राजशाही ठाठ से निकली बादशाह की सवारी

  • नगाड़ों एवं लोक संस्कृति का आ शोर शराबा थम गया
  • जादुई एवं हैरतअंगेज करतब दिखाए
  • कलाकारों ने निगली तलवारे।
  • रातभर चला लोकसंस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों का नाट्यमंच

कस्बे में बुधवार को न्हाण लोकोत्सव के नाम से प्रसिद्ध न्हाण अखाड़ा चौबे पाड़ा (खाड़ा न्हाण) के बादशाह की सवारी स्वांगों की मौजमस्ती एवं शाहीठाठ से निकली। न्हाण उत्सव से नगर में मेले जैसा माहौल रहा। इसी के साथ न्हाण अखाड़ा चौबे पाड़ा के बादशाह की सवारी के बाद पांच  दिवसीय न्हाण लोकोत्सव की धूम का समापन हो गया। न्हाण को देखने के लिए ग्रामीणों एवं बाहर से आये दर्शकों का हुजूम उमड़ पड़ा।
न्हाण अखाड़ा चौबे पाड़ा के बादशाह की सवारी माँ ब्रम्हाणी के जोशीले जयघोष, नगाड़ों की गडगडाहट एवं शहनाईयों के सुरीली ताल के साथ सांय करीब 5 बजे चैतन्य हनुमान मंदिर से शुरू हुई। बादशाह की सवारी के आगे विचित्र वेशभूषा में स्वरचित स्वांग अपने हास्य व्यंगों से दर्शकों का मनोरंजन करते हुए निकले। बादशाह की सवारी के आगे करीब 3 दर्जन से अधिक राजसी परिधान में सुसज्जित नन्हें-मुन्हें बालक भी घोडे पर अटखेलियां करते हुए निकले। इन अमीर-उमरावों के बीच पेट में भाले को आर-पार कर राजा केवट की याद में सूरा का स्वांग निकाला गया, जो दर्शकों का आकर्षण रहा। बादशाह हाथी पर सवार होकर मुगल बादशाह की तरह रईसी ठाठ से निकले। बादशाह के पीछे पालकी पर बैठे वजीर बादशाह के चंवर हिलाते हुए निकले। बादशाह के पीछे ऊंट पर सवार होकर राजशाही वेश में दर्शकों को कवित सुनाते हुए निकले।
बादशाह की सवारी शुरू होने से पूर्व ग्रामीणों एवं नगर के महिला एवं पुरूषों ने बाजार की दुकनों एवं छज्जों पर सुरक्षित स्थान पर बैठ गए। बादशाह की सवारी चैतन्य हनुमान जी के मंदिर से शुरू हुई जो गांधी चौराहा, पुराना बाजार से गढ़ पैलेस होती हुई लक्ष्मीनाथ मंदिर से प्राकृतिक स्थल नहाण खाड़ा स्थल पहुँची। जहां पर बादशाह का दरबार सजाया गया। बादशाह का दरबार लगने के बाद उत्सव में किरदार निभाने वाले सभी स्वांग एवं अमीर-उमराव बादशाह को सलामी देते हुए निकले।
बादशाह के इस दरबार में कई जादुई कारनामें एवं हैरतअंगेज कारनामों का प्रदर्शन किया। कलाकारों ने तलवारें निगली, तो किसी ने शरीर के आर-पार घायलें फोड़ कर दर्शकों के समक्ष प्रदर्शन किया। उधर जमीन से करीब 45 फीट की ऊँचाई से हनुमान उड़ान का करतब दिखाते हुए सीने के बल आग के गोले में होता हुआ रस्से से नीचे रसकना, बृज पर घूमना जैसे कई करतब दिखाए, जिसे देख दर्शक अचंभित रह गए।
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रातभर हुए रंगारंग कार्यक्रम

बादशाह की सवारी से पूर्व मंगलवार रात्री को रातभर लोकसंस्कृति से युक्त हास परिहास से भरपूर रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गई। इस लोक नाट्य रंगमंच का आयोजन रातभर चला जिसे देखने के लिए दर्शक रात भर जमें रहे। वहीं, सांगोद के न्हाण लोकोत्सव का इतिहास भी इसी रंगमंच पर पढ़कर सुनाया गया। रंगमंच पर चाचा बोहरा की शादी व मौसाले जैसे कई सामाजिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गई। इन कार्यक्रमों के शुरू होने से पूर्व चाचा बोहरा की सवारी निकली जो हास्य चुटकलों से न्हाण का बखान करता हुआ ब्रम्हाणी माता के चौक में पहुँचा, जहां चाचा बोहरा के कवित इस तरह रहे – मारू थारा देश में नब्जे तीन रत्न, एक ढोला, दूजा मरवण, तीजा कचुमल

लाखरो धन मोखलो घर में छदाम करू, बोहर गत आपसु लिखबो झुठो काम सोना हीरा का हार,बेशकीमती चुन्दडी पायजेब,मेवाड़ देश का बोहरा हुँ। ब्रम्हाणी माता रो प्रताप और दाऊजी रो प्रताप यह तो ब्रम्हाणी माता के लिए लाया हु। न्हाण खाड़ा अखाडा चौबे पाड़ा में व्यापार करने यहाँ आया हुँ… इत्यादि अनेक रंगारंग एवं हास्य युक्त कार्यक्रमो की प्रस्तुतिया दी गयी।
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देवीदेवताओं की झांकीयां निकली

नगर में बुधवार तड़के माँ भवानी की सवारी में विभिन्न देवी-देवताओं की झांकीयां निकाली गई। इस दौरान देवताओं की मनमोहक झांकीयों के आगमन पर पुष्प वर्षा की गयी।