जान जोखिम में डाल कर बाड में  निकाली शवयात्रा- नहीं मिली सरकारी मदद….
उपचार के अभाव में एक विधवा माँ नहीं बचा पाई अपने इकलौते लाल को….!!!
यह शर्मसार करने वाली घटना मध्यप्रदेश के हरदा जिले से आई है।
मध्यप्रदेश के सबसे छोटे इस कस्बाई जिले में संवेदनहीन प्रशासन तंत्र के अकर्मण्यता की यह  एक बदरंग तस्वीर है।
मध्यप्रदेश के हरदा  जिला मुख्यालय से महज लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पिडग़ांव में समूह में खाना बना कर अपना गुजर बसर  करने वाली एक बुजुर्ग विधवा  कुसुम बाई के इकलौते पुत्र राहुल धार्मिक (22वर्ष) की रविवार शाम को तेज बुखार के चलते तबियत बिगड़ने से मौत हो गई ।
सोमवार सुबह ग्रामीणों ने प्रशासन से नाँव उपलब्ध कराने की गुजारिश की ताकि मृतक युवक का अंतिम संस्कार किया जा सके किन्तु दोपहर एक बजे तक जब कोई मदद प्रशासन से समय पर नहीं मिली तब ग्रामीणो ने आपस में चंदा इकठ्ठा  कर कमर-कमर पानी में कंधो पर अर्थी को रखकर मार्ग पर लाए और करीबी ग्राम नेमावर में उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
एक विधवा माँ का इकलौता सहारा छिन गया,लगातार बारिश में ये बेबस माँ अपने कलेजे के टुकड़े को अस्पताल तक नहीं ले जा सकी उसके इलाज को तरसती रही और उसका लाल आखों के सामने ओझल हो गया।
उपचार के अभाव में इस तरह काल के गाल में समां जानें की यह दास्ताँ हरदा जिला मुख्यालय से चंद किलोमीटर की दूरी की है,हरदा जिले की टिमरनी तहसील के आदीवासी अंचल जहाँ कुपोषण बर्षों से पैर पसारे बैठा है, जहाँ पहुँच मार्गों तक पहुंचना दूभर है,वहाँ के क्या हालात होंगे….सोचकर ही सिहरन होती है।
वहरहाल सवाल यह नहीं है काल ने एक माँ से उसके जिन्दगी भर के सहारे को छीन लिया,प्रश्न ये भी नहीं है कि वो बेबस माँ  समय पर  उपचार करवाने में नाकाम रही, सवाल यह है कि सतर्कता और सुरक्षा के लिए जवाबदेही जिस तंत्र को सौंपी गई है वो इतना संवेदनहीन और निष्ठुर क्यों बना रहा…?
इस देश का यही दुर्भाग्य है कि कस्बाई बस्तियों की सिसकियाँ सन्नाटौ में  कैद होकर रह जातीं है। हमारा सिस्टम इक्सवी शताब्दी की इस चकाचौंध में भी आज भी उनसे कोसों दूर है।