सेनारी नरसंहार के आरोपितों के बरी होने पर गरमाई बिहार की सियासत, सुशील मोदी ने पूछा 34 लोगों की हत्‍या का गुनाहगार कौन

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पटना, राज्य ब्यूरो। बिहार के सेनारी नरसंहार के दोषियों के बरी होने के बाद सियासत गरमा गई है। भाजपा और जदयू ने राजद को इस मामले में आड़े हाथों लिया है। राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सेनारी नरसंहार मामले में 34 लोगों के नरसंहार के सभी आरोपियों का हाईकोर्ट से बरी हो जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। जब 34 लोगों का संहार हुआ तो आखिर कोई तो गुनहगार होगा? हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के निर्णय के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। कहा, राजद को बताना चाहिए कि यह नरसंहार किसके कार्यकाल में हुआ था? सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सेनारी नरसंहार की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वालों में मैं था और अपनी आंखों से लाशों के ढेर को देखा था। क्रूरता के नंगे नाच के आगे मानवता शर्मसार थी।
बता दें कि पटना हाईकोर्ट ने गत 21 मई को सेनारी नरसंहार के 13 दोषियों को बरी कर दिया। जहानाबाद जिला अदालत ने 18 नवंबर 2016 को इनमें से 10 अभियुक्‍तों को फांसी और 3 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी।
रणवीर सेना और एमसीसी को लड़ाने का राजद पर आरोप
उन्होंने कहा कि आखिर क्या कारण था कि 2005 के पहले बिहार में जातीय हिंसा चरम पर थी। नरसंहारों का तांता लगा हुआ था। लक्ष्मणपुर बाथे में 58, शंकर बिगहा और बथानी टोला में 22-22 और वहीं, मियांपुर में 35 दलित गाजर-मूली की तरह काटे गए थे। 2005 के बाद एनडीए के 15 साल के कार्यकाल में एक भी नरसंहार नहीं हुआ।
दरअसल राजद एक साथ रणवीर सेना और एमसीसी को संरक्षण व मदद देता था ताकि समाज में जातीय तनाव पैदा कर वह अपनी राजनीतिक रोटी सेंकता रहे। रणवीर सेना व एमसीसी को सरकार का वरदहस्त प्राप्त था। दोनों को आपस में लड़ा कर राजद 15 साल तक राज करता रहा।
सेनारी के मृतकों का कोई तो कातिल होगा : नीरज
जदयू के विधान पार्षद नीरज कुमार ने हाईकोर्ट द्वारा सेनारी नरसंहार के अभियुक्तों को बरी किए जाने के बाद राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के निर्णय को स्वागत योग्य बताया । उन्होंने कहा कि मृतकों को न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार का कदम तारीफ के लायक है। आखिर सेनारी के मृतकों का कोई तो कातिल होगा। उन्हेंं न्याय दिलाना राज्य सरकार का कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि लालू-राबड़ी के शासन में जानमाल की सुरक्षा का प्रबंध नहीं था। केस की विवेचना सही ढंग से नहीं की जाती थी। अभियुक्तों की शिनाख्त तक नहीं करवाई जाती थी। एक के बाद एक नरसंहार होते रहे पर तत्कालीन सरकार कान में तेल डालकर सोई रही।
सेनारी नरसंहार में पहचान परेड नहीं करवाना तत्कालीन राजद-कांग्रेस सरकार की साजिश : भाजपा
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मनोज शर्मा ने सेनारी नरसंहार के सभी आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में पटना उच्च न्यायालय द्वारा बरी किए जाने पर इसे तत्कालीन सरकार की साजिश का परिणाम बताया है।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार द्वारा उस समय ही इस मामले को कमजोर बना दिया गया था। कहा कि इस मामले में थाना में पहचान परेड ही नहीं करवाया गया, जिसका लाभ आरोपियों को अदालत में मिला।
पूर्व विधायक ने कहा कि 18 मार्च 1999 में सेनारी गांव को घेर कर निर्मम तरीके से 34 लोगों की हत्या कर दी गई थी! 19 मार्च को प्राथमिकी दर्ज की गईं।
उन्होंने कहा कि पहले प्राथमिकी में 16 आरोपी बनाए गए थे। इसके बाद उसी साल फर्स्‍ट रिपोर्ट 16 जून को दी गई जिसमें 56 आरोपी और 82 गवाह के नाम दर्ज किए गए। इसके बाद सप्लीमेंटरी चार्जशीट 27 अक्टूबर 1999 को जमा की गई जिसमें एक आरोपी बनाया गया। इसके बाद दूसरा चार्जशीट 20 फरवरी 2000 में जमा की गई जिसमें 19 एडिशनल को जोड दिया गया। फिर तीसरी चार्जशीट 05 मई 2000 में दाखिल की गई जिसमें फिर एक व्यक्ति को आरोपी बनाया गया। कुल मिलाकर इस मामले में 77 आरोपी बनाए गए ।