स्वच्छ बेटियाँ स्वच्छ समाज कार्यक्रम के तहत माहवारी स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम -2020 संपन्न

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पटना,17 फरवरी। आज पटना नगर निगम के नूतन राजधानी अंचल के वार्ड नम्बर- 27 में स्वच्छ बेटियाँ स्वच्छ समाज कार्यक्रम के तहत माहवारी स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम -2020 संपन्न हुआ।इस कार्यक्रम में सक्रिय योगदान एसोसिएशन ऑफ एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया वीमेन एसोसिएशन,कल्याणमयी संस्था, नव आस्था फाउंडेसन,Being Helper संस्था आदि का रहा।

काठपुल मंदिरी, पटना के पास माहवारी स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम 2020 आयोजित की गयी। बताया गया कि सर्वप्रथम 2014 में जर्मनी के ‘वॉश यूनाइटेड’ नाम के एक एनजीओ ने मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाने की शुरूआत की थी। इस दिवस को मनाने के लिए 28 तारीख को इसलिए चुना गया क्योंकि आमतौर पर महिलाओं के मासिक धर्म 28 दिनों के भीतर आते हैं। इस दिवस का उद्देश्य समाज में फैली मासिक धर्म संबंधी गलत अवधारणाओं को दूर करना और महिलाओं और किशोरियों को माहवारी प्रबंधन संबंधी सही जानकारी देना है।

कल्याणमयी संस्था की ओर से आशा ने कहा कि मासिक धर्म को माहवारी, रजोधर्म, मेंस्ट्रुअल साइकिल, एमसी या पीरियड्स के नाम से भी जाना जाता है। जब कोई लड़की किशोरावस्था में पहुंचती है तब उसके अंडाशय इस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्ट्रोन नामक हार्मोन उत्पन्न करने लगते हैं। इन हार्मोन की वजह से हर महीने में एक बार गर्भाशय की परत मोटी होने लगती है। कुछ अन्य हार्मोन अंडाशय को एक अनिषेचित डिम्ब उत्पन्न एवं उत्सर्जित करने का संकेत देते हैं। सामान्यतः अगर लड़की माहवारी के आसपास यौन संबंध नहीं बनाती हैं तो गर्भाशय की वह परत जो मोटी होकर गर्भावस्था के लिए तैयार हो रही थी, टूटकर रत्तफ़स्राव के रूप में बाहर निकल जाती है। इसे मासिक धर्म कहते हैं।

उल्लेखनीय है कि मासिक धर्म सभी को एक ही उम्र में नहीं होता है। कुछ महिलाओं में इसकी शुरूआत 8 से 15 वर्ष की उम्र में हो जाती है हालाँकि सामान्य तौर पर मासिक धर्म की शुरूआत 11 से 13 वर्ष की उम्र की लड़कियों में शुरू हो जाती है। किसी लड़की को किस उम्र में मासिक धर्म शुरू होगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है। लड़की के जीन (Gene) की रचना, खान-पान, काम करने का तरीका, वह जिस जगह पर रहती है, उस स्थान की जलवायु कैसी है आदि। मासिक धर्म 28 से 35 दिनों के अंतराल पर नियमित तौर पर होता रहता है जो सामान्यतः 45 से 50 वर्ष की उम्र तक जारी रहता है। कुछ लड़कियों या महिलाओं को माहवारी 3 से 5 दिन तक रहती है तो कुछ को 2 से 7 दिनों तक।

एनएफएचएस 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 58 प्रतिशत महिलाएँ ही माहवारी प्रबंधन के लिए स्वच्छ साधन का उपयोग करती हैं।भारत में शिक्षा के मामले में महिलाओं की स्थिति पुरुषों से पीछे है। ग्रामीण स्तर पर स्थिति और भी खराब है। शिक्षा की कमी के कारण महिलायें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को सही तरीके से नहीं समझ पाती हैं। मासिक धर्म के समय भी महिलायें जानकारी के अभाव के कारण स्वच्छता के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती हैं। गाँवों में आज भी महिलायें पैड (नैपकिन) की जगह पुराने कपड़ो का इस्तेमाल करती हैं जिससे बीमारी होने का भय बना रहता है। यही नहीं ग्रामीण महिलायें जिस कपड़े का इस्तेमाल करती हैं वह साफ-सुथरा भी नहीं होता है। इसके अलावा नैपकिन पैड के बारे में अभी भी उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं है। इसी कारण न तो वे इसको खरीद पा रही हैं और न ही इसका इस्तेमाल कर पा रही हैं। यही नहीं यदि कुछ महिलायें नैपकीन पैड का इस्तेमाल करती भी हैं तो उनको यह नहीं पता होता कि इसका प्रयोग कितने समय तक करना है। कई बार वे एक ही पैड को दुबारा इस्तेमाल कर लेती हैं जिससे कि संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इस मामले में शहरों की स्थिति थोड़ी अच्छी है लेकिन वहाँ भी शिक्षा के स्तर पर महिलाओं में इस मुद्दे पर बात-चीत कम ही होती है। स्कूलों, कॉलेजों में भी छात्रओं के बीच एक सकारात्मक बहस कम ही होती है।

ग्रामीण व कम विकसित शहरों में यह भी देखा जाता है कि महिलायें जिस नैपकिन पैड या कपड़े का इस्तेमाल करती हैं उसे शर्म या लज्जा के कारण घर पर रखे डस्टबिन में नहीं फेंकती हैं बल्कि चोरी छुपे घर के बाहर फेंक देती हैं। इससे कई तरह की बीमारियों के फैलने का डर रहता है। साथ ही साथ पर्यावरण भी प्रदूषित होता है।

कल्याणमयी संस्था की ओर से मुकेश कुमार ने कहा कि माहवारी स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया है जिसमें माहवारी से संबंधित सभी प्रकार की जानकारी और सामाजिक भ्रांतियों पर एक विस्तृत चर्चा की गयी। और साथ ही वहाँ sanitary pad bank की स्थापना की गयी जिससे  उस एरिया की महिलाओं और बच्चीयों को कम कीमत पर हर महीने sanitary pad उपलब्ध हो पायेगा और साथ ही महिला सशक्तिकरण के हमारे प्रयास से एक महिला को जिसे पैड बैंक संचालिका का पद दिया गया जिनक नाम शोभा देवी है उन्हें रोजगार भी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।
नव अस्तित्व फाउंडेशन की ओर से Amrita singh और Pallavi Sinha ने माहवारी पर महिलाओं को जानकारी उपलब्ध कराई।कार्यक्रम में कल्याणमयी संस्था की ओर से आशा जी और मुकेश कुमार उपस्थित रहे।वार्ड संख्या 27 की पार्षद  रानी कुमारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। Being Helper संस्था के सदस्य Gautam Dutta के द्वारा कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से आयोजित कराया गया।

आलोक कुमार