स्वतंत्रता सेनानी पार्क बनाने की मांग

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UNA News
Kaimur Bureau,

भभुआ के नागरिक सहित पूर्व सभापति बजरंग बहादुर सिंह ने मांग की कि शहर के मुख्य पार्क को स्वतंत्र सेनानी पार्क नाम रखा जाए और सभी स्वतंत्रता सेनानियों का नाम अंकित किया जाए।

नगर वासियों में आक्रोश-परिवारवाद का आरोप

विनोद कु राम/संवाददाता
भभुआ – वर्तमान सभापति ने सभी स्वतंत्रता सेनानियों को दरकिनार करते हुए अपने दादा स्वतंत्रा सेनानी बद्री प्रसाद के नाम पर पार्क में स्टेचू बनाने से नगर वासियों में भारी पैमाने पर आक्रोश व्याप्त है। ज्ञात हो कि भभुआ नगर परिषद स्थित राजेंद्र सरोवर के पास स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर नामकरण कराना था। नगर परिषद के विभिन्न धर्म, जाति समुदाय से आने वाले लोगों के नाम पर समाज के उत्थान एवं पहचान के लिए पार्क का निर्माण कराना था। लोक निर्माण विभाग के मौखिक आदेश खाता संख्या- 669 खेसरा- 118 एवं आना बाद खाता संख्या- 425 खेसरा- संख्या 34 राष्ट्रीय हरित क्रांति प्राधिकार के तहत छह लाख पचास हजार रुपए से लगभग पार्क बनाने का कार्य करना था। राजेंद्र सरोवर पार्क का निर्माण 29 नवंबर 2018 को 03 (घ) प्रस्ताव पारित किया गया था। स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर पार्क बनने से आम जनता में भारी पैमाने पर खुशी की लहर दिखा। लेकिन वही तत्कालीन नगर के सभापति जैनेंद्र कुमार आर्य के सशक्त स्थाई कमेटी ने उनके दादा बद्री प्रसाद आर्य के नाम पर 27 मार्च 2018 सशक्त स्थाई कमेटी 03 /xll में प्रस्ताव पारित करके बद्री प्रसाद के नाम पर मूर्ति का अनावरण कर दिया गया। जबकि पूरे नगर में कई घरों के विभिन्न जाति समुदाय के लोगों से स्वतंत्रा सेनानी के नाम से चर्चित होने के बावजूद भी किसी खास व्यक्ति किसी खास समुदाय से आने वाले के वजूद में आकर प्रशासन ने बद्री प्रसाद के नाम पर नामांकन कर दिया। तत्कालीन नगर के सभापति बजरंग बहादुर सिंह उर्फ मलाई ने अफसोस जताते हुए कहा कि जिला प्रशासन की अनदेखी के कारण नगर वासियों की जनभागीदारी स्वतंत्र सेनानी के रूप में वजूद कायम थी लेकिन कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा सभी सेनानियों के नाम पर अपना हित साधते हुए बद्री प्रसाद के नाम पर नामकरण कर दिया गया। देश में फिरंगी खिलाफ जुल्म अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करने वाले अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की संघर्ष को बलि का बकरा बना दिया गया। इस संबंध में जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार को सूचित करने के बावजूद भी नियम एवं नियमावली को ताक पर रखकर अपनी विरासत को धाक में बदल दिया गया। नगर सभापति बजरंग बहादुर सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि जनता की सेवा जन भावना से किया जाता है खानदानी विरासत से नहीं। उन्होंने कहा कि नगर के स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को बचाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाया था लेकिन उनकी विरासत को परिवार बाद में बदल कर निजी करण करके हम को बदनाम करने के अलावा कोई अच्छा कार्य नहीं किया गया है।

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