सिविल कोर्ट परिसर में पैकिंग मशीन से वेलफेयर टिकट नहीं मिलने से निबंधन कार्यालय रजिस्ट्रार शक के दायरे में

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अधिवक्ता संघ ने उठाए सवाल

विनोद कुमार ‌राम
भभुआ- जिले के सभी महत्वपूर्ण कार्यालयों में सिविल कोर्ट के माध्यम से जमानत, आवेदन, नकल, इंदिरा आवास, जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र या सरकारी नौकरियों में किसी भी प्रकार के प्रमाण पत्र में वेलफेयर एवं अफडीयूट अनिवार्य होता है। मात्र सिविल कोर्ट भभुआ के प्रांगण में पैकिंग मशीन लगाए गए जन भावनाओं के ऊपर खरा नहीं उतरने के कारण टिकट ब्लैकमलिंग में महंगी दरों पर ऑफडीयूट कराने के लिए बाध्य होते हैं। संघ के अध्यक्ष दिलीप सिंह, महासचिव ओम प्रकाश, संयुक्त सचिव मंटू पांडे ने निबंधन कार्यालय के रजिस्टर से इस संबंध में निराधार के लिए ठोस उपाय उठाने का सुझाव दिया है। ज्ञात हो कि सिविल कोर्ट परिसर में पैकिंग मशीन के माध्यम से निकलने वाले वेलफेयर मशीन खराब होने के नाम पर कई दिनों तक ठप रखा जाता है। पैकिंग मशीन के ठेकेदार के द्वारा सरकार की राशि नियमित जमा नहीं करने के कारण टिकट निकालने में भारी पैमाने पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ठेकेदार के माध्यम से दलाल किस्म के लोग से मिलजुल कर महंगी दरों पर ब्लैक मेलिंग में महंगे दरों पर गोरखधंधा बड़े पैमाने पर बद से बदसूरत जारी है। कैमूर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए हुए पीड़ित परिजनों को 300 से लेकर ₹500 तक खर्च वहन करना पड़ता है। जबकि ₹125 का ही टिकट लगता है।न्याय प्रक्रिया से जुड़े हुए अधिवक्ताओं को आप ड्यूटी करने में बड़े पैमाने पर किल्लत झेलना पड़ता है। सवाल ये उठता है कि न्यायालय परिसर में ही न्याय संगत करने वाले व्यक्तियों के साथ धोखा घड़ी होता है तो आम जनों की क्या हालत होगी। पैकिंग मशीन में निबंधन कार्यालय की राजस्व की जिम्मेदारी बनती है। टिकट के अभाव में आम जनों को दर-दर ठोकरें खाने पड़ती है लाचार विवश होकर उन दलालों के माध्यम से महंगी दरों पर अपने कार्य को अंजाम देते हैं और रोते बिलखते अपने घर की ओर लौट जाते हैं। जिला अधिवक्ता संघ बार-बार शिकायत मिलने पर निबंधन कार्यालय के रजिस्टार पर कानून रूप से प्रभाव दिखाया है।

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