सपा नेताओं पर पुलिस दमन के मामले में एटा जाएगा सपा का प्रतिनिधिमंडल

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UNA NEWS
UP BUREAU
14 मई 22,

एटा जिले में सपा नेताओं पर पुलिसिया दमन के मामले की जांच के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक जांच टीम गठित की है जो प्रभावित परिवारों से मिलकर जिला प्रशासन से मिलेगा। जनपद एटा में रामेश्वर सिंह यादव पूर्व विधायक एवं जोगेन्द्र सिंह यादव पूर्व अध्यक्ष जिला पंचायत एटा के ऊपर जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा किए गये उत्पीड़न, ग्राम नगला जवाहिर थाना मिरहची में दिनांक 8 मई 2022 को ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुए वाद-विवाद पर पुलिस द्वारा कौशलेन्द्र यादव पुत्र घनेन्द्र सिंह के घर पर की गई तोड़फोड़ एवं ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमे लगाने आदि मामलों की जांच हेतु ग्राम नगला जवाहिर जनपद एटा जायेगा।
प्रतिनिधिमण्डल में प्रदीप यादव विधायक दिबियापुर/पूर्व सांसद समाजवादी पार्टी, असीम यादव पूर्व सदस्य विधान परिषद, उ0प्र0, इं0 बृृजेष कठेरिया0 विधायक किशनी समाजवादी पार्टी, सचिन यादव विधायक जसराना समाजवादी पार्टी, मो0 फहद राष्ट्रीय अध्यक्ष समाजवादी युवजन सभा, सुश्री नेहा यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष समाजवादी छात्र सभा, परवेज जुबेरी जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी एटा शामिल होंगे।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना खटाई में गेंहूँ खरीद भी लक्ष्य से बहुत पीछे

अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार के गरीब और किसान हितैषी होने के झूठे दावों की पोल खुल गई है। चुनाव से पहले किसानों की आय दुगनी करने, उनका सम्मान करने तथा गरीबों के चूल्हें ठण्डे न होने देने के बड़े-बड़े एलान किए गए थे।

अखिलेश ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेवाई) में गेहूं का कोटा रद्द करने का निर्णय हो गया है। जून महीने से गरीबों को गेहूं की जगह चावल बंटेगा। अभी तक 3 किलो गेहूं और 2 किलो चावल बांटने का ढिंढोरा पीटा जा रहा था। चुनाव खत्म होने के बाद किसानों से सम्मान निधि की राशि वापस किए जाने की नोटिसें जारी हो रही हैं।

भाजपा ने इस बार गेहूं खरीद में किसानों के हितों के ऊपर उद्योगपतियों के लाभ को प्राथमिकता दी गई। गेहूं की सरकारी खरीद की जगह 5 बड़ी कम्पनियों को गेहूं बिकवा दिया गया। उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीद का लक्ष्य 60 लाख मीट्रिक टन था जबकि मात्र 2.35 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई। खरीद केन्द्र पर कम खरीद के अलावा गेहूं उत्पादन कम होने की भी खबर है। इसके परिणाम स्वरूप बाजार में आटा और महंगा होगा। इससे बड़े उद्योगपतियों और उनकी कम्पनियों का मुनाफा बढ़ेगा।

वस्तुतः भाजपा की मंशा किसानों को फायदा पहुंचाने की न कभी थी, और न है। अगर गेहूं का लाभकारी मूल्य देना चाहती तो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कम से कम 2500 रुपए प्रति कुंतल होना चाहिए था। सरकारी क्रय केन्द्रों पर किसानों को परेशान किया जाता रहा। आम लोगों की रोटी पर आटा माफियाओं का गैर कानूनी कब्जा होता जा रहा है। भाजपा गरीब को ही मिटाने की चाल चल रही है। भाजपा के आर्थिक एजेण्डे में न किसान है और न गरीब उपभोक्ता। भाजपा अपने जन्मकाल से ही किसान विरोधी रही है।