राजसी वैभव से निकली बादशाह की सवारी

  • रातभर चल लोकसंस्कृति नाट्यमंच, जादुई एवं हैरतअंगेज करतब दिखाए।
  • रविवार रात को बाजार न्हाण लोकोत्सव के बादशाह की महफिल सजेगी जिसमें नृत्यांगनाएं राजसी संगीतों पर नृत्य की प्रस्तुत किए।
  • रविवार तड़के मां भवानी की निकली मनमोहक झांकीयां

कस्बे में रविवार को न्हाण लोकोत्सव के दूसरे दिन न्हाण अखाड़ा चौधरी पाड़ा(बाजार) के बादशाह की सवारी राजसी ठाठ के साथ निकली। बादशाह के जुलूस में शामिल स्वांग दर्शकों को हंसाते निकले, वहीं, डीजे के गानों पर  नृत्य भी युवाओं को आकर्षित करते रहे। न्हाण लोकोसव में रात्री कालीन न्हाण में लुहारों के चौक में स्थित मां ब्रम्हाणी के मंदिर परिसर के समक्ष रात भर स्थानीय कलाकारों द्वारा नाट्य लोकमंच पर रात पर प्राचीन सम्भ्यता पर रचित नाटकों के माध्यम से दर्शकों को गुददाते रहे। वहीं, तड़के देवीदेवताओं की सवारी निकली, जिसे देखने के लिए महिलाओं व पुरूषों काफी तादाद में भीड़ उमड़ पड़ी। रविवार को बादशाह की सवारी रंगनाथ जी मंदिर से नियत समय पर मां ब्रम्हाणी के जयघोष के साथ शुरू हुई।

बादशाह की सवारी (जुलूस) को देखने के लिए नगर की छतों व दुकानों व सवारी मार्ग लोगों से ठसाठस भरे हुए थे। इससे पूर्व न्हाण देखने के लिए ग्रामीण व नगर की महिलाएं मकानों की छतों पर सुरक्षित स्थान पर बैठक कर सवारी का इंतजार करते हुए दिखाईदिए। ज्योंहि न्हाण की सवारी शुरू होते ही स्वांगों द्वारा दर्शकों का मनोरंजन करने लगे। न्हाण में इस बार परंपरागत स्वाग लाए गए। बादशाह की सवारी में स्वांग व उनके पीछे नन्हें बालक घोड़ों पर सवार होकर राजसी वेष में चल रहे थे, इन उमरावों के आगे डीजे के गानों पर कोटा व अन्य शहरों से आए सुन्दर किन्नर भी अपनी नृत्य कलाओं से युवाओं को निहारना युवाओं के दिल की धड़कन बने हुए थे।

वहीं, सवारी में शामिल करीब 3 दर्जन से अधिक राजसी परिधान में सुसज्जित नन्हें-मुन्हें सैनिक घुड़सवार इस शाही लवाजमें की शोभा बढ़ाते हुए निकले। इन उमरावों के बीच परंपरागत राजा केवाट की शूरवीरता के इतिहास को दौराता हुआ सूरा का स्वांग निकला जो दर्शकों का आकर्षण  रहा। लोकोत्सव में बादशाह बने करीब 70 वर्षीय रामबाबू सोनी पालकी पर सवार होकर मुगल बादशाह की तरह रईसी ठाठ से निकले। बादशाह के पीछे पालकी पर बैठे वजीर चंवर हिलाते हुये मुगल सल्तनत की परंपरा निभाते हुये चल रहे थे। बादशाह के आगे राजसी परिवेश में किन्नर नृत्यांगना नृत्य करती चल रही थी तो वहीं दूसरी ओर इस वर्ष बादशाह के पीछे ऊंट पर सवार चारणों का स्वांग भी निकला गया, जो दर्शकों को बादशाह की शूरवीरता का राजस्थानी भाषा में कवित के माध्यम से बखान करते हुए निकले। बादशाह की सवारी रंगनाथजी के मंदिर से शुरू हुई जो लुहारों का चौक, पुराना बाजार से गढ़ पैलेस होती हुई लक्ष्मीनाथ मंदिर के चौक में पहुँची। जहां पर बादशाह का दरबार लगाया गया। बादशाह का दरबार लगने के बाद उत्सव में किरदार निभाने वाले सभी स्वांग एवं अमीर-उमराव बादशाह को सलमी देते हुए निकले।

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दिखाए अनूठे करतब

लोकोत्सव में बादशाह के दरबार में कलाकारों ने जादुई एवं हैरअंगेज करतबों का अनुठे प्रदर्शन किया। कलाकारों ने तलवारें निगली, तो किसी ने शरीर के आर-पार घायलें फोड़ कर दर्शकों के समक्ष प्रदर्शन। …………………………

रातभर चले लोक नाट्य

बादशाह की सवारी से पूर्व रविवार रात्री को रातभर लोक संस्कृति से युक्त हास परिहास जैसे कई रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गई। इसी दौरान बीच-बीच कलाकारों ने जादुई करतबों का भी प्रदर्शन किए। इन कार्यक्रमों के शुरू होने से पूर्व चाचा बोहरा की सवारी निकली जो हास्य चुटकलों से न्हाण का बखान करते हुए ब्रम्हाणी माता के चौक में पहुँचा जहां पर चांदणी के नीचे चाचा बोहरा के ब्याह के मौसाले की रस्म बखूबी से निभाई। तत्पश्चात् कई लोक संस्कृति के नाटकों की प्रस्तुतियां दी गई। इस रात्रि न्हाण को देखने के लिए ग्रामीण व कस्बे के युवक व बुजुर्ग रातभर डटे रहे।

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देवीदेवताओं की झांकीयां निकली

इस रात्री कार्यक्रमों के पश्चात रविवार तड़के माँ भवानी की सवारी में विभिन्न देवी-देवताओं की झांकीयां निकाली। सवारी में ब्रम्हाणी माता के स्वरूप के आगे बुजुर्ग भवानी के जस गाते हुए चल रहे थे। इस दौरान देवताओं की मनमोहक झांकीयों के आगमन पर महिला एवं पुरूषों ने पुष्प वर्षा की। भोपों ने तांत्रिक क्रियाओं जैस मुंह से अग्नि निकानना, जलती हुई जंजीरों को माताजी के भोपों द्वारा अपने हाथों से बुझाकर व दुबरा प्रज्जवलित करते हुए निकले जो दर्शकों के आकर्षक रहे। वहीं, भवानी की सवारी से पूर्व चारपाईयों कलाकारों द्वारा छुर्रे, त्रिशुल से जबान, सीना, पीठ पर खंजरों की  घायले भी मुख्य आकर्षक रही।

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खूब रिझाये दर्शक

वहीं परंपरागत स्वांग गाडोलिया लुहार, जाल फेंकने वाले, सूरा का स्वांग एवं ऊंट पर सवार चारण भाटों का स्वांग जो रजवाड़ों व बादशाह के दरबार में काव्य गाथाओं का बखान कर बादशाह को रिझाने का प्रतिरूप जो आकर्षक रहा, जैसे कई स्वांग निकले।

 

सांगोद में रियासतकाल से आयोजित होने वाले इस न्हाण उत्सव के पहली पारी का लोकोत्सव राजसी ठाठबाठ से बादशाह की सवारी निकलने के बाद न्हाण अखाड़ा चौधरी पाड़ा (बाजार का न्हाण) के न्हाण उत्सव समाप्त हो गया। तथा सोमवार को पड़त(अवकाश) रहेगा तथा ऐतिहासिक न्हाण लोकोत्सव न्हाण अखाड़ा चौबे पाड़ा(न्हाण खाड़ा) के बारहभाले की सवारी 26 मार्च, मंगलवार  व बादशाह की सवारी 27 मार्च, बुधवार को निकाली जायेगी।