राजशाही लवाजमें से निकले बारह भाले

  • स्वांगों ने हास्य व्यंग के कटाक्ष से दर्शकों के खूब लुभाया
  • संगीत के सुरीले स्वर पर जमकर थिरके किन्नर
  • लोकोत्सव पर अधिकारियों की रही नजर

ऐतिहासिक न्हाण लोकोत्सव के नगाड़ों की थाप, सुरिले संगीत की मधुर धुनों व मां ब्रम्हाणी के जयघोष से न्हाण अखाड़ा चौबे  पाड़ा (खाड़ा) के बारह भाले की सवारी राजसी वैभव के साथ निकली। मंगलवार को निकली बारभाले की सवारी बलदाऊजी के मंदिर से करीब सांय करीब 5.30 बजे शुरू  हुई। ज्योंहि न्हाण नगाडे की गड़गड़ाहट शुरू होते ही न्हाण में स्वांग के किरदार निभाते  कलाकारों ने उपस्थित दर्शकों की भीड़ को अपने हास्यं व्यंग के ठहाकों से लुभाना शुरू कर दिया। लोकोत्सव को देखने के लिए ग्रामीण महिला व पुरूषों का हुजुम उमड़ पड़ा। बारहभाले की सवारी में रोचक व लुभावने हास्य व्यंगों की अभिव्यक्ति देते हुये परंपरागत स्वांग निकले।

बारभाले की सवारी में परंपरागत स्वांग में जाल फेंकने वाले व पागल जैसे स्वांग के किरदार करने वाले युवक कलाकार भीड़ का हटाते हुये चल रहे थे। इस लोकोत्सव के स्वांगों में सांठीयों का स्वांग भी रोचक रहा जो दर्शकों को सांठीयों की बोली व सांठीयों की संस्कृति को बखूबी निभा रहे थे। वहीं बेल गाड़ी में गाडोलिया लुहार के चिमटे के साथ लुहारियों की भाषा में हुबहू व्यंग के कटाक्ष करते हुये निकले।

न्हाण में हंसाते चल रहे स्वांगों के बाद नन्हें-मुन्हें बच्चे घोडों पर राजसी परिधान में सजधकर घोड़ों पर अठखेलियां करते हुये निकले। इन्हीं के बीच सेठ-सेठानी का स्वांग जो अपने व्यापार में हुये घाटे(नुकसान) के बारे में मुनिम व सेठानी के साथ मारवाड़ी भाषा में अभिव्यक्ति करते हुये निकले जो दर्शकों के लिये आकर्षक रहा। बारभाले की सवारी होली के दाऊजी के मंदिर, होली चौक से रेती मौहल्ला, जामा मस्जिद से लुहारों का चौक, पुराना बाजार होती हुई उजाड़ नदी के तट पर स्थित प्राकृतिक स्टेडियम न्हाण खाड़ा में पहुंची। जहां, सभी कलाकारों ने मां ब्रम्हाणी की पूजा अर्चना के बाद के शीश झुकाते हुए निकले।

लोकोत्सव में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए जगह-जगह पुलिस के जवान तैनात रहे। संवेदनशील स्थल ब्रह्माणी के चौक में भी पुलिस का जाप्ता तैनात रहा। यहां एसडीएम कमल सिंह यादव, पुलिस उपअधीक्षक रामेश्वर परिहार आदि अधिकारी भी एहतियात के तौर पर मौजूद रहे।

भीड़ से अटी रही छतें

न्हाण की सवारी देखने लोगों की खासी भीड़ उमड़ी। सवारी मार्ग पर मकानों एवं दुकानों की छतें लोगों से ठसाठस भरे रही। मार्ग पर भी भीड़ के चलते स्वांगों को आयोजन में खासी मशक्कत हुई। सवारी शुरू होने के कई घंटों पहले ही महिलाएं न्हाण देखने आ पहुंची। कईं लोगों को बैठने की जगह नहीं मिलने से घंटों तक खड़े रहकर न्हाण का लुत्फ उठाना पड़ा।

जमकर लगाए किन्नरों ने ठुमके

सवारी में बैंडबाजे पर बजते ल्यो जी थांकी कूंच्या मुं तो सांगोद जारी छुं, न्हाण भरयो छ खाड़ा को मुं देख आउली…, बोल शंकरया रे.., नगीनों म्हारों गुम ग्यो रे… जैसे राजस्थानी पारम्परिक गीतों के साथ हिन्दी रिमेक्स गीतों पर भी युवाओं ने जमकर ठुमके लगाए। किन्नरों ने अपनी नृत्य अदाओं से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। इससे पूर्व दोपहर को यहां किन्नरों ने मां ब्रह्माणी की पूजा अर्चना भी की।

पारपंरिक निकले स्वांग

इस बार सवारी देखने आए लोग मनोरंजक स्वांगों को देखने को तरस गए। परम्परागत स्वांगों के सिवाय नयापन के नाम पर सवारी में कुछ खास देखने को नहीं मिला। कोड़े मारते युवाओं के स्वांग ज्यादा रहे। लुहार परिवार के साथ सांटियों की लड़ाई, फकीर, लेला-मजनू, सेठ-सेठानी, भीड़ को हटाने के लिए कोड़े बरसाते युवक जैसे परम्परागत स्वांगों के साथ डीजल में सने युवाओं को कोड़े मारते स्वांग अधिक रहे। पालिका के कर्मचारियों ने स्वांग के जरिए मतदाता जागरूकता का संदेश दिया। शिवाजी, सैनिक, रानी लक्ष्मी बाई बने बच्चों ने लोगों का ध्यान खींचा।

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होगी मेहमान नवाजी

इस उत्सव को देखने के लिये हाड़ौती क्षेत्र से कस्बे के प्रत्येक परिवार व समाज के घरों में आने वाले मेहमानों यहां के लोग सत्कार के साथ आमंत्रित करते है। यहां देखने में आया है कि यह उत्सव कई परिवारों आज भी शादी-ब्याह के अटूट रिश्तें जोड़ने में भी सहायक रहा है।

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बादशाह की सवारी आज, सजेगी महफिल

कस्बे में विख्यात न्हाण लोकोत्सव न्हाण अखाड़ा चौबे पाडा (खाड़ा) के बादशाह की सवारी निकलेगी। इस दौरान कई जादुई कारनामें एवं अजब-गजब करतबों का प्रदर्शन होगा। इसके बाद बुधवार को न्हाण बादशाह की ओर महफिल भी सजाई जायेगी।