15वें वित्त आयोग के समक्ष कांग्रेस की ओर से मजबूती के साथ रखा प्रदेश का पक्ष : धस्माना

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   देहरादून – भारत का 15वां वित्त आयोग आज प्रदेश की राजधानी देहरादून में प्रदेश की वित्तीय ढ़ांचे और आवश्यकताओं की समीक्षा के लिए आया हुआ है। कांग्रेस की ओर देश के 15वें वित्त आयोग के समक्ष उत्तराखण्ड का पक्ष मजबूती से रखा गया। कांग्रेस की ओर से प्रदेश का पक्ष वित्त आयोग के समक्ष रखते हुए उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सूर्यकान्त धस्माना ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य, जिसका गठन 9 नवम्बर 2000 में हुआ था, देश का 27वां राज्य है तथा पर्वतीय राज्यों में इसका स्थान 11वां हैं। उत्तराखण्ड की सीमाये चीन व नेपाल के साथ मिलती हैं इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से इसका सामरिक महत्व है। राज्य का 67 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र है जिसमें 47 प्रतिशत वन है व 20 प्रतिशत भूमि वन भूमि है। राज्य का कुल 85 प्रतिशत भू-भाग पर्वतीय है। राज्य में राजाजी नेशनल पार्क व जिम कार्बेट नेशनल पार्क सहित छह राष्ट्रीय पार्क व 7 सैन्चुरियां हैं। गंगा, यमुना, शारदा व इनकी सहायक नदिया, ग्लेशियर उत्तराखण्ड में विद्यमान हैं। उन्होंने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं, पर्वतीय भू-भाग, वन क्षेत्र, नदियों व ग्लेशियरों से आच्छादित इस राज्य का 1 अप्रैल 2001 को कन्द्र द्वारा विशेष राज्य का दर्जा दिया गया। विशेष राज्य के दर्जे के कारण योजना मद में आवंटित धनराशि का 90 प्रतिशत अनुदान के रूप में व 10 प्रतिशत ऋण के रूप में स्वीकृत किये जाने का प्रावधान है।
श्री धस्माना ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य देश व दुनिया के पर्यावरण संतुलन एव संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यहां के ग्लेशियर, नदियां, नहरें और डैम पूरे राष्ट्र को वर्षपर्यन्त जल एवं विद्युत  की आपूर्ति करते हैं। यहां के ग्लेशियरों, नदिनों, वनों के संरक्षण एवं संवर्धन की विशेष आवश्यकता है जिसके लिये राज्य व राज्यवासियों को कीमत अपने विकास की बलि चढ़ाकर अदा करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के इस युग में उत्तराखण्ड के ग्लेशियरों, नदियों, वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन करने की आवश्यकता है किन्तु इसकी एवज में जो राज्य व राज्यवासियों को अपने विकास की गतिविधियों में स्पीडब्रेकर लगाना पड़ता है और उसकी कीमत चुकानी पड़ती है, उसकी कोई क्षतिपूर्ति नहीं की जाती।
श्री धस्माना ने कहा कि देश और दुनिया के पर्यावरणीय संतुलन को अक्ष्क्षुण बनाये रखने के लिए राज्य की यह अपेक्षा रहती है कि राष्ट्र के समावेशी एवं सतत विकास के दृष्टिगत सामाजिक न्याय एवं समानता के सिद्धान्त के अनुसार आर्थिक एवं वित्तीय नीतियां ऐसी बनाई जायें जिससे असमानता एवं विषमताओं के कारण क्षेत्रीय असंतोष न पनपे।
श्री धस्माना ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण के पीछे जो प्रमुख कारण रहे उसमें सबसे महत्वपूर्ण कारण उत्तर प्रदेश में रहते हुए क्षेत्रीय असंतुलन व विकास में उपेक्षा व भारी विषमता ही थे। रोजगार,  स्वास्थ्य, शिक्षा, विषम भौगोलिक परिस्थितियां और ऊपर से घोर उपेक्षा के कारण ही लोगों में अलग राज्य की चाहत पैदा हुई और अन्तोगत्वा लम्बे संघर्ष  और बलिदानों के बाद 9 नवम्बर 2000 को उत्तराखण्ड राज्य गठित हुआ। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य को गठन के साथ ही विरासत में भारी कर्जा, कमजोर बुनियादी एवं आर्थिक ढांचा, सीमित संसाधन, रोजगार के सीमित संसाधन, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पर्यावरण  के लिए अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण एवं संवर्धन करने का अतिरिक्त बोझ आदि  मिला।
वित्त आयोग से अन्य हिमालयी राज्य की मुकाबले उत्तराखण्ड की उपेक्षा का जिक्र करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री धस्माना ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य को 13वें वित्त आयोग तक अपने राजस्व घाटे की भरपाई के लिए Revenue Deficit Grant-RDG मिलता रहा। 12वें वित्त आयोग ने व 13वें वित्त आयोग ने भी जम्मू कश्मीर एवं हिमाचल प्रदेश, जो कि उत्तराखण्ड जैसी परिस्थितियों एवं भौगोलिक समानता वाले राज्य थे, के साथ उत्तराखण्ड को  RDG  स्वीकृत किया।
उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग ने राज्य के साथ भारी अन्याय किया और ना जाने किस आधार पर राज्यों के केन्द्रीय सहायता स्वीकृत किये जाने से पूर्व उत्तराखण्ड राज्य में राजस्व की प्राप्ति के सापेक्ष व्यय, ऋण/ब्याज, देनदारियों, राजकोषीय घाटे एवं राज्य के सकल घरेलू उत्पाद वृद्धिदर तथा टैक्स प्राप्तियां के अनुपात का सही पूर्वानुमान नहीं लगाया और अन्य घरेलू व बाहरी एवं प्राकृतिक स्थितियों, आपदा, वन क्षेत्र, राज्य का पर्यावरणीय योगदान, सीमित कृषि भूमि, जन पलायन, मंहगी निर्माण सामग्री आदि नकारात्मक स्थितियों को नजरअंदाज करते हुए उत्तराखण्ड को 14वें वित्त आयोग के  Revenue Deficit Grant-RDG से मरहूम कर दिया व जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश समेत सभी 11 राज्यों को  RDG देते हुए उत्तराखण्ड को शून्य RDG पर ला कर खड़ा कर दिया।
श्री धस्माना ने कहा कि राज्य को केन्द्रीय सहायता (आरडीजी) के अतिरिक्त पहले योजना आयोग द्वारा मिलने वाली सामान्य केन्द्रीय सहायता (ए सी ए) तथा विशेष प्लान सहायता (एस पी ए) बन्द कर दी गई। विशेष राज्य का दर्जा होने के कारण राज्य को इन सहायताओं के माध्यम से जो धनराशि मिलती थी उनके बन्द होने से प्रतिवर्ष लगभग 2500 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आर.डी.जी. के अलावा जी.एस.टी. का दुष्प्रभाव भी राज्य को झेलना पड़ रहा है। उत्तराखण्ड राज्य मैन्युफैक्चरिंग स्टेट है, यहां उत्पादन क्षमता अधिक है, जनसंख्यां का घनत्व कम होने के कारण उपभोग कम है अतः जीएसटी के माध्यम से कर प्राप्तियां 39 प्रतिशत गिरी हैं।
श्री धस्माना ने आयोग के समक्ष विस्तार से पक्ष रखते हुए कहा कि 14वें वित्त आयोग द्वारा राज्य के कर प्राप्तियों का अनुमानित मूल्यांकन 44.52 प्रतिशत नॉन-टैक्स राजस्व 86.25 प्रतिशत किया गया तथा राजस्व खर्च 14.21 प्रतिशत कम कर आंकलन किया गया। अतः पूरे पांच वर्ष में यह घाटा रुपये 47278 करोड़ तक पहुंच जायेगा।
कांग्रेस प्रतिनिधिमण्डल का नेतृत्व करते हुए श्री धस्माना ने 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों से उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से आग्रह किया कि नीति नियंताओं को नीतियों का निर्धारण किये जाने के वक्त राज्यों से मिलने वाले कर एवं उपलब्धियों के साथ-साथ निम्न बिन्दुओं पर भी ध्यान देना न्यायोचित होगा।
1. राज्यों के निर्माण की अवधारणा, कमजोरियां, कमियां, अक्षमता एवं अपेक्षाएं क्या हैं।
2.  देश को राज्य से किस तरह की पर्यावरणीय लाभ/सेवायें मिल रही हैं।
3. देश की रक्षा/सुरक्षा सम्बन्धी मामलों में राज्य का क्या योगदान है।
4.  राज्य के विकास की अन्य राज्यों के अपेक्षाकृत क्या स्थिति है।
5.  राज्य के लोगों के जीवनयापन का स्तर एवं कठिनाइयां क्या है।
6.  राज्य के लोगों की प्रवृत्ति क्या है, जैसा कि अनेको कठिनाइयों, आपदाओं, आर्थिक  विषमताओं एवं संघर्षों का धैर्य एवं शान्ति के साथ सामना करने की प्रवृत्ति।
श्री धस्माना ने कहा कि देश व दुनिया को पर्यावरणीय सेवायें उपलब्ध कराने के एवज में राज्य को ग्रीन बोनस पर निर्णय करना चाहिए। उत्तराखण्ड राज्य हिमालयी श्रृंखला का मध्य भू-भाग है व अभी यह हिमालयी क्षेत्र अपने शैशव काल में है व इसकी बनावट व विकास जारी है। जिसके कारण यहां भू-गर्भीय  हलचल चलती रहती है और जिसके कारण यहां भूकम्प, भू-स्खलन, अतिवृष्टि (बादल फटना), बाढ़, वनाग्नि जैसी प्राकृतिक आपदायें आती रहती हैं। वर्ष 1991 में उत्तरकाशी-टिहरी में भूकम्प, 1999 में चमोली-रुद्रप्रयाग में भूकम्प वर्ष 2010, 2012 में अतिवृष्टि के कारण आपदा व 2013 में सदी की सबसे बड़ी आपदा जिसमें राज्य का पैंतीस हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र प्रभावित हुआ, हजारों लोगों की जानें गई व अरबों रुपये की क्षति हुई, इस प्रकार से यह राज्य विशेष सहायता प्राप्त करने का अधिकारी है।
उन्होंने प्रदेश को आवंटित बजट को नाकाफी बताते हुए कहा कि राज्य में अवस्थापना सुविधाओं का भारी अभाव है। राज्य में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं का नेटवर्क बनाये जाने व प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण, जिला अस्पतालों के उच्चीकरण की आवश्यकता है जिसके लिए पर्याप्त बजट होना चाहिए।
श्री धस्माना ने कहा कि विद्युत उत्पादक राज्य होने के बावजूद घरेलू उपभोग व उद्योगों को बिजली उपलब्ध कराने के लिए विद्युत उत्पादन व वितरण के क्षेत्र में बहुत काम करने की आवश्यकता है। केन्द्रीय व एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा भागीरथी इको सैन्सिटिव जोन घोषित किये जाने के कारण उत्तराखण्ड राज्य में भागीरथी एवं अलकनन्दा नदियों में बनी व निर्माणाधीन जल-विद्युत परियोजनायें ठप पड़ी हैं। उत्तराखण्ड की नदियों की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए 2 मेगावॉट का मानक तय किया गया है जबकि इसी प्रकार की नदियों पर पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में 25 मेगावॉट का मानक तय किया गया है। इन प्रतिबन्धों व विषमताओं के कारण राज्य का विद्युत उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। राज्य में उत्पादित होने वाली विद्युत को नेशनल ग्रिड में पारेषित किया जाता है और उसका जो लाभ राज्य को मिलना चाहिए वो नहीं मिलता। इसके विपरीत राज्य को अन्य राज्यों से मंहगी बिजली खरीदनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय प्रतिबन्धों एवं ईको सेन्सिटिव जोन होने के कारण स्थायी रोजगार एवं विकास की गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। राज्य में 6 नेशनल पार्क व 7 वन्य जीव अभ्यारण्य (सैन्क्च्युरी), 1 नन्दा देवी बॉयोस्फीयर रिजर्व व एक गोविन्दबल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान है, जिनमें पर्यावरणीय प्रतिबन्धों कारण स्थानीय बेरोजगार युवाओं के पारम्परिक रोजगार के अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और युवा पलायन के लिए मजबूर होते हैं और इसके कारण सीमान्त व पड़ोसी देशों से सटे इलाकों में अनेक गांव मानव रहित होते जा रहे हैं।
श्री धस्माना ने कहा कि उत्तराखण्ड में चार धाम यात्रा, कांवड़ यात्रा, अर्द्धकुम्भ, पूर्ण कुम्भ, गंगा दशहरा आदि धार्मिक पर्यटन की गतिविधियों में करोड़ों तीर्थयात्री आते हैं जिनकी देखरेख, आवभगत, कानून व्यवस्था का भार राज्य पर पड़ता है किन्तु इसका कोई लाभ राज्य को नहीं मिलता क्योंकि आज के इंटरनेट युग में अधिकांश यात्री प्री-बुकिंग पर आते हैं और जी.एस.टी. लागू होने के कारण उत्तराखण्ड को राजस्व नहीं मिल पाता।
कांग्रेस ने 15वें वित्त आयोग से आग्रह करते हुए कहा कि राज्यों को केन्द्रीय सहायता स्वीकृत किये जाने से पूर्व हमारे पत्र में उल्लेखित सभी बिन्दुओं पर विचार उपरान्त राज्य को RDG की स्वीकृति के साथ ही ग्रीन बोनस दिये जाने हेतु निर्णय लेने की कृपा करें।
वित्त आयोग से भेंट करने वाले उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधिमण्डल में श्री धस्माना के साथ पीसीसी सदस्य राजेश चमोली भी शामिल थे ।

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