सिविल सेवा परीक्षा में चमके संगमनगरी के मेधावी, टॅाप 100 में 3 प्रयागराज से

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नईदिल्ली; संघ लोक सेवा आयोग की ओर से शुक्रवार को जारी सिविल सेवा परीक्षा 2020 के परिणाम में संगमनगरी के मेधावियों ने सफलता हासिल की। शाश्वत त्रिपुरारी ने 19वीं रैंक, सृजन वर्मा ने 39वीं तो वहीं अपूर्वा त्रिपाठी ने 68वीं रैंक हासिल कर शहर को गौरवान्वित किया।आईआईटी दिल्ली से 2018 में बीटेक करने वाले शाश्वत का चयन सिविल सेवा परीक्षा 2019 में आईपीएस के लिए हुआ था और वे फिलहाल हैदाराबाद में ट्रेनिंग कर रहे हैं। सिविल सेवा परीक्षा 2019 में शाश्वत की बड़ी बहन सोनाली का भी चयन हुआ था। साउथ मलाका के रहने वाले शाश्वत के पिता शरद चन्द्र मिश्र दूरदर्शन महानिदेशालय दिल्ली में उप महानिदेशक के पद पर तैनात हैं। प्रयागराज में निदेशक रह चुके हैं। वहीं मां पूनम मिश्रा यूपी भवन में मुख्य वित्त अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। सेंट जोसेफ कॉलेज से 2014 में 95.2 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं करने वाले शाश्वत का चयन आईआईटी में हो गया था। सृजन ने पहले प्रयास में ही लहराया सफलता का परचम
सृजन वर्मा को पहले प्रयास में ही 39वीं रैंक मिली है। सेंट जोसेफ कॉलेज से 2012 में 93 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने आईएसएम धनबाद से 2017 में बीटेक किया। उसके बाद 2018 से दिल्ली में रहकर सिविल सेवा की कोचिंग करने लगे। 2018 में इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस में उन्हें ऑल इंडिया तीसरी रैंक मिली थी। उसके बाद ट्रेनिंग से छुट्टी लेकर आईएएस की तैयारी करने लगे। इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस के तहत रेलवे में चयन हो चुका है और फिलहाल इनकी ट्रेनिंग महाराष्ट्र में चल रही है। खाली समय में चेक, बैडमिंटन और क्रिकेट खेलना पसंद करते हैं। आरकेपुरम करबला के रहने वाले सृजन के पिता नीरज वर्मा उत्तर मध्य रेलवे मंडल विद्युत अभियंता के पद से पिछले महीने सेवानिवृत्त हुए हैं। मां अनुपमा किदवई मेमोरियल गर्ल्स इंटर कॉलेज हिम्मतगंज में शिक्षक हैं। बड़ी बहन अरुनी वर्मा आर्मी अस्पताल दिल्ली में सर्जरी से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं। अपूर्वा त्रिपाठी को मिली 68वीं रैंक
अपूर्वा त्रिपाठी ने 68वीं रैंक हासिल की है। उन्हें दूसरे प्रयास में सफलता मिली है। मुख्य परीक्षा में उनका वैकल्पिक विषय भूगोल था। इससे पहले आईएएस 2019 की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता मिली थी। 25 साल की उम्र में देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करने वाली अपूर्वा ने बताया कि उन्होंने कोई कोचिंग नहीं की थी। वाईएमसीए सेंटेनरी स्कूल एंड कॉलेज से 2013 में 84 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं करने के बाद उन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से 2018 में बीटेक किया। उसके बाद अगस्त 2018 से घर पर रहकर सिविल सेवा की तैयारी करने लगीं। उनके पिता दिनेश त्रिपाठी सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता हैं। मूलरूप से गोरखपुर की बांसगांव तहसील के मलांव गांव के निवासी दिनेश त्रिपाठी वर्ष 2000 से प्रयागराज में गंगानगर राजापुर में रह रहे हैं। मां सीमा त्रिपाठी गृहणी हैं। छोटी बहन अंजली बीएससी और छोटा भाई अनिमेष बीटेक कर रहा है। सात माह में तीन सफलता
अपूर्वा त्रिपाठी ने महज सात महीने में तीन बड़ी सफलता हासिल की है। इसी साल 17 फरवरी को घोषित पीसीएस 2019 के परिणाम में उनका चयन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ था। उसके बाद 12 अप्रैल को जारी पीसीएस 2020 के रिजल्ट में एआरटीओ के पद पर सफलता मिली। अब आईएएस के परिणाम में 68वीं रैंक ने मन की मुराद पूरी कर दी।
पेपर पैटर्न जरूर देखें
प्रतियोगी छात्रों को अपूर्वा त्रिपाठी ने सलाह दी है कि जिस परीक्षा की भी तैयारी कर रहे हैं उसके पूर्व के वर्षों के प्रश्नपत्रों को जरूर देखें। सामान्य अध्ययन के लिए एनसीईआरटी और रिफरेंस बुक के अलावा करेंट अफेयर्स के लिए वेबसाइट के कंटेट को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करें। टेस्ट सीरीज ज्वाइन करने से पेपर लिखने में मदद मिलती है क्योंकि लिखने की प्रैक्टिस होना जरूरी है।