हिमाचल न्यूज़ दुल्हन की तरह सजा मा हाटकोटी का मंदिर

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शिमला से लगभग 100 किलोमीटर दूर शिमला रोहड़ू मार्ग पर पब्बर नदी नदी के किनारे पर माता हाटकोटी का प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर है समुद्र तल से लगभग 1380 मीटर की ऊंचाई पर बसा पब्बर नदी के किनारे हाटकोटी मैं महिषासुर मर्दिनी का पुरातन मंदिर है कहा जाता है कि यह मंदिर 10 वीं शताब्दी के आसपास बना है इसमें महिषासुर मर्दिनी की दो मीटर ऊंची प्रतिमा है इसके साथ ही शिव मंदिर भी है जहां पत्थर पर बनाया प्राचीन शिवलिंग है द्वार को कलात्मक पत्थरों से सुसज्जित किया गया है और छत लकड़ी से निर्मित है जिस पर देवी-देवताओं की आकृति बनाई गई है मंदिर के गर्भ गृह में लक्ष्मी विष्णु दुर्गा गणेश आदि की प्रतिमाएं हैं इसके अतिरिक्त यहां मंदिर के प्रांगण में देवताओं की छोटी-छोटी मूर्तियां है बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने करवाया था और जिस स्थान पर पांडव बैठे थे उस जगह पर पांच छोटे- पत्थरों के मंदिर बने हैं मां महिषासुर मर्दिनी के नाम से प्रख्यात माता की देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है प्रख्यात है और यही कारण है कि हर साल नवरात्रों मैं 9 दिन माता के भक्तों की कतार लगी रहती है हर कोई अपनी मनोकामना पूरा करने के लिए माता के दरबार में शीश झुका कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं नवरात्रों के मध्य नजर रखते हुए श्रद्धालुओं को हर सुविधा करवाई जाती है ठहरने के लिए सराय हॉल और 9 दिन तक भंडारे का आयोजन किया जाता है मंदिर के रखरखाव के लिए कमेटी हर प्रकार से सचेत रहती है कमेटी के सदस्यों का कहना है कि या हर दिन हजारों लोग मंदिर दर्शन के लिए आते हैं और उनके लिए हर सुविधा यहां मोहिया करवाई आती है सुरक्षा के लिए पुलिस के जवान मंदिर के आसपास घूमते रहते हैं मंदिर में सुबह से लेकर शाम तक भजन कीर्तन और पूजा पाठ का क्रम चला रहता है यहां पर दिनभर पंडितों और पुजारियों के पास लोगों का जमवाड़ा लगा रहता है लोगों का कहना है कि यह मंदिर सदियों पुराना है और इसका लेख कहीं देखने को नहीं मिलता लेकिन 12 वीं सदी में इस मंदिर में अष्ट धातु की मूर्ति बनाई गई जो पूरे भारतवर्ष में किसी भी मंदिर में नहीं बनी है बताया जाता है कि मंदिर के बाहर (चरू) जो खाना बनाने के बर्तन को कहा जाता है  पब्बर नदी मैं बहा कर आया जिसे लोगों ने पकड़ लिया लेकिन इसके साथ जो दूसरा (चरु) था वह पानी में बाह गया कहां जाता है कि आज भी बारिश के दौरान यह अपनी जगह से हिलने का प्रयास करता है इसको चलते इसे जंजीरों तंत्र मंत्र की शक्तियों से बांधकर रखा गया है ताकि  यहां से यह जा ना सके