श्रमिकों के सवालए पर केजरीवाल पर गंभीर आरोप काँग्रेस नेता डॉ उदित राज ने

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5 जनवरी
नई दिल्ली
अखिल भारतीय असंगठित मजदूर एवं कर्मचारी काँग्रेस के अध्यक्ष उदित राज ने आम आदमी पार्टी और उसके मुखिया अरविंद केजरीवाल पर लगाए गंभीर आरोप। आज काँग्रेस दफ्तर में आयोजित एक प्रेस वार्ता में उदित राज ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि भलीभांति याद है कि ऑटो वाले, कैब, डीएलआरटी, ग्रामीण सेवा, स्कूल कैब, इन सब लोगों ने अपने पीछे, बोनट के पीछे केजरीवाल जी का प्रचार किया था और जिसकी वजह से केजरीवाल जी सत्ता में आए, एक कारण ये था और दूसरा कारण ये था कि जो टेंपरेरी एम्प्लोई हैं, उनको परमानेंट किया जाएगा। कहीं से भी दूर-दूर तक परमानेंट नहीं हुए। ये ऑटो सेक्टर के लीडर हैं, हजारों की फॉलोइंग है और यहाँ लगभग लाखों हैं, 50 लाख के आस-पास हैं, बल्कि उससे भी ज्यादा। संख्या मैं बोल रहा हूं, जो साथी हैं, ड्राइवर हैं, ओला, ऊबर ही 3-4 लाख हैं। एक लाख का ऑटो है और ग्रामीण सेवा है, डीएलआरटी है, टैक्सी है, स्कूल कैब है, कुल मिलाकर लगभग 8-10 लाख तो इस तरह से ही बन जाएंगे। उन सबको धोखा दिया है, उनके लिए कुछ भी नहीं किया है। उनके ऊपर हैवी फाइन लगे हैं। कोविड के टाइम में जो रिलीफ दिया जाना चाहिए ड्राइवर को, नहीं दिया गया। जो पार्किंग फाइन है, वहाँ पर फाइन लगाया गया। फिटनेस के नाम पर पैसा लिया गया। जिओ सिम के नाम पर, गूगल सिम के नाम पर पैसा लिया जा रहा है, इनसे। दो साल से जो स्कूल कैब हैं, बिल्कुल खड़ी हैं, भूखे मर रहे हैं और कोई उनको ग्रेस या पेमेंट नहीं दिया गया है, जो 5,000 किया गया था। एक काम कर सकते थे जीरो पेमेंट देकर उनके गुजारे के लिए इजाजत दे सकते थे और जगह पर अपनी गाड़ी चलाकर गुजारा कर सकते थे। यहीं के दिल्ली के ही ऑटो हैं। दिल्ली की कैब अगर गुरुग्राम जाती है और नोएडा जाती है, तो उसके ऊपर टैक्स है, जब लौटती है, तो टैक्स देना पड़ता है, 100 रुपए टैक्स है। 66/192 A में फाइन है, लाखों-लाख फाइन एक-एक कैब पर लगा पड़ा है। स्पीड गवर्नर 40 से 80 हो चुका है। हाईकोर्ट ने कह दिया है और 40 के बाद जो गाड़ी चलती है, उसके घर पर फाइन पहुंच जाता है।

इतना बड़ा शोषण है और यही अरविंद केजरीवाल जी जाकर पंजाब में और गोवा में, गोवा में कहते हैं कि टैक्सी बोर्ड बनाएंगे। दिल्ली में टैक्सी बोर्ड बना? लुधियाना में जाकर ऑटो वालों से कहते हैं कि दिल्ली में ऑटो वालों के लिए किया। क्या किया है, एक चीज बता दें जो उन्होंने की है? ये प्रेस रीलिज है, इसमें हमारी जो मांग हैं, 14 मागें हैं। ये आपको बता दी गई हैं।

28 दिसंबर को मांग पत्र दिया, दिल्ली कांग्रेस के ट्रांसपोर्ट यूनियन ने। 4 जनवरी तक अल्टीमेटम दिया गया कि हमारी मांगे नहीं मानी जाएंगी, तो हम आगे एक्शन लेंगे। 10 जनवरी को प्रचंड प्रदर्शन करेंगे। 4 जनवरी बीत जाने के बाद हम आपके सामने आए हैं कि ये बिल्कुल झूठा है और 10 जनवरी को हम विशाल प्रदर्शन कामगार और असंगठित कामगार कांग्रेस ट्रांसपोर्ट यूनियन के बैनर के तले विशाल प्रदर्शन करेंगे और यही नहीं पंजाब में भी हजारों की संख्या में यहाँ के ऑटो कैब वाले जाकर केजरीवाल जी के झूठ का पर्दाफाश करेंगे। गोवा में जो झूठ बोला है कि ऑटो बोर्ड बनाएंगे, क्या दिल्ली में ऑटो बोर्ड बना है, वहाँ पर भी पर्दाफाश करेंगे। ये सब लोग जाएंगे।

उन्होने आरोप लगाया कि केजरीवाल मल्टीनेशनल कोंपनियों से 35 प्रतिशत तक कमीशन ले रहे हैं। ड्राईवर कैसे गुजारा करेंगे? डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ गए, रेट वही रह गए। एग्रीगेटर का इतना मुनाफा कैसे? केवल एप तो ही प्रोवाइड कर रहा है वो, गवर्मेंट ने कोई एक्शन मल्टीनेशनल कंपनियों के खिलाफ नहीं लिया। जिसकी वजह से तमाम ओला-ऊबर टैक्सियां बंद हो गई हैं। कुछ लोग ओला–ऊबर से निकाल कर प्राइवेट चलाने लगे हैं, कुछ लोगों ने खड़ी कर दी हैं, लोन चढ़ गए हैं उनके ऊपर, इंट्रस्ट पेमेंट नहीं पे कर रहे हैं। ये दिल्ली सरकार का निकम्मापन है या ओला-ऊबर बड़ी-ब़ड़ी कंपनियों से मिले हुए हैं, जिससे पैसेंजर बहुत परेशान हैं। पेसेंजर की जेब कट रही है और पैसेंजर को गुस्सा आता है ऑटो, ओला-ऊबर ड्राइवर के ऊपर, लेकिन उसकी भी मजबूरी है। अब वो उसी सेक्टर में जाना चाहता है, जहाँ पर उसको मुनाफा हो। जैसे घर की तरफ जा रहा है, तो उस सेक्टर की ही सवारी उठाएगा बाकी काट देगा।

श्री किशन वर्मा ने कहा कि वो ड्राइवर जो मनोवैज्ञानिक स्तर पर परेशान है, वो बच्चो को लेकर जाएगा, तो क्या वो बच्चे सुरक्षित होंगे? आज हमारे मनोवैज्ञानिक स्तर पर क्या असर पड़ा है, किसी ने सोचा है? मरने के लिए छोड़ दिया गया दिल्ली में, बड़े-बड़े दावे कर रही है सरकारें। एक बार जाकर माफ किया, ऐसे मदद करेंगे, वैसे करेंगे, हम बेरोजगार नहीं हैं? क्या 23 महीने जो आदमी घर बैठा रहा, आज घर के बर्तन तक बेच-बेच कर हम गुजारा कर रहे हैं, किराए के ऊपर जो लोग मकानों में रहते हैं, उनको भगा दिया गया। दिल्ली छोड़कर स्कूल की लाइनों से लोग जाने लग रहे हैं। क्या हम बेरोजगार नहीं हैं, जो बेरोजगारी का ढोंग किया जा रहा है, कि हम बेरोजगारों को 5,000 रुपए भत्ता देंगे, किसको दिया, हमें दिया? आज तक भी ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने एक बार भी यहाँ तक कि एरिया के एमएलए तक के पास भी समय नहीं है। एमएलए को लिखा हुआ, ये हमारी समस्या चल रही है, हर कोई ये कहता है समस्या आपकी जेनुअन है।

श्री सुमेर रंभावत, सर्वोदय ड्राइवर वैलफेयर एसोसिएशन, अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली एनसीआर में एक अच्छी और साफ-सुधरी कैब सेवा शीला दीक्षित जी के समय पर शुरु की गई थी, जिसको वनआरटी बोलते थे। आज एग्रीगेटर कंपनियों की वजह से जो हमारे साथी हैं, वो मरने की कगार पर आ गए हैं। लोग कहते है कि क्या करें, बच्चों को कैसे पालें? आप कह देते हैं कि लोग वर्क फ्रॉम होम करें, लेकिन हम अपनी साढ़े चार लाख गाड़ियाँ जो आज हैं, उनको अपने घर पर तो चला नहीं सकते। तो इतना बुरा हाल है कि हमारे पास स्पीड के चालान, हमारे पास जो टैक्सियों में जो मीटर लगे हुए थे, जिनको वनआरटी गाड़ी जिनको बोलते थे, उनके पास न कोई स्टैंड है, न कहीं, सिर्फ एग्जीगेटर कंपनियों के सहारे हमें छोड़ दिया गया है। सरकार का कोई मुद्दा नहीं है, पिछले 7 सालों से हम केजरीवाल जी के घर पर जा-जाकर हम इतनी बार बोल चुके हैं, कि हमारे लिए कुछ करो। हम साढ़े चार लाख जो गाड़ियों वाले हैं, वो बिल्कुल भुखमरी की कगार पर आ गए हैं, लेकिन ये आम आदमी पार्टी की सरकार एक पल भर भी टैक्सी वालों की सुनने के लिए तैयार नहीं है। आज ऐसी स्थिति है कि बहुत सारे चालक अपने रोजगार, अपने धंधों को छोड़कर और दूसरी तरफ मूव हो चुके हैं। बहुत से लोगों ने तो अपना दिल्ली शहर छोड़ दिया और ये पंजाब में जाकर, गोवा में जाकर, गुजरात में जाकर बोलते हैं कि हम टैक्सी वालों के लिए करेंगे, लेकिन इन्होंने तो हमें इतना मजबूर कर दिया कि हमें अपना घर छोड़ना पड़ रहा है। अपने बच्चों को यहाँ से ले जाकर गांव में शिफ्ट करना पड़ रहा है। हम लोग वहाँ सेआए थे कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगे, दिल्ली में आकर, लेकिन हमें यहाँ से छोड़कर जाना पड़ रहा है, क्योंकि हम अपने पेट के सहारे अपनी भूख नहीं मिटा सकते।

श्री राकेश चोपड़ा स्कूल एसोसिएशन दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष ने कहा कि आप जानते हो आप लोगों के बच्चे भी लेकर हम लोग गए हैं। 23 महीने से इस सरकार ने हमारी कोई सुध नहीं ली। 23 महीने से हम बिल्कुल बेरोजगार हैं। हमारे साथ हमारे स्कूल में काम करने वाली मेड, दीदी, जो हमारी गाड़ी में जाती थी, जो आपके बच्चों की केयर करती थी, चौकीदार, माली, यहाँ तक हमारी गाड़ी का क्लीनर, वो तक भुखमरी के कगार पर है। आज हमारे साथी जो हैं, कोई बेचारा सब्जी बेच रहा है, कोई ई रिक्शा चला रहा है, कोई दिहाड़ी मजदूरी कर रहा है। आज स्कूल ट्रांस्पोर्ट की ये हालत हो गई है कि अगर अपने आप को हम बेच दें, जब भी हमारे घर में खाने के लिए नहीं है। इस पोजीशन पर दिल्ली सरकार ने ला दिया है। दिल्ली सरकार के मंत्री से समय मांगो, समय नहीं है। कमिश्नर से समय मांगो, बोले, लैटर दो। लैटर दिया, रिमाइंडर दिए, 13-9 तारीख को हमने एक लैटर दिया कि ये हमारी मांगे हैं, कि जैसे ऑटो टैक्सी में डिम्स और शिम्स माफ है, स्कूल कैब की डिम्स, शिम माफ की जाए, फिटनेस फीस माफ की जाए, एमसीडी पार्किंग माफ की जाए, मगर हमारी सुनवाई नहीं हुई। उसके बाद हमने 13 तारीख को रिमाइंडर दिया, वो भी हमारी ऐसे, जैसे रद्दी के पेपर में डाल दिया। हमारी स्कूल कैब वालों की कोई सुनवाई नहीं है। आप लोगों के माध्यम से हम चाहते हैं कि आप हमारी आवाज सरकार तक पहुँचाएं।

श्री उदित राज ने कहा कि चार मेजर सैक्टर के लीडर यहाँ पर हैं। किस तरह से इनके साथ अन्याय हुआ। हम केजरीवाल के झूठ का पर्दाफाश करने आए हैं। पंजाब में जाकर करेंगे, गोवा में करेंगे, उत्तराखंड में करेंगे और 10 तारीख को हम विशाल प्रदर्शन मुख्यमंत्री आवास पर करेंगे। हम मजबूर हैं कि कोविड के दौर में भी हमें ऐसा करना पड़ेगा, क्योंकि इनके बच्चे भूखे मर रहे हैं, किराया नहीं दे पा रहे हैं, तड़प रहे हैं, गांव में भाग रहे हैं, गाड़ियाँ बंद हो रही हैं।

2 COMMENTS

  1. The next time I read a blog, I hope that it doesnt disappoint me as much as this one. I mean, I know it was my choice to read, but I actually thought youd have something interesting to say. All I hear is a bunch of whining about something that you could fix if you werent too busy looking for attention.

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