सिब्बल बोले- कांग्रेस में दोबारा उभार देश की जरूरत, लेकिन पार्टी को दिखाना होगा कि वह एक्टिव है

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नई दिल्ली; कांग्रेस के सीनियर लीडर कपिल सिब्बल ने पार्टी को बुरे वक्त से उबारने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस में दोबारा उभार देश की जरूरत है। इसके लिए पार्टी को भी यह दिखाने की जरूरत है कि वह एक्टिव है और सार्थक रूप से जुड़ना चाहती है।
सिब्बल ने रविवार को कहा कि पार्टी संगठन के चुनाव जल्द कराए जाने चाहिए। केंद्र और राज्यों के स्तर पर बड़े सुधारों की जरूरत है, ताकि हम यह दिखा सकें कि पार्टी अब जड़ता की स्थिति में नहीं है। देश में राजनीतिक विकल्प का अभाव है। इसलिए इस समय एक मजबूत और भरोसेमंद विपक्ष जरूरी है। कांग्रेस में अनुभव और युवाओं के बीच संतुलन बनाने की तुरंत जरूरत है।
पार्टी में सुधारों के पक्षधर हैं सिब्बल
सिब्बल कांग्रेस नेताओं के G-23 ग्रुप के मुखर सदस्यों में से एक हैं, जिसने संगठन में सुधार की मांग करते हुए पार्टी की टॉप लीडरशिप को चिट्‌ठी लिखी थी। तब राहुल गांधी ने चिट्ठी लिखने वाले नेताओं को BJP का मददगार बता दिया था। इन नेताओं में गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा जैसे गांधी परिवार के करीबी रहे नेता भी शामिल हैं।
पहले भी सवाल उठा चुके हैं सिब्बल
बिहार चुनाव के बाद सिब्बल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि बिहार और उप-चुनावों के नतीजों से ऐसा लग रहा है कि देश की जनता कांग्रेस को प्रभावी विकल्प नहीं मान रही है। गुजरात उपचुनाव में हमें एक सीट नहीं मिली। लोकसभा चुनाव में भी यही हाल रहा था। उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में कुछ सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों को 2% से भी कम वोट मिले।
सिब्बल का कहना था कि पार्टी ने इसके बाद भी आत्ममंथन नहीं किया तो अब इसकी उम्मीद कैसे कर सकते हैं? हमें कमजोरियां पता हैं, यह भी जानते हैं संगठन के स्तर पर क्या समस्या है। शायद समाधान भी सबको पता है, लेकिन इसे अपनाना नहीं चाहते। अगर यही हाल रहा तो पार्टी को नुकसान होता रहेगा। कांग्रेस की दुर्दशा से सबको चिंता है।
जितिन प्रसाद ने छोड़ा साथ
यूपी में कांग्रेस के बड़े नेता और राहुल गांधी के करीबी रहे जितिन प्रसाद हाल में BJP का दामन थाम चुके हैं। कांग्रेस में जितिन का कद काफी बड़ा था। वह केंद्र की मनमोहन सरकार में मंत्री रहे। हाल में पश्चिम बंगाल और अंडमान निकोबार के प्रभारी रहे। पार्टी छोड़ने के बाद उन्होंने कहा था कि बाकी दल व्यक्ति विशेष और क्षेत्र के हो गए हैं।
आपसी लड़ाई में कमजोर हो रही कांग्रेस
2018 में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़, पंजाब और मध्यप्रदेश में सरकार बनाई तो लगा था कि पार्टी फिर पुराने रौब में लौट रही है। इसके बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस के बड़े चेहरों में शुमार ज्योतिरादित्य सिंधिया की पार्टी से बगावत ने सरकार गिरा दी। सिंधिया अब BJP में हैं।
पंजाब में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच खींचतान चल रही है। अमरिंदर नवजोत सिंह सिद्धू को पटियाला से उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती तक दे चुके हैं।
इसी तरह छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के बीच पावर पॉलिटिक्स का मसला चल रहा है।
राजस्थान में सचिन पायलट की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से नहीं पट रही है। पिछले साल उनकी बगावत के बाद हुई सुलह की वजह से पायलट 18 विधायकों के साथ लौटे थे। पायलट के मुताबिक, तब उनसे किए गए वादे अब भी पूरे नहीं हुए हैं। बताया जाता है कि उनके समर्थक विधायकों को भी तोड़ने की कवायद जारी है।
हाल में हुए चुनावों में कांग्रेस का हाल
हाल में 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में एक भी जगह कांग्रेस को बड़ी कामयाबी नहीं मिली। बंगाल में तो उसे एक भी सीट नहीं मिली। असम में पार्टी को भाजपा गठबंधन के सामने लगातार दूसरी बार हार झेलनी पड़ी। केरल में वह सत्ताधारी लेफ्ट फ्रंट से पार नहीं पा सकी। तमिलनाडु में कांग्रेस सरकार में है, लेकिन वहां बड़ी पार्टी DMK है।