हिमाचल प्रदेश

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पुलिस लॉकअप हत्याकांड ठियोग के डीएसपी मनोज जोशी को मिली जमानत)( हिमाचल प्रदेश शिमला डिस्ट्रिक्ट के चर्चित कोटखाई गैंग रेप और मर्डर केस से जुड़े पुलिस लॉकअप हत्याकांड में ठियोग के पूर्व डीएसपी मनोज जोशी को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है हाल ही में पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी को भी स्थायी जमानत मिल गई थी इस आदेश के तहत पूर्व डीएसपी को भी उच्च न्यायालय ने जमानत दी है लॉकअप हत्याकांड में पूर्व डीएसपी मनोज जोशी की गिरफ्तारी 29 अगस्त 2017 को हुई थी हिमाचल हाईकोर्ट ने 19 जुलाई 2017 को गुड़िया व सूरज हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपी थी उल्लेखनीय है कि इस मामले में पूर्व आई जी जहूर जोदी को सुप्रीम कोर्ट ने 5 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी थी सूरज की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में सीबीआई ने कांस्टेबल से लेकर आईजी स्तर के अधिकारियों पर एक ही तरह की चार्जशीट दाखिल की थी जिस पर ट्रायल कोर्ट ने भी अक्षरश चार्जफ्रेम किया था इस मामले में खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व आई जी की जमानत याचिका पर तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने आदेश जारी किए थे इसमें खुद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शामिल थे (यह था मामला) 4 जुलाई 2017 को कोटखाई कि एक स्कूल की छात्रा स्कूल से घर आते वक्त रास्ते में लापता हो गई इसके बाद 6 जुलाई को कोटखाई के जंगलों में बिना कपड़ों के पीड़िता की लाश मिली छात्रा की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी मामले में 6 आरोपी पकड़े गए थे इसमें से सूरज की कोटखाई थाने में 18 जुलाई रात को हत्या कर दी गई थी सवाल क्यों उठता है कि थाने के अंदर जिस व्यक्ति की मौत हुई वह कोर्ट में गवाही देने के लिए तैयार था ऐसे में पुलिस वालों ने उसकी हत्या कर दी और आरोप दूसरे कैदी के ऊपर लगा दिया जो असली मुजरिम कोई और है उनको आज तक ना तो सीबीआई पकड़ पाई और ना ही पुलिस बेगुनाह को जेल के अंदर डाल दिया असली मुजरिम बहार खुलेआम घूम रहे हैं और अब यह सवाल भी उठता है जिस पुलिस वालों को पहले जेल डाल दिया था वह फिर से जमानत पर बाहर आ गए हैं और अपनी ड्यूटी फिर से ज्वाइन करने वाले हैं अगर ऐसा हुआ तो यह क्राइम और ज्यादा बढ़ सकता है जनता को पुलिस के ऊपर से पहले से ही विश्वास उठ गया है इस पर ना तो कोई नेता एक्शन ले रहा है और ना ही हिमाचल की गवर्नमेंट गुनहगार गुनाह करके भी खुलेआम घूम रहे हैं और बेगुनाहों को बेकसूर जेल के अंदर डाला जा रहा है अभी देखना यह है की उस गुड़िया को कब तक इंसाफ मिलता है और असली गुनहगार कब सलाखों के पीछे हो गए