सासाराम

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सासाराम संसदीय क्षेत्र से महागठबंधन प्रत्याशी व कांग्रेस नेत्री मीरा कुमार ने भगवानपुर व भभुआ के कई गांवों में जाकर वहां के महिला-पुरुष ग्रामीणों से मिलीं और अपने पक्ष में वोट देने की उनसे अपील की। उन्होंने अपने कार्यकाल में क्षेत्र का किए गए विकास व कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों गिनाकर लोगों से कहा कि देश में मजबूत सरकार के लिए कांग्रेस को जिताइए विकास होगा। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि दूसरों की तरह मैं झूठा वादा नहीं करती। मैं यहां की बेटी हूं और कोई बेटी अपने अभिभावकों से झूठा वादा कैसे कर सकती है।

उन्होंने कहा कि आपकी बदौलत ही हम और हमारे पिताजी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए विकास करते रहे हैं। देश में सासाराम संसदीय क्षेत्र का नाम रौशन होते रहा है। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप मुझे भारी बहुमत से जीताकर संसद में भेजेंगे। वह बेतरी, मोकरी, औसान, नीबी, पहड़िया, रामगढ़, सरैयां, मसहीं, भगवानपुर, कसेर, टोड़ी, मोहनपुर, राधाखांड़, बसंतपुर, पतरिहां, दवनपुर, जैतपुर कला, मोकरम, सिंघी, घोंसा, चाकेडिहरा, बहुरी, पड़री, पिहरा, मरची, राजपुर, परमालपुर, पढ़ौती, महेंदवार, ददरा, कोचाड़ी, कोशडिहरा गांवों में गई थीं। उनके साथ काफी संख्या में कार्यकर्ता थे।

चुनावी चहलकदमी के बीच वोट की सेटिंग में जुटे राजनीतिक दलों को नोटा के सोटा की चिंता सता रही है। सियासी दलों के जेहन में यह सवाल कौंध रहा है कि नोटा कहीं उनके वोट बैंक में सेंध न लगा दे। विभिन्न दलों की सभाओं में नेताओं की बड़बोली एवं बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे लोगों के दिलोदिमाग में नोटा ने भी अपनी जगह बना ली है। यही कारण है कि वर्ष 2014 में संपन्न लोकसभा चुनाव में सासाराम संसदीय क्षेत्र में 13397 लोगों ने नोटा का बटम दबाकर अपना विरोध जताया था। तब भाजपा, कांग्रेस, जदयू व बसपा प्रत्याशी के बाद नोटा पांचवें नंबर पर था।

सूत्रों की माने तो इस बार के लोकसभा चुनाव में भी नोटा का प्रयोग हो सकता है। हालांकि प्रशासन मतदान प्रतिशत बढ़ाने की कवायद को तेज कर दिया है। भारत निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2013 में विकल्प के रुप में नोटा की शुरुआत की है। अगर मतदाताओं को किसी पार्टी व उम्मीदवार को पसंद नहीं करते हैं या वह समस्याओं को लेकर विरोध करना चाहते हैं लेकिन वोट भी देना चाहते है तो ऐसे लोग विकल्प के रुप में नोटा का बटम दबाते हैं। इसलिए आयोग ने इवीएम में 16 वें नंबर पर नोटा का स्थान सुरक्षित किया है। चुनावी चहलकदमी के बीच विभिन्न मुद्वों को लेकर आम मतदाताओं में पक्ष-विपक्ष के प्रति नाराजगी देखने को मिल रही है।

चेनारी के वोटरों ने अधिक दबाया था नोटा

भभुआ। पिछले लोकसभा चुनाव में 13397 लोगों ने नोटा का बटन दबाया था। चेनारी विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने सबसे अधिक नोटा बटम का इस्तेमाल किया था। जबकि नोटा का बटम दबाने में सासाराम के मतदाता दूसरे नंबर पर रहे। चेनारी में 2676 व सासाराम विधानसभा क्षेत्र में 2304 वोटरों ने नोटा बटन का प्रयोग किया था। इसके अलावा मोहनियां विधानसभा में 2020, भभुआ में 2095, चैनपुर में 2126 व करहगर विधानसभा क्षेत्र में 2156 लोगों ने नोटा का बटम दबाकर अपना विरोध जाहिर किया था। सर्विस वोटरों ने भी नोटा का साथ नहीं छोड़ा। दो सर्विस वोटरों ने भी नोटा का बटम दबाया था।

राजनीतिक दलों में हो रही नोटा की चर्चा

भभुआ। चाय की चुस्की पर नेताओं व आम लोगों को नोटा पर चर्चा करते सुना जा रहा है। मंगलवार की सुबह करीब आठ बजे शहर के एकता चौक के पास एक चाय की दुकान पर विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को आपस में यह बात करते सुना गया कि अगर नोटा पर अधिक वोट पड़ा तो समीकरण गड़बड़ा सकता है। कार्यकर्ताओं की इस चर्चा के बीच वहां पर मौजूद कुछ मतदाताओं ने भी अपना विचार व्यक्त किया। मतदाताओं का कहना था कि सरकार चाहे किसी की बने सभी अपने फायदे के बारे में ही सोच रहे है। सिर्फ चुनाव के दौरान ही नेता विकास की घेषणा करते हैं।