सुषमा स्वराज नहीं रही इस तरह से उनका एकदम दम तोड़ना असहज लगता है

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सुषमा स्वराज नहीं रही इस तरह से उनका एकदम दम तोड़ना असहज लगता है

शायद जल्दी ही लोग इस शख्सियत को भूल जाये, परंतु अपने भाषण में सम्मोहक और अभिव्यक्ति में अभिव्यंजना की अतिरेक बानगी के लिए वो सदैव याद की जाती रहेगी। उसके उसी गुण से बहुधा लोग उसके आकर्षण से खिंचे चले आते थे। समाजवाद की दहलीज से कदम रखकर नव-पूंजीवाद और उस परिवेश में पुराने सामंती ढांचे के संबंधों की नव-व्याख्या के लिए उसको भुलाया नहीं जा सकेगा। जिस से दक्षिणपंथी व्यवस्था और विचारों को मजबूत बल मिला और उसको कंधा देंने वाली यह एक बहुत बड़ी सार्थक शख्सियत थी। राजनीति में पूरी तरह से मंजी हुई तेज तर्रार नेता का जाना बीजेपी के लिए बहुत बड़ी कमी पैदा करेगा, शायद ही वह जगह भरी जा सके। दिवंगत को नमन।