भारत का प्रतिनिधित्व किया और वो लोग शीर्ष पदों से रिटायर हुए वो भी अपने कागजात पूरे नही कर पाए इस से आप अंदाजा लगा सकते है ? कि भारत की आधी से ज्यादा आबादी इस प्रक्रिया को पूरा नही कर पायेगी इस का नतीजा बड़ा भयंकर रूप ले सकता है आज भी पूरा देश शाहीन बाग में तब्दील हो चुका है सरकार को इसकी पूरी जानकारी है।
परन्तु सरकार अपने फैसले को वापिस लेने में इस लिए पीछे नही हट रही है सरकार जानती है कि ये फैसला असंवैधानिक है जैसे sc st act में पूरा देश सड़को पर आ गया था और सरकार को झुकना पड़ गया था अब भी वो हालात बनते चले जा रहे है। और आखिर सरकार को झुकना ही पड़ेगा यही इस आंदोलन की सफलता होगी उदहारण के लिए रोस्टर भी एक sc st के लिए बाधा थी परन्तु सरकार को उसमें भी झुकना पड़ गाय था शाहीन बाग की सबसे बड़ी खूबसूरती ये है की भारत मे महिलाओ द्वारा इतने लंबे समय तक चलने वाला आज़ादी के बाद ये पहला आंदोलन है। जो बिना किसी नेतृत्व के रहा और देश की जानी मानी हस्तियों में चाहे वो शिक्षाविद हो इंटेलेक्चुअल हो कलाकार हो या फिर राजनीतिज्ञ सभी ने यहाँ आकर आंदोलन में भाग लिया और अपना अपना समर्थन दिया इस आंदोलन की वजह से कल होम मिनिस्टर अमित शाह ने कहा कि जिन्हें CAA समझ मे नही आ रहा हो वो तीन दिन के भीतर मेरे पास आये और हम उसको समझाएंगे की CAA आखिर है क्या ?
मुझे तो अमित शाह की बात पर ही हँसी आती है तीन दिन का समय देना और ये कहना कि जिसे समझ मे न आये भाई क्या देश का युवा या कानूनविद भी समझ नही पा रहा जो कानूनविद सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट में जजो से ज्यादा समझ रखते हो क्या वो आपके CAA NRC या NPR को नही समझ रहा है । वो लोग खुद सड़को पर आकर इसका विरोध कर रहे है। अंत मे आपको ये कहूँगा की भारत की जनता जाग चुकी है ।अब वो किसी के झांसे में नही आएगी इसका ताजा उदाहरण दिल्ली में केजरीवाल की जीत है। जिसमे भाजपा का भ्रामक प्रचार हिदू मुस्लिम आतंकवादी झूठा विकास सब हार गया और सच्चाई की जीत हुई यही भारत की अब असल तस्वीर है
फिलिप क्रिस्टी
एडिटर इन चीफ इंडिया